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बीएसपी को लेकर बयान पर मायावती ने अखिलेश को अपने गिरेबान में झांकने की दी सलाह

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बीरेंद्र कुमार झा

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव हमेशा से इंडिया गठबंधन में बीएसपी के शामिल होने का विरोध करते रहे हैं। यहां तक की जब कांग्रेस द्वारा बीएसपी को इंडिया गठबंधन में शामिल करने की चर्चा ही उठी थी तभी उन्होंने कांग्रेस को यहां तक चेतावनी दे डाली थी कि बीएसपी के इंडियागठबंध में शामिल होने की स्थिति में समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन की सहयोगी नहीं रहेगी। इसके बाद बीएसपी के इंडिया गठबंधन में शामिल होने की बात लगभग समाप्त ही हो गई।अब एक बार फिर से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बीएसपी की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए तो मायावती ने भी उनको टका सा जवाब दे दिया है।अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने उन्हें किसी पर कुछ भी आरोप लगाने से पहले खुद की गिरेबान में झांकने की नसीहत दी। बीएसपी सुप्रीमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डाले एक पोस्ट में लिखा कि अखिलेश अपनी सरकार की खासकर दलित विरोधी रही आदतों, नीतियों एवं कार्यशैली आदि से मजबूर है।मायावती ने तंज कसा कि एसपी प्रमुख द्वारा बीएसपी पर अनर्गल प्रलाप करने से पहले उन्हें अपने गिरेबान में भी झांक कर जरूर देख लेना चाहिए।

बीजेपी से मेलजोल बढ़ाने को लेकर दागदार रहा है एसपी

मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी का दामन बीजेपी को बढ़ाने और उससे मेल-जोल बढ़ाने के मामले में दागदार रहा है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डाले अपने पोस्ट में लिखा कि तत्कालीन एसपी प्रमुख मुलायम यादव द्वारा बीजेपी को संसदीय चुनाव जीतने से पहले व उपरांत आशीर्वाद दिए जाने को कौन भूल सकता है, और फिर बीजेपी सरकार बनने पर उनके नेतृत्व से एसपी नेतृत्व का मिलना जुलना,जनता कैसे भूल सकती है? ऐसे में एसपी सांप्रदायिकता से लड़े तो यह उचित होगा। मायावती का इशारा दिवंगत मुलायम सिंह यादव द्वारा संसद में पीएम मोदी को दूसरे कार्यकाल के लिए आशीर्वाद देने की ओर था।

अखिलेश यादव ने मायावती को लेकर क्या कहा था

अखिलेश यादव के बलिया दौरे पर पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि इंडिया ब्लॉक में मायावती और बीएसपी को शामिल करने के बारे में उनका क्या विचार है? तो उन्होंने तंज भरे लहजे में पूछा कि लोकसभा चुनाव 2024 के बाद उनका भरोसा क्या आप दिलाओगे ?बात भरोसे का है ,अगर वह आती है तो आप में से कौन उनका भरोसा दिलाएगा ? वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में इंडिया ब्लॉक की बैठक में अखिलेश यादव ने बीएसपी को शामिल करने को लेकर असहमति जताई थी।

कहां था अखिलेश यादव का निशाना

गौरतलब है की अखिलेश यादव द्वारा मायावती के विश्वास को लेकर की गई टिप्पणी का संबंध 2919 ईस्वी के चुनाव से संबंधित था, जब बीएसपी,एसपी और आरएलडी ने यूपी का लोकसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था। चुनाव में बीएसपी ने 10 सीटें जीती थी,समाजवादी पार्टी को 5 सीटों पर जीत मिली थी जबकि आरएलडी अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी।इस चुनाव के तुरंत बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने न इस गठबंधन को तोड़ने का ऐलान कर दिया था बल्कि इसके बाद आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव में एसपी के उम्मीदवार के विरुद्ध अपने उम्मीदवार भी खड़े कर दिया था। इसका परिणाम यह हुआ कि आजमगढ़ से एसपी के धर्मेंद्र यादव को बीजेपी के दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के हाथों पराजय झेलना पड़ा ,वहीं रामपुर में भी बीजेपी के घनश्याम लोधी ने ही चुनाव में जीत हाशिल की ।

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