Homeदेशअसम को लेकर भारत को विखंडित करने का कुटिल प्रयास

असम को लेकर भारत को विखंडित करने का कुटिल प्रयास

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असम में वर्ष 2026 में विधानसभा का चुनाव प्रस्तावित है। चुनाव आयोग ने असम में चुनाव से संबंधित सारी तैयारियां पूरी कर ली है और अब वह किसी भी समय असम में चुनाव की घोषणा कर सकती है। चुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों ने असम में चुनाव जीतने के लिए अभी से ही जोर शोर लगाना प्रारंभ कर दिया है। खासकर भारतीय जनता पार्टी के असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शरमा ने इस चुनाव प्रचार के दौरान कई ऐसे तथ्यों का उजागर किया है और उसे लेकर एसआईटी के गठन कर पर्याप्त जानकारी जुटाने इसे भारतीय गृह मंत्रालय को सतर्क करने के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है जो असम में अंतरराष्ट्रीय साजिश कर भारत को अस्थिर करने वाला है।

हिमानता बिसवा शर्मा के द्वारा कही गई यह बातें भले ही उनके द्वारा अपनी पार्टी के पक्ष में लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से कहीं जा रही है लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा के मत देने जाएं इसकी महत्ता कम नहीं होती है।

असम का एक लंबा गौरवमयी इतिहास रहा है।
महाभारत काल में असम को प्राग्ज्योतिष और बाद में कामरूप कहा जाता था। इसका उल्लेख समुद्रगुप्त के इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख में भी मिलता है।

13वीं शताब्दी में सुकाफा के नेतृत्व में अहोम लोगों ने असम में प्रवेश किया। 1228 से लेकर 1826 ईस्वी तक असम में अहोम वंश का शासन रहा।
लाचित बोरफुकन ने सरायघाट की लड़ाई में मुगलों को हराकर असम की स्वतंत्रता की रक्षा की, जो इनके वीरतापूर्ण इतिहास का एक अहम हिस्सा है।

1826 में यांडाबू की संधि के बाद यह ब्रिटिश शासन के अधीन आया, लेकिन यहाँ की विशिष्ट पहचान बनी रही।
असमिया संस्कृति, साहित्य और पारंपरिक कलाओं के साथ-साथ यहाँ का आध्यात्मिक महत्व भी बहुत पुराना है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शरमा ने दावा किया है कि एक एसआईटी जांच से पता चला है भारत और असम की आंतरिक नीतियों को प्रभावित करने के लिए कुछ विदेशी ताकतें काम कर रही है।हिमंत विश्व शरमा ने दावा किया कि पाकिस्तानी नागरिक और एक ब्रिटिश नागरिक के मिली भगत से यहां भारत विरोधी साजिश रची जा रही है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शरमा ने इस मामले में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ गोगोई का नाम लेते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला देकर इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपने की बात कही है ।असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उसकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई पर पाकिस्तान से कथित संबंधों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं ,जिसे उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया है। हिमंत विश्व शरमा के अनुसार यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है और इसकी जांच के लिए असम सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। हिमंत विश्व शरमा ने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई की ब्रिटिश पत्नी जो पाकिस्तान स्थित एक फर्म के लिए काम करती थी, ने अली तौकीर शेख नाम के पाकिस्तानी नागरिक के साथ मिलकर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और गोपनीय जानकारी साझा करने में भूमिका निभाई है। हालांकि गौरव ने इसे निराधार बताया है।

इसके अलावा असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शरमा से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम बीजेपी के बड़े नेता असम में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की बात करते हैं। इस क्षेत्र में जनसांख्यिकीय परिवर्तन खासकर मुसलमान