Bihar News: बिहार में अब खराब गुणवत्ता वाली सड़कों और पुलों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। ग्रामीण कार्य विभाग ने साफ कर दिया है कि निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए विभाग ने जीरो टॉलरेंस नीति लागू करते हुए निगरानी व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है।
हर महीने 20 योजनाओं की जांच होगी अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत अब गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों को हर महीने कम से कम 20 निर्माणाधीन सड़कों या पुलों की जांच करनी होगी। यह फैसला विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया, जिससे हर प्रोजेक्ट पर लगातार नजर रखी जा सके।
जियो-टैग फोटो और ऑनलाइन रिपोर्टिंग से पारदर्शिता
अब हर निरीक्षण को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारियों को जियो-टैग तस्वीरें और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट के साथ अपनी रिपोर्ट एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इससे हर काम की डिजिटल ट्रैकिंग संभव हो सकेगी और गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी।
शिकायतों पर 15 दिन में रिपोर्ट देना जरूरी
जन शिकायतों को भी अब गंभीरता से लिया जाएगा। विभाग ने निर्देश दिया है कि किसी भी शिकायत की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर मुख्यालय को सौंपना अनिवार्य होगा। वहीं नियमित निरीक्षण की रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर अपलोड करनी होगी।
निर्माण के दौरान ही होगा कंक्रीट टेस्ट
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब निर्माण के दौरान ही कंक्रीट की मजबूती की जांच की जाएगी। इसके लिए ढलाई के समय ही सैंपल लिया जाएगा, जिससे बाद में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
टिकाऊ सड़क और पुल निर्माण पर जोर
सरकार का यह कदम राज्य में मजबूत, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों और पुलों के निर्माण को सुनिश्चित करेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।

