बीरेंद्र कुमार झा
स्वतंत्रता दिवस के 1 दिन बाद 16 अगस्त 2018 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।राजनीति से तो उन्होंने काफी पहले ही सन्यास ले लिया था। अटल बिहारी बाजपेई की वाकपटुता, फैसला लेने की क्षमता और राजनीतिक सुचिता की तारीफ करने से अपने तो क्या, विरोधी भी नहीं चूकते। बाजपेई थे ही ऐसे शख्सियत! भला ऐसा कौन व्यक्ति होगा कि जिस सीट से चुनाव लड़ रहा हो,वहां अपना नहीं बल्कि विरोधी का प्रचार करने पहुंच जाएं। अटल बिहारी वाजपेई ने 1957 में कुछ ऐसा ही किया था।
चुनाव में अपने विपक्षी उम्मीदवार का किया था प्रचार
देश के दूसरे लोकसभा चुनाव यानि 1957 में अटल बिहारी वाजपेई मथुरा की सीट से चुनाव लड़ रहे थे। यहां उनकी करारी हार हुई थी और हार की वजह भी वह खुद थे। अटल बिहारी बाजपेई के अलावा मथुरा से उस वर्ष चुनाव लड़ने वालों में से एक थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह जो एक क्रांतिकारी थे और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान काफी सक्रिय थे। चुनाव में अटल बिहारी बाजपेई ने इस सीट पर अपने विरोधी उम्मीदवार राजा महेंद्र प्रताप सिंह के लिए वोट मांगे थे। अटल बिहारी बाजपेई इस चुनाव में बड़े अंतर से हार गए थे, हालांकि वह एक साथ लखनऊ, बलरामपुर और मथुरा इन 3 सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे ,इसलिए बलरामपुर चुनाव क्षेत्र से चुनाव जीतकर वे संसद पहुंच गए। मथुरा के अलावे लखनऊ सीट पर भी हुए हार गए थे।
चुनाव में जमानत हो गई थी जब्त
अटल बिहारी वाजपेई ने तब चुनावी सभा में कहा था कि मथुरा के लोगों आप मुझे बहुत सम्मान दे रहे हैं, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप राजा महेंद्र प्रताप को विजयी बनावें।गौरतलब है कि राजा महेंद्र प्रताप के खिलाफ 4 लोग चुनावी मैदान में थे ।चुनाव परिणाम आने पर राजा महेंद्र प्रताप ने ही जीत हासिल की,उनके पिता दूसरे स्थान पर रहे थे और अटल बिहारी वाजपेई चौथे स्थान रहे। इस चुनाव मेंइनकी जमानत जप्त हो गई थी।
