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देश- दुनिया में धाक जमाने वाले भारत की प्राचीन विधा सर्कस विलुप्ति के कगार पर

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बीरेंद्र कुमार झा

सदियों से सर्कस भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है। देश ने दुनिया के कुछ सबसे प्रसिद्ध और उत्कृष्ट सर्कस कलाकारों को जन्म दिया। समय के साथ, कई सर्कसों ने खुद को न सिर्फ देश में अपने आपको सर्वश्रेष्ठ रूप में प्रतिष्ठित किया,बल्कि दुनिया भर में खूब बहवाहियां लूटी।

देश दुनिया में धमाल मचाने वाले भारत के कुछ प्रमुख सर्कस

* ग्रेट बॉम्बे सर्कस

ग्रेट बॉम्बे सर्कस भारत के सबसे शानदार और ऐतिहासिक सर्कसों में से एक रहा है। इसकी स्थापना 1920 में हुई थी।यह अपने साहसी कलाबाजों, निपुण बाजीगरों और अद्भुत पशु करतबों के लिए प्रसिद्ध रहा है।

* जेमिनी सर्कस

भारत में एक और प्रसिद्ध सर्कस जिसने भारतीयों की पीढ़ियों को प्रसन्न किया है वह है जेमिनी सर्कस। 1951 में स्थापित सर्कस अन्य जानवरों के अलावा हाथियों, घोड़ों और बाघों का उपयोग करके लुभावने पशु शो करता था।अब बाजीगरी, कलाबाजी और हवाई प्रदर्शन में विशेषज्ञता वाले प्रतिभाशाली कलाकार  जेमिनी सर्कस में प्रदर्शित होते हैं।

* राज कमल सर्कस

भारत में सबसे प्रसिद्ध सर्कसों में से एक, राज कमल सर्कस की स्थापना 1975 में की गई थी। सर्कस के दौरान कलाबाजी, करतब और हवाई करतब सहित कई गतिविधियाँ प्रस्तुत की जाती हैं।

* जंबो सर्कस

भारत में एक और प्रसिद्ध सर्कस, जंबो सर्कस, 1989 से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। हवाई प्रदर्शन, कलाबाजी और करतब दिखाना सर्कस में की जाने वाली कुछ गतिविधियाँ हैं। जंबो सर्कस विशेष रूप से अपने पशु कृत्यों के लिए प्रसिद्ध था।

* महान रॉयल सर्कस

भारत में, ग्रेट रॉयल सर्कस एक प्रसिद्ध सर्कस है जो 1976 से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। इस सर्कस का एक अलग प्रशंसक वर्ग है क्योंकि इसमें ट्रैपेज़ कलाकार, फायर ईटर और बाजीगर जैसे कई अलग-अलग कार्य हैं। ग्रेट रॉयल सर्कस में शेर, बाघ और हाथी अन्य जानवरों के साथ मिलकर प्रदर्शन करते थे।

* एम्पायर सर्कस

1880 में स्थापित होने के कारण, एम्पायर सर्कस भारत के सबसे पुराने सर्कसों में से एक रहा है। सर्कस अपने उत्कृष्ट कलाकारों  के प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध है। एम्पायर सर्कस में जोकर शो और ट्रैपेज़ एक्ट भी प्रदर्शित किए जाते हैं।

ग्रेट गोल्डन सर्कस

* भारत का ग्रेट गोल्डन सर्कस अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध है और घर-घर में मशहूर है। सर्कस में इथियोपिया, चीन और रूस जैसे कई देशों के असाधारण कलाकार शामिल हैं। विशेष रूप से यह सर्कस शेर, बाघ और हाथी के प्रदर्शन के लिए जाना जाता था।

