ऋषि सुनक की पार्टी 14 साल में पहली बार हुई सत्ता से बाहर,लेबर पार्टी सत्तासीन

0
149

आज जब यूके का चुनाव परिणाम जारी हुआ और जिस तरह के परिणाम लेबर पार्टी के पक्ष में गए उससे ऋषि सुनक अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकते हैं। 14 साल तक सरकार में रहने के बाद, प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के नेतृत्व वाली  कंजर्वेटिव पार्टी को अब तक की सबसे बुरी चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।सत्ता विरोधी लहर और अर्थव्यवस्था की स्थिति से लेकर आव्रजन और स्वास्थ्य सेवा तक कई मुख्य कारण हैं जिस वजह से कंजर्वेटिव पार्टी ने 14 वर्ष बाद लेबर पार्टी के हाथ सत्ता गंवाई।

सुनक सरकार की हार का सबसे महत्वपूर्ण कारण पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन में आए संकटों की श्रृंखला है. अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, देश में वृद्धि दर काफी काम रहा और अन्य प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बहुत खराब प्रदर्शन रहा।2023 में, ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सिर्फ 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और साल की शुरुआत में ही मंदी आ गई।

ब्रिटिश समाज की आधारशिला एनएचसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है।कर्मचारियों की कमी की वजह से मरीजों को लंबे समय तक मेडिकल मदद नहीं मिल पा रही है,जिसकी वजह से ऋषि सुनक की सरकार के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा था। एंबुलेंस और अस्पताल के बिस्तरों के लिए लंबे समय तक लोगों को प्रतीक्षा करना पड़ रहा था। ऐसे में ऋषि सुनक 1 साल से ज्यादा वक्त तक सत्ता में रहने के बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाए और उन्हें लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ी है।

इस साल की शुरुआत में ऐसी अफवाहें थी कि सांसदों का एक समूह सुनक की जगह उनके पूर्व नेतृत्व प्रतिद्वंद्वी और उनके मंत्रिमंडल में हाउस ऑफ कॉमंस के नेता पेनी मॉडर्न को प्रधानमंत्री बनना चाहते थे।लेकिन सुनक इस बात के लिए तैयार नहीं थे।वह पार्टी में अपने पद पर बने रहे, क्योंकि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने चुनावी साल के इस मोड़ पर भारतीय मूल के ब्रिटिश नेता को बदलने के विचार को पागलपन करार दिया।इस प्रकार पार्टी में दो विचारधारा की लहर दौड़ पड़ी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ऋषि सुनक की आलोचना करते हुए कंजरवेटिव पार्टी को छोड़ने का और लेबर पार्टी का दामन थामने का ऐलान कर दिया।

ऋषि सुनक का माइग्रेशन पॉलिसी विवाद का एक महत्वपूर्ण बिंदु रहा है।इंग्लिश चैनल पार करने वाले प्रवासियों और शरण चाहने वालों की संख्या दिनों दिन तेजी से बढ़ रही है।ऐसे में सरकार की सीमा नियंत्रण उपायों की लोगों द्वारा लगातार आलोचना होती रही है। इसके बाद प्रवासियों को निर्वासित करने की ऋषि सुनक की योजना, जिसमें कई प्रवासियों को रवांडा भेज दिया गया, उसको लेकर यूके सरकार पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और अमानवीय होने के आरोप लगे हैं।आलोचकों का तर्क है कि यह रणनीति लोगों को अपने देश से भगाने के लिए प्रेरित करने वाले कारणों को संबोधित करने में विफल रही है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किएर स्टार्मर जो ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बनने वाले हैं उन्हें जीत की बधाई दी है।इंग्लैंड के नए प्रधानमंत्री के शासन काल में इंग्लैंड और भारत के बीच के संबंध की बात करें तो यह पहले ही की तरह गतिशील रहेगा।लेबर पार्टी ने भी अपने मेनिफेस्टो में वादा किया है कि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो भारत के साथ नई रणनीतिक साझेदारी विकसित की जाएगी, जिसमें मुक्त व्यापार समझौता भी शामिल रहेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here