अखिलेश अखिल
राजनीति में जातीय खेल कौन नहीं करता ? जाति के बिना राजनीति कैसी ?जिधर देखो उधर की जातीय खेल। सभी पार्टियां जातिगत राजनीति को बेकार मानती है लेकिन जातीय खेल करने से बाज भी नहीं आती। सच तो यही है कि जाति है तो राजनीति है। जिसके पास जितनी जातीय जमात उसके पास उतनी ही ताकत।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी जातीय खेल को आगे बढ़ाते हैं। कोई उन्हें टोक भी तो नहीं सकता। पहले पीडीए की बात की। उसक लाभ भी लिया। पीडीए मतलब पिछड़ा ,दलित और अल्पसंख्यक। इस जमात को एक साथ लेकर सपा ने हालिया लोकसभा चुनाव में बीजेपी को ध्वस्त कर दिया। बड़ी जीत सपा को मिली। बहुत से लोग इस बात की चर्चा करते रहे कि सपा की राजनीति में ब्राह्मणो की कोई जगह नहीं है। सपा ब्राह्मण के खिलाफ है। अखिलेश यादव काफी समय से यह सब सुन रहे थे। अब अब अचानक एक ऐसा खेल किया जिससे यूपी के ब्राह्मण चकित हो गए।
अखिलेश यादव ने विधान सभा में एक ब्राह्मण नेता को सदन में विपक्ष का नेता बना दिया। इन नेता का नाम है माता प्रसाद पांडेय। पहले ऐसा मन जा रहा था कि अखिलेश अपने चाचा शिवपाल यादव को यह जिम्मेदारी देंगे। लेकिन खेल पलट गया। खबर मिल रही है कि अखिलेश यादव के इस निर्णय में शिवपाल यादव की भी सहमति है।
सपा ने लेटर जरी करते हुए इसका ऐलान किया है। माता प्रसाद पांडेय अखिलेश सरकार में विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही महबूब अली को सपा ने विधानसभा में अधिष्ठाता मंडल, कमाल अख्तर को मुख्य सचेतक और राकेश कुमार उर्फ आर के वर्मा को उपसचेतक की जिम्मेदारी दी है।
सिद्धार्थनगर की इटवा सीट से विधायक माता प्रसाद पांडेय कल से यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे। यूपी की राजनीति में अखिलेश यादव ने पीडीए के बाद यह चौंकाने वाला ब्राह्मण कार्ड चला है। माता प्रसाद पांडेय को सपा मुखिया अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। चर्चा थी कि सपा अध्यक्ष अपने पीडीए के तहत किसी पिछड़े समुदाय से आने वाला नेता को यह जिम्मेदारी देंगे। हालांकि अखिलेश ने माता प्रसाद पांडेय के नाम पर मुहर लगाकर सभी को चौंका दिया है।
सपा के इस खेल का लाभ सपा को अगले चुनाव में मिल सकता है। जानकार तो यह भी कह रहे हैं कि अगर दो से चार फीसदी ब्रह्मण भी सपा के साथ जुड़ गए तो अखिलेश यादव की टकट और भी बढ़ सकती है। अखिलेश यादव के इस ब्राह्मण कार्ड से बीजेपी विचलित है। उसे अब लग रहा है कि उसके दरकते वोट बैंक में सपा के इस निर्णय का बड़ा असर हो सकता है। जहां एक तरफ बीजेपी सूबे में आपसी कलह से जूझ रही है वही सपा का ब्राह्मण कार्ड बीजेपी को और भी घायल कर दिया है।

