बंगाल विभाजन के खिलाफ विधानसभा से प्रस्ताव पारित

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  • बीरेंद्र कुमार झा

पश्चिम बंगाल विधानसभा ने राज्य को बांटने के प्रयासों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। तृणमूल कांग्रेस की विधायक सत्यजीत बर्मन ने विधान सभा में यह प्रस्ताव पेश किया ,जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बीजेपी ने राज्य सरकार के इस कदम को एक राजनीतिक हथकंडा करार दिया है। विधानसभा में पारित इस प्रस्ताव को अब राज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

क्या कहा गया है इस प्रस्ताव में?

पश्चिम बंगाल विधानसभा में बंगाल के विभाजन के खिलाफ पारित इस प्रस्ताव को तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्यजीत बर्मन ने पेश किया था। इस प्रस्ताव में यह कहा गया है की कुछ सकते हैं राज्य को विभाजित करने और पश्चिम बंगाल की संस्कृति एवं विरासत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस विधेयक पर सदन में हुई चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने का भरपूर प्रयास किया और एक सुर में बंगाल विभाजन के प्रयासों का विरोध किया।

बीजेपी का पक्ष

पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किए गए बंगाल विभाजन के खिलाफ वाले इस प्रस्ताव पर बीजेपी ने न तो इसका समर्थन किया और ना ही इसका विरोध किया!बीजेपी ने इसे तृणमूल कांग्रेस का एक राजनीतिक हथकंडा करार देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव की सामग्री स्पष्ट नहीं है। कार्सियांग से बीजेपी विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा ने मांग की कि उत्तर बंगाल में अलग राज्य के मुद्दे पर एक जनमत संग्रह कराया जाए, जिसमें लोग अपनी राय बताएं कि क्या वे राज्य का हिस्सा बने रहना चाहेंगे या नहीं? बंग बंग विरोधी प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्होंने आगे कहां कि पहाड़ी लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग की निगरानी में गोरखालैंड पर जनमत संग्रह कराया जाए। गोरखालैंड मुद्दे पर लोगों ने मेरा समर्थन किया है। पहाड़ के लोग क्या चाहते हैं, यह जानने के लिए जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए।केंद्र और केंद्रीय चुनाव आयोग की मदद से राज्य सरकार को लोगों की राय जानने का प्रयास किया जाना चाहिए।

सुभेंदू अधिकारी ने रखा बीजेपी का पक्ष

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुभेंदु अधिकारी ने बंगाल विभाजन के खिलाफ सदन में लाए प्रस्ताव पर बीजेपी का पक्ष रखते हुए कहा ‘ वन वेस्ट बंगाल, बेस्ट वेस्ट बंगाल’ उन्होंने कहा हम एक भारत श्रेष्ठ भारत देखना चाहते हैं ।तृणमूल कांग्रेस राजनीतिक उद्देश्यों के लिए राज्य के बंटवारे के प्रयासों के खिलाफ वाला प्रस्ताव लाकर उसे चुनावी एजेंडे के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा यह चुनावी एजेंडा है,क्योंकि कुछ महीने में पंचायत चुनाव होना है और अगले साल लोकसभा का चुनाव भी हैं। इस वजह से बंगाल विभाजन का मुद्दा उठाया गया है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बीजेपी पर लगने वाले बंगाल के विभाजन के आरोप दुर्भावना से प्रेरित है और इसका उद्देश्य चुनाव से पहले हवा को गर्म करना है। गौरतलब है कि बीजेपी के कई सांसदों और विधायकों ने इससे पहले उत्तर बंगाल के विभाजन की मांग की है।

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