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सीबीआई ने सृजन घोटाला की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी ही बहु रजनी प्रिया को किया गिरफ्तार ,मिलेंगे कई अहम सुराग !

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न्यूज़ डेस्क 

2017 में बिहार के भागलपुर में सृजन घोटाला का पर्दाफास हुआ था जिसमे दो हजार करोड़ के घोटाले की बात सामने आई थी। इस घोटाले को अंजाम दिया दिया था एनजीओ सृजन की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी। तब कहा गया था कि इस घोटाले में बिहार के कई नेताओं को भी लाभ मिला है। जांच सीबीआई के हवाले की गई। कई लोग गिरफ्तार भी हुए। जांच के दौरान ही मनोरमा देवी का निधन भी हो गया लेकिन इस घोटाले से पर्दाफास नहीं हो सका था। मनोरमा देवी ने निधन सेपहले ही अपनी बहु रजनी प्रिया को संस्था का सचिव बनाया था लेकिन बहु फरार चल रही थी। अब दस तारीख को सीबीआई की टीम ने रजनी प्रिया को गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया है। कहा जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद कई सफेदपोश की कलई खुल सकती है।गिरफ्तारी के बाद रजनी प्रिया को  सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया और दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर पटना लाया गया है।            
     सीबीआई ने करोड़ों की मालकिन रजनी प्रिया के मकान पर कई बार इश्तेहार चश्पा किया। कई जमीन भी जब्त की. ईडी ने भी कई संपत्तियों को अटैच किया। सीबीआई ने अमित और रजनी प्रिया को भगोड़ा घोषित कर दिया।  पता बताने वालों के लिए इनाम की भी घोषणा की गई थी क्योंकि रजनी प्रिया और अमित वह मुख्य आरोपी हैं जिनके पास से सृजन घोटाले से जुड़े कई अहम सबूत मिल सकते हैं। कई सफेदपोशों का भी पर्दाफाश हो सकता है। 
     बता दें कि सृजन घोटाले की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी के निधन के बाद आरोपी बेटे अमित कुमार और बहू रजनी प्रिया की संपत्ति पर 10 जनवरी 2023 को भी और जून 2023 में भी कोर्ट ने नोटिस दिया था। अमित कुमार और रजनी प्रिया दोनों को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन न्यायालय में हाजिर नहीं होने पर सीबीआई ने उनके पुराने आवास तिलकामांझी स्थित न्यू विक्रमशिला कॉलोनी में उनके तीन मकानों पर नोटिस चिपकाया था। सीबीआई ने अगस्त 2017 में सृजन घोटाले की जांच शुरू की थी, जिसमें अभी तक कई बैंक के अधिकारियों से लेकर क्लर्क व क्लर्क सलाखों के पीछे हैं। 
      गौरतलब है  कि सृजन एनजीओ के खाते में ट्रांसफर की गई सरकारी राशि का बंदरबांट हुआ था। इस घोटाले में तकरीबन दो हजार करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी। सृजन एनजीओ की सचिव मनोरमा देवी ने अपनी मौत से पहले ही बहू रजनी प्रिया को एनजीओ का सचिव बना दिया था। इससे खफा लोगों ने सृजन के बैंक खाते में जमा रुपये वापस नहीं किए। इसके चलते भू-अर्जन का खाता बाउंस हो गया।  तत्कालीन जिलाधिकारी ने शक के आधार पर जांच कराई तो अरबों का घोटाला सामने आया था। 

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