* ग्रेट रेमन सर्कस और अमर सर्कस

भारत में स्थापित होने वाले पहले सर्कसों में से एक ग्रेट रेमन सर्कस था, जिसे 1920 में कीलेरी कुन्हिकन्नन के शिष्य और उस समय देश के अग्रणी कलाकारों में से एक कल्लन गोपालन द्वारा शुरू किया गया था। कल्लन गोपालन ने एक बार एक सर्कस साम्राज्य की स्थापना की, जिसमें अन्य चीजों के अलावा, नेशनल सर्कस और भारत सर्कस भी शामिल थे। गोपालन ने 1960 के दशक में अमर सर्कस की स्थापना की; यह आज भी चल रहा है और हाल ही में केपी हेमराज द्वारा चलाया गया था।

* रेम्बो सर्कस

1991 से लोकप्रिय भारतीय सर्कस रेम्बो सर्कस दर्शकों का मनोरंजन करता आ रहा है। सर्कस अपनी शानदार कलाबाजी, जोखिम लेने वाले कारनामे के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, रेम्बो सर्कस अपने आग खाने वाले और जोकर कार्यों के लिए प्रसिद्ध है।

जानवरों और मानव कलाकारों की अद्भुत कलाकारी के केंद्र होते थे सर्कस

प्रारंभिक मानव जंगलों में जानवरों के बीच रहा करते थे।सभ्यता के विकास के साथ जंगलों और जानवरों से यह दूर होता गया,लेकिन जानवरों में इसकी दिलचस्पी बरकरार रही। सर्कस में इन जानवरों को करतब दिखाते देख दर्शक आनंद विभोर हो जाया करते थे।यहां तक की सिनेमा में रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य भी इन्हीं सर्कस के जानवरों पर चित्रांकित किए जाते थे।

2018 ईस्वी से सर्कस में किसी भी जानवरों और चिड़ियों के प्रदर्शन पर लगी रोक

देश के पशु क्रूरता निवारण अधिनियम ने पहले मनोरंजन प्रयोजनों के लिए भालू, बंदर, तेंदुआ, शेर और बाघ का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि, हाथियों का उपयोग जारी रखा गया था।लेकिन बाद में कई सर्कसों से इनपर क्रूरता की शिकायतों के बाद 2018 ईस्वी से सर्कसों में सभी प्रकार के जानवरों और पक्षियों के प्रदर्शन पर रोक लगा दिया गया।

सिर्फ मानव कलाकारों पर निर्भर हो गया सर्कस उद्योग

जानवरों का साथ छूट जाने के बाद सर्कस उद्योग पूरी तरह से मानव कलाकारों पर निर्भर हो गया। सर्कस में मानव कलाकार अपनी भिन्न-भिन्न एन अपनी भिन्न-भिन्न एन कलाओं से दर्शकों का खूब मनोरंजन करते हैं खासकर जोकरों के करतब बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी खूब भाते हैं।

अस्तित्व बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे सर्कस

कभी देश दुनिया में धूम मचाने वाला सर्कस इस समय एक तरह से डायलिसिस पर चला गया है।जेमिनी सर्कस के प्रबंधक एके सिंह के साथ हुई बातचीत से पता चला की 2000 ईस्वी में लगभग 219 रजिस्टर्ड सर्कस इस देश में हुआ करते थे, जो आज घटकर 9- 10 हो गए हैं।अपनी कला से दूसरों को हंसने वाले, मनोरंजन करने वाले कलाकारों और सर्कस वाले को अब अपना भविष्य अंधकारमय दिखने लगा है। कभी 12 लाख लोगों को रोजगार देने वाले इस सर्कस उद्योग में अब गिनती के लोग बच गए हैं।सरकार भी देश की इस प्राचीनतम मनोरंजन की विधा सर्कस को आगे बढ़ाने की दिशा में कोई कार्य नहीं कर रही है।

सर्कस पर संकट के कारण

* जानवरों पर प्रतिबंध

सर्कस देखने जाने वाले लोगों का एक बड़ा समूह जानवरों का करतब देखना पसंद करते थे,लेकिन सर्कस में जानवरों पर प्रतिबंध लगने की वजह से जानवरों के करतब नहीं होने से सर्कस से इनका मोहभंग हो गया है।

