बागेश्वर धाम वाले बाबा के जरिये बिहार की राजनीति को साधने में जुटी बीजेपी 

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न्यूज़ डेस्क 

बिहार में धर्म की राजनीति कुलांचे मारेगी इसकी कल्पना कभी नहीं की गई। जातियों की राजनीति के लिए बदनाम रहा बिहार अचानक धर्म के आसरे राजनीति को आगे बढ़ाने लगेगा ,इस तरह की सोंच पहले नहीं थी। बिहार का मिजाज सामाजिक पृष्ठभूमि का रहा है। लोग आपस में लड़ते झगड़ते तो रहे हैं लेकिन धार्मिक उन्माद से अक्सर बचते ही रहे हैं। बिहार में मुसलमानो की ठीक आबादी है लेकिन दो चार मामले को छोड़ दीजिये तो कभी धर्म के नाम पर उन्माद देखने को नहीं मिलते। इसकी वजह भी है। बिहार का मिजाज अभी तक  धार्मिक उन्माद से बचता ही रहा है। लेकिन अब शायद ऐसा नहीं हो। जिस तरह से बाबा धीरेन्द्र शास्त्री के कथा प्रवचन में लोगों की भीड़ जुट रही है उसे देखकर खा जा रहा है कि बिहार का मिजाज बदल गया है।    
इस बदलाव के राजनीतिक क्या परिणाम होंगे यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा लेकिन इतना तो साफ है कि अगर बिहार में धर्मिक राजनीति को बल मिला तो इसके दूरगामी असर पड़ेंगे। बिहार के विकास पर भी प्रभाव पड़ेंगे। बीजेपी को लग रहा है कि जिस तरह से जातियों की लमबन्दी के जरिये बीजेपी को ख़त्म करने की कोशिश विपक्ष क्र रहा है ,अब धार्मिक राजनीति के जरिये ही बचा जा सख्त है। कह सकते है कि बिहार में कथा कर रहे बाबा शास्त्री अभी बीजेपी के लिए संजीवनी के सामान हो गए हैं।      बाबा की सेवा में पहुंचे बीजेपी नेताओं की हरकत को देखकर ऐसा लगा मानो पूरा बिहार बीजेपी ही बाबा के कदमो में गिरा हुआ है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ड्राइवर के रूप में नजर आए। मनोज तिवारी के अलावा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे के साथ बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी, सहित कई नेता बाबा के कार्यक्रम में शरीक होते नजर आएं।
               जानकारों की माने तो धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम के जरिए बिहार में राजनीति की नई लकीर खींची जा रही है। एक नया वोट बैंक तैयार किया जा रहा है। प्रवचन में जुट रही भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से टीवी पर प्रवचन देखने की अपील की है। लेकिन बाबा की यह अपील फेल हो चुकी है। अब भी उनके प्रोग्राम में बड़ी भीड़ जुट रही है। इस बीच भाजपा के नेताओं ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि वह हनुमान कथा को फेल करना चाहती है।
              पटना में हो रहे इस प्रवचन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की ज्वाला बिहार से जलेगी। आज विदेश के लोग भी सीता-राम कहते हैं। एक दिन ऐसा आएगा भारत में रहना होगा तो सीता-राम कहना ही होगा। उन्होंने मंच से सितंबर में फिर बिहार आने की घोषणा की। बताया कि गया में 29 सितंबर को दरबार लगेगा।
            हिंदू राष्ट्र, सनातन सर्वश्रेष्ठ जैसी बातें करने वाले धीरेंद्र शास्त्री के बिहार में हो रहे प्रवचन के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसके जरिए हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा के कई नेता बाबा की सेवा में पूरे जोर-शोर से जुटे हैं। बिहार की राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा बागेश्वर बाबा के जरिए बिहार में कमल खिलाने की कोशिश में जुटी है।
          बागेश्वर बाबा हिंदू राष्ट्र के समर्थन में खूब बातें बरते हैं। जो उन्हें भाजपा के करीब लाती है। हालांकि उन्होंने खुले मंच से कभी भी किसी राजनीतिक पार्टी का साथ देने की बात नहीं की है। भाजपा के अलावा कांग्रेस के नेता भी बाबा से मिलने पहुंचते हैं। लेकिन बाबा के बिहार कार्यक्रम को लेकर कहा जा रहा है कि भाजपा इसके जरिए बड़ा गेम प्लान कर रही हैं।
        बिहार-यूपी जैसे राज्यों की सियासत में जाति काफी हावी रहती है। यहां अलग-अलग जाति और उसके अलग-अलग दल व नेता है। बागेश्वर बाबा के प्रवचन के जरिए भाजपा इस जातीय राजनीति को हिंदूवादी राजनीति में बदलने की कोशिश कर रही है।
बता दें  कि धीरेंद्र शास्त्री की कथाओं में बड़ी संख्या में दलित और पिछड़े वर्ग के लोग भी आते हैं। ये लोग राजद-जदयू के वोट बैंक माने जाते हैं। अगर यह वोटर हिंदुत्व के नाम पर एकजुट होता है तो इसका फायदा भाजपा को हो सकता है।      नीतीश कुमार की चिंता बढ़ रही है। जिस जातीय समीकरण को साधकर वे बीजेपी को मत देने क गुना भाग बैठा रहे हैं अगर बीजेपी ने बाबा के जरिये बिहार की जनता को साध लिया तो खेल पलट भी सकता है। बिहार का यह मिजाज बहुत कुछ कह रहा है। 

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