क्या पीएम मोदी और राहुल गाँधी की आमने -सामने डेबिट देखने को मिल सकती है ?

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न्यूज़ डेस्क
 आज भले ही संभव नहीं हो लेकिन आने वाले समय में इस बात की सम्भावना अब बढ़ती जा रही है कि अमेरीका की तर्ज पर भारत में भी फेस-टू-फेस डिबेट देखने को मिल सकती है? यह बात और है कि कांग्रेस नेता राहुल गाँधी पीएम मोदी को आमने -सामने बहस करने की चुनौती भी दे रहे हैं और देश के कई नामचीन लोग भी यह चाहते हैं कि किसी भी समृद्ध लोकतंत्र के लिए दो विपरीत नेताओं के बीच बहस होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि देश का मिजाज क्या चाहता है और देश की जनता किसे पसंद करती है और देश के भीतर कौन से मुद्दे ज्यादा जरुरी है।    

राहुल गाँधी ने पीएम मोदी को देश की हालत पर चर्चा करने के लिए खुली चुनौती दी है। ऐसे में अगर पीएम मोदी इस चुनौती को स्वीकार करते हैं तो खुले मंच पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी से डिबेट करते नजर आ सकते हैं । क्या पीएम मोदी इस चैलेंज के लिए पूर्व जजों का न्यौता स्वीकार करेंगे? दरअसल, उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी के यह कहने के एक दिन बाद कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सार्वजनिक बहस में भाग लेने के लिए 100% तैयार हैं, पत्रकार, एन राम द्वारा भेजे गए निमंत्रण का कांग्रेस नेता ने जवाब दिया।

राहुल गांधी ने लिखा, “कृपया हमें बताएं कि क्या प्रधानमंत्री भाग लेने के लिए सहमत हैं, जिसके बाद हम बहस के विवरण और प्रारूप पर चर्चा कर सकते हैं।” अगर ऐसी कोई बहस होती है तो राहुल गांधी या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाग लेंगे।

राहुल गांधी ने लिखा कि”मैंने आपके निमंत्रण पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी के साथ चर्चा की है। हम सहमत हैं कि इस तरह की बहस से हमारे संबंधित दृष्टिकोण को समझने में मदद मिलेगी और उन्हें एक सूचित विकल्प चुनने में मदद मिलेगी। किसी भी अप्रमाणित आरोपों पर लगाम लगाना भी महत्वपूर्ण है। हमारी संबंधित पार्टियाँ चुनाव लड़ने वाली प्रमुख पार्टियों के रूप में, जनता सीधे अपने नेताओं की बात सुनने की हकदार हैं,”

बता दें कि गुरुवार को पूर्व जजों की ओर से नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी को निमंत्रण भेजकर खुली बहस के लिए आमंत्रित किया गया, जहां वे एक-दूसरे के आरोपों का जवाब देंगे। निमंत्रण में कहा गया कि जनता ने दोनों पक्षों से केवल आरोप और चुनौतियाँ सुनीं लेकिन कोई सार्थक प्रतिक्रिया नहीं दी।

“पत्र में कहा गया कि “18वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव पहले ही अपने मध्य बिंदु पर पहुंच चुका है। रैलियों और सार्वजनिक संबोधनों के दौरान, सत्ता में मौजूद पार्टी भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस दोनों के सदस्यों ने लोकसभा के मूल से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे हैं। हमारा संवैधानिक लोकतंत्र। प्रधान मंत्री ने आरक्षण, अनुच्छेद 370 और धन पुनर्वितरण पर कांग्रेस को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जिन खड़गे ने संविधान के संभावित विनाश, चुनावी बांड योजना और चीन के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया पर प्रधान मंत्री से सवाल किया है।

“…हमारा मानना है कि गैर-पक्षपातपूर्ण और गैर-व्यावसायिक मंच पर सार्वजनिक बहस के माध्यम से हमारे राजनीतिक नेताओं से सीधे सुनने से नागरिकों को बहुत लाभ होगा। यह आदर्श होगा यदि जनता न केवल प्रत्येक पक्ष के प्रश्न को सुने बल्कि प्रतिक्रियाओं को भी सुने हमारा विचार है कि इससे हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी। यह अधिक प्रासंगिक है क्योंकि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और पूरी दुनिया हमारे चुनावों पर उत्सुकता से नजर रख रही है यह न केवल जनता को शिक्षित करके, बल्कि स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र की सच्ची छवि पेश करने में भी एक महान मिसाल है।”

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