अरविंद केजरीवाल को 6 महीने बाद जमानत! न ऑफिस जा पाएंगे, न फाइलों पर कर सकेंगे साइन

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति केस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर आज फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने उनकी जमानत याचिका पर फैसला सुनाया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 26 जून को सीबीआई ने अरेस्ट किया था।इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए जमानत याचिका दायर की थी। 5 सितंबर को पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख ली थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि चार्जशीट दायर हो गई है और ट्रायल निकट भविष्य में पूरा नहीं होने वाला है, इसलिए उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने का औचित्य नहीं है।अरविंद केजरीवाल को 10 लाख का बेल बॉन्ड भरना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि दलीलों के आधार पर हमने 3 सवाल तैयार किए हैं।क्या गिरफ्तारी में अवैधता थी, क्या अपीलकर्ता को नियमित जमानत दी जानी चाहिए, क्या आरोप पत्र दाखिल करना परिस्थितियों में इतना बदलाव है कि उसे टीसी में भेजा जा सके।पहले से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को गिरफ्तार करने में कोई बाधा नहीं है।हमने पाया है कि सीबी आई टीक्याने अपने आवेदन में कारण दर्ज किए हैं कि उन्हें क्यों ऐसा करना जरूरी लगा।धारा 41ए(iii) का कोई उल्लंघन नहीं है। सीबीआई की गिरफ्तारी से जुड़ी याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘अपीलकर्ता की गिरफ़्तारी अवैध नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल इस मामले के गुण-दोष पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे।ईडी मामले में लगाई गई शर्तें इस मामले में भी लागू होंगी ,उसे टीसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा।

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