* बाल कलाकारों के प्रशिक्षण एवम प्रदर्शन पर रोक

* बालश्रम अधिनियम के कारण सर्कस में न सिर्फ बच्चों के शो आयोजित करने पर प्रतिबंध है,बल्कि सर्कस में शो के दौरान इनके प्रशिक्षण पर भी प्रतिबंध है।लिहाजा सर्कस में दक्ष कलाकारों का भी अभाव हो रहा है।

* तेजी से विकसित हो रहे मनोरंजन के अन्य साधन

पहले लोगों के समक्ष मनोरंजन के सीमित साधन उपलब्ध थे। ऐसे में जब सर्कस कहीं लगता था तो यहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी, लेकिन अब टीवी सीरियल्स और ओटीटी जैसे मनोरंजन के कई साधन के आने से सर्कस में लोगों की भीड़ कम होने लगी है।

* भविष्य के अनिश्चय की आशंका

मनोरंजन जगत की प्रतिद्वंधिता में पिछड़ने की वजह से सर्कस में रोजगार के अवसर तेजी से घटे हैं।ऐसे में यहां काम करने वाले कलाकारों को लगता है कि किसी भी समय वे सर्कस के व्यवस्थापकों के द्वारा कार्य मुक्त किए जा सकते है।लिहाजा उनमें ने नैराश्य की भावना प्रभावी हो जाती है और वे सर्कस के कार्यक्रमों में अपना सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

सर्कस उद्योग में सुधार की संभावनाएं

* सरकार द्वारा प्रश्रय
सर्कस का उद्गम स्थल भारत होने के कारण भारत सरकार को अपने मनोरंजन की इस प्राचीनतम विधा को बचाने के लिए हर तरह से आगे आना चाहिए। सरकार सर्कस उद्योग को मनोरंजन करो या जीएसटी से मुक्त करने के साथ-साथ इन्हें सस्ते दरों पर सर्कस लगाने के लिए मैदान उपलब्ध करा कर सर्कस के पुनरुत्थान में मदद कर सकती है।

* कलाकारों को विशेष प्रशिक्षण

पशु क्रूरता से जुड़े कानून की वजह से सर्कस में जानवरों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाने के बाद अब सर्कस का सारा दारोमदार मानव कलाकारों पर आ गया है। ऐसे में जिस प्रकार से अन्य उद्योगों में रिसर्च और खोज इकाई होती है, वैसे ही सर्कस उद्योग को भी सर्कस में नई-नई संभावनाओं को तलाशने के लिए रिसर्च विंग बनाए जाने चाहिए और बेहतर कलाकारों को प्रतिस्थापित करना चाहिए ।

* बदलते ट्रेंड पर नजर

मानव समूह किसी एक ही ढर्रे पर हमेशा नहीं चलता है बल्कि समय के साथ – साथ इसके हाव-भाव,स्वभाव और क्रियाकलापों में बदलाव आता है। आज के दिनों में लोगों में अपने समय के हिसाब से मनोरंजन करने की प्रवृत्ति बड़ी है। ऐसे में सर्कस में एक निर्धारित समय पर होने वाले कार्यक्रमों को देखने के लिए लोगों के पास समय नहीं होता है या लोगों की इसमें अभिरुचि नहीं होती है। लिहाजा जिस प्रकार से फिल्म उद्योग वाले टीवी और ओटीटी जैसे माध्यम को अपनाकर फल फूल रहे हैं वैसे ही सर्कस को भी प्राचीन तरीके के साथ-साथ इस नवीन साधन टीवी,यू ट्यूब और ओटीटी को अपना कर न सिर्फ अपने आप को पुनर्स्थापित करे बल्कि पहले से भी बेहतर मुकाम हासिल करने का प्रयास करे।

 

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