अगर विपक्षी एकता सफल हुई तो नीतीश बनेंगे संयोजक !

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अखिलेश अखिल 

अगर पटना का विपक्षी महाजुटान सफल हो गया तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी एकता के संयोजक बन सकते हैं। नीतीश कुमार पिछले कई महीने से विपक्ष को एक जुट करने में जुटे हैं। कई नेताओं से उनकी मुलाकात भी हुई है। जिन नेताओं से उनकी मुलाकात हुई है ,सबको व्यक्तिगत स्तर पर पटना आने का न्योता दिया है। दो चार दिनों के भीतर कुमार दक्षिण की यात्रा कर सकते हैं। दक्षिण में उनकी मुलाकात तमिलनाडु के सीएम स्टालिन से होनी है इसके साथ ही वे केसीआर से भी मिलेंगे और कई अन्य नेताओं से भी वे मिलेंगे। कहा जा रहा है कि वे आंध्र भी जायेंगे जहाँ उनकी मुलाकात चंद्रबाबू नायडू और जगन रेड्डी से भी हो सकती है। पटना में 12 जून को विपक्षी एकता की बैठक हो रही है।          
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक करियर में यह पहला मौका है, जब उन्होंने प्रदेश से बाहर की राजनीति की है और देश भर की विपक्षी पार्टियों को एक करने का प्रयास किया है। उनके बुलावे पर देश भर की पार्टियों के नेता पटना पहुंचने वाले हैं। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक हुआ तो 12 जून को पटना में विपक्ष की बड़ी बैठक होगी। इसमें 18 पार्टियों के नेता हिस्सा ले सकते हैं। नीतीश कुमार ने पूरे देश की यात्रा करके नेताओं को निजी तौर पर आमंत्रित किया है। नीतीश कुछ नेताओं से नहीं मिल पाए हैं, उनसे भी वे 12 जून के पहले मिलने जा सकते हैं। तभी कहा जा रहा है कि उन्होंने जितने नेताओं को बुलाया है, सब पटना पहुंचेंगे। कहा जा रहा है कि इसमें विपक्षी गठबंधन की एक रूपरेखा बन सकती है। सीटों पर बात नहीं होगी क्योंकि वह अंदरखाने तय हो रहा है कि किसको कहां आमने सामने लड़ना है और कहां सीटों का राजनीतिक तालमेल किया जाना है।
        बहरहाल, नीतीश की बुलाई बैठक में राहुल गांधी नहीं जाएंगे। कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हिस्सा लेंगे। तृणमूल नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बैठक में शामिल होंगी। नीतीश ने निजी तौर पर उनसे मिल कर न्योता दिया है। इसी तरह नीतीश ने अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, हेमंत सोरेन, उद्धव ठाकरे और शरद पवार को मिल कर न्योता दिया है। अगर उद्धव और पवार नहीं आते हैं तो उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बैठक में हिस्सा लेंगे। नीतीश ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से भी मुलाकात की थी लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं होंगे। वे एचडी कुमारस्वामी से मिल चुके हैं लेकिन हो सकता है कि एचडी देवगौड़ा से भी मिलें। उनकी कोशिश इसे एक बड़ा इवेंट बनाने की है। अगर वे सफल होते हैं तो इस गठबंधन का कोऑर्डिनेटर बन सकते हैं।   
   कहा जा रहा है कि इस बार कुमार कोई चूक नहीं करना चाहते। वे पूरी ताकत से बीजेपी से लड़ने को तैयार है। कांग्रेस इस अभियान में उनके साथ है इसके साथ ही पवार और उद्धव भी इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। अगर यह बैठक सफल रही तो बीजेपी की परेशानी बढ़ सकती है। बीजेपी इस माहौल को भांपकर आज से संपर्क अभियान चल रही है। 

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