भारत में कैंसर एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। जिस बीमारी को कभी उम्र के आखिरी पड़ाव से जोड़ा जाता था, वह अब युवाओं और मध्यम आयु के लोगों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है।बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती उम्र, प्रदूषण और गलत खानपान के कारण आने वाले सालों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।इसी को लेकर केंद्र सरकार ने भी चिंता जताई है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि अगर मौजूदा हालात ऐसे ही रहे, तो साल 2040 तक भारत में कैंसर मरीजों की संख्या 20 लाख तक पहुंच सकती है।यह आंकड़ा न सिर्फ डराने वाला है, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि कैंसर के मामलों में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है, चीन और अमेरिका के बाद भारत में सबसे ज्यादा कैंसर मरीज हैं। उन्होंने कहा कि बीमारियों का स्वरूप बदल रहा है, पहले जो बीमारियां बुजुर्गों में होती थीं, वे अब कम उम्र में ही दिखने लगी हैं।कैंसर भी इन्हीं बीमारियों में से एक है।
2040 तक कैंसर मरीज के बढ़ने के पीछे निम्नलिखित कारण हैं।
1. बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है – भारत में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चूंकि कैंसर का खतरा उम्र के साथ बढ़ता है, इसलिए जैसे-जैसे बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी, कैंसर के मरीज भी बढ़ेंगे।अध्ययनों के अनुसार., 60 से 74 वर्ष की आयु के लोगों में कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाता है।जनसंख्या का आकार और उम्र की संरचना बदलने से कुल मामलों में भारी वृद्धि हो रही है।
2. लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें – आज की लाइफस्टाइल कैंसर को न्योता दे रही है।मेडिकल रिसर्च के अनुसार भारत में करीब 70 प्रतिशत कैंसर के मामले रोके जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आदतों में बदलाव जरूरी है। इसके मुख्य कारण तंबाकू और गुटखा सेवन, शराब का ज्यादा यूज, जंक फूड और इन बैलेंस्ड डाइट और फिजिकल एक्टिविटी की कमी और मोटापा हैं। इनमें से तंबाकू आज भी भारत में कैंसर का सबसे बड़ा कारण है।
3. प्रदूषण भी बन रहा है बड़ा खतरा-विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वायु प्रदूषण को कैंसरफैलाने वाला कारण माना है ।भारत के कई शहरों में PM2.5का स्तर सुरक्षित सीमा से बहुतज्यादा है, लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जा खतरा उन लोगों में भी है, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है।
भारत में कैंसर का स्वरूप हर क्षेत्र में अलग-अलग है।महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम है इसके बाद सर्वाइकल कैंसर है। HPV टीकाकरण और समय पर जांच से इसमें सुधार दिखाहैं पुरुषों में मुंह का कैंसर, ओफेफड़ों का कैंसर, जो अब महिलाओं में भी बढ़ रहा है. शहरी क्षेत्रों में कोलोरेक्टल (आंतों का) कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. यह तंबाकू से जुड़ा न होने वाला कैंसर है. पूर्वोत्तर राज्यों में सिर और गर्दन के कैंसर ज्यादा देखने को मिलते हैं. सरकारी और स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुमान बताते हैं कि हर 9 में से हर 9 में से 1 भारतीय को जीवन में कभी न कभी कैंसर हो सकता है. यह आंकड़ा बताता है कि कैंसर अब किसी एक वर्ग या उम्र की बीमारी नहीं रह गई है.
राज्य मंत्री ने बताया कि देश के लगभग हर जिला अस्पताल में कैंसर इलाज की सुविधा विकसित की जा रही है। सरकार की कोशिश है कि इलाज कम कीमत या मुफ्त में लोगों तक पहुंचे. स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर एक व्यापक योजना पर काम चल रहा है।
