पांच राज्यों में बीजेपी की चुनौती ,198 सीटों पर क्षेत्रीय दल और बीजेपी का सीधा मुकाबला 

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अखिलेश अखिल 

बीजेपी मौजूदा समय को अमृतकाल बताती है लेकिन विपक्ष इसे परिवर्तन काल कह रहा है। लड़ाई अमृतकाल और परिवर्तन काल के बीच ही है। ऊपर से भले ही बीजेपी सामान्य दिखने की चेस्टा कर रही है लेकिन भीतर से वह परेशान है। परेशानी जे पी नड्डा की भी बढ़ी हुई है और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की भी। अब तक बीजेपी के फेवर में जो समय चल रहा था अब वैसा नहीं है। समय बदला तो जो पार्टी कांग्रेस के खिलाफ राज्यों में राजनीति  कर रही थी ,आज कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने को तैयार है। जिस बीजेपी के साथ कभी सभी पार्टियां गलबहियां करने को तैयार थी ,आज उसके पास कोई नहीं। यह सब समय का ही तो कमाल है।           
बीजेपी को भी लग रहा है कि अब बदलाव के समय आ गए हैं। इस बदलते बदलते समय में जो हाथ लगता उसे ही प्रसाद समझ कर लेने में भलाई है। बीजेपी की पूरी ताकत इस बात पर लगी है कि चाहे जैसे भी उसकी सत्ता सरकार इस बार भी वापस आ जाये लेकिन ऐसा संभव कहाँ ! बीजेपी को यह भी भय है कि  उसकी सत्ता वापस नहीं आई तो उसकी दुर्गति निश्चित है। बीजेपी के साथ आगे सत्ताधार पार्टियां क्या कुछ कर सकती है इसका भी भान उसे है।          
 जिन सरकारी एजेंसियों का भय दिखाकर बीजेपी आज तक जो कुछ भी करती रही है ,उसका ज्ञान भी उसे है। उसे यह भी पता है कि सत्ता बदलते ही वे लोग भी उनसे अलग हो जायेंगे जो आज उनके साथ खड़े दिख रहे हैं। राजनीति की माया को बीजेपी से ज्यादा और कौन जान सकता है ? लेकिन बीजेपी सत्ता में लौटेगी कैसे ? कोई रास्ता बचा है क्या ? बीजेपी के पास अब एक ही मंत्र है।  अगर उसने वाकई इस देश के लिए कुछ किया है ,हिंदुत्व को मजबूत  किया है और जनता की उम्मीदों पर खड़ी रही है तो जनता ही उसे वापस लाएगी। दूसरा कोई भी खेल इस बार बीजेपी नहीं खेल पाने की स्थित  में है ।    विपक्षी एकता की कहानी कितनी आगे बढ़ती है इसे देखना अभी बाकी है। सीट शेयरिंग का ऐसा खेल है जहां विपक्षी एकता की बात फंसती नजर आती है। लेकिन कांग्रेस ने बहुत उच्च बर्दास्त कर लिया तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ जाएगी। यह तय है। बीजेपी यही चाहती है कि किसी भी सूरत में विपक्ष एक नहीं हो। लेकिन जब ऐसा होगा तो वह कर भी क्या सकती है। अगर बीजेपी का वसाअण इसी रास्ते से होना है तो फिर कोई क्या करे ! चलिए कुछ राज्यों के खेल पर नजर डालते हैं। 
             पिछले लोकसभा चुनाव में 5 राज्य ऐसे थे जहां बीजेपी और क्षेत्रीय दलों के बीच ही मुकाबला देखने को मिला। लोकसभा के लिहाज से देखा जाए तो इन पांच राज्यों में अच्छी खासी सीटें हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में 198 लोकसभा सीटों पर बीजेपी  और क्षेत्रीय दलों के बीच मुकाबला देखने को मिला था। इनमें 154 सीटें ऐसी थीं जहां सीधा मुकाबला था। इस चुनाव में बीजेपी क्षेत्रीय दलों पर भारी पड़ी थी। सबसे बड़े सियासी राज्य यूपी, बिहार, बंगाल इसमें शामिल है। इस मुकाबले में कांग्रेस काफी पीछे रही। कुछ सीटें ही ऐसी थीं जहां कांग्रेस के साथ मुकाबला था। कांग्रेस करीब इन 200 सीटों पर दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सकी। कांग्रेस की नजर इस बार इन राज्यों पर है। हालांकि इस बार समीकरण कुछ बदले हैं और 2019 वाला गठबंधन भी नहीं।
               5 राज्यों की 198 सीटों पर अधिकांश में बीजेपी  और रीजनल पार्टी के बीच ही मुकाबला रहा। इसमें यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, और ओडिशा शामिल है। इनमें 154 सीटों पर बीजेपी और क्षेत्रीय दलों के बीच मुकाबला था वहीं कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच 25 सीटों पर मुकाबला था। लोकसभा की 19 ऐसी सीटें थीं जिन पर न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस मुकाबले में थी। मुकाबला सिर्फ क्षेत्रीय दलों के बीच था। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 39 पर बीजेपी पहले या दूसरे नंबर पर थी। पिछले चुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत हासिल करते हुए 116 सीटों पर कब्जा जमाया। इसमें यूपी और बिहार का काफी योगदान था। वहीं कांग्रेस 6 और अन्य को 76 सीटों पर जीत मिली।
              2019 के मुकाबले 2024 के चुनाव में परिस्थितियां थोड़ी अलग रहेंगी। पिछले चुनाव में यूपी जहां लोकसभा की सबसे अधिक 80 सीटें हैं उसमें बीजेपी को 64 सीटों पर कामयाबी हासिल हुई। इस चुनाव में एक ऐसा गठबंधन हुआ था जिसके बाद यह कहा जा रहा था कि बीजेपी को यहां काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। दो विरोधी दल समाजवादी पार्टी और मायावती की बीएसपी एक साथ मिलकर यूपी लोकसभा का चुनाव लड़े। हालांकि जब नतीजे आए तो बीजेपी को यह गठबंधन कुछ खास नुकसान नहीं पहुंचा पाया। इस बार चुनाव बीजेपी के खिलाफ कैसे गठबंधन होगा यह तय नहीं। बीएसपी इस चुनाव में अकेले जा सकती है। वहीं कांग्रेस और सपा क्या साथ आएंगे इसको लेकर सवाल है। वहीं बिहार में पिछली बार के चुनाव में बीजेपी और नीतीश की पार्टी जेडीयू मिलकर लड़े लेकिन वह इस बार अलग हैं। ऐसे में यह तय है कि इन राज्यों में 2019 वाली बात नहीं रहेगी।
                2024 लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों की तैयारी शुरू है। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों की कोशिश है कि इस बार चुनाव मिलकर लड़ा जाए। इसकी कोशिश जारी है लेकिन ऐसा होगा यह तय नहीं है। पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष का कौन उम्मीदवार क्या सीटों पर गठबंधन होगा कुछ भी तय नहीं है। यदि विपक्षी दल साथ आते हैं तो इन राज्यों में कांग्रेस के सामने एक अलग चुनौती रहेगी। सीट शेयरिंग की चुनौती।बीजेपी के लिए इस बार इन राज्यों में अलग चुनौती है खासकर बिहार में। यहां तेजस्वी-नीतीश के साथ आने के बाद बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ी है। 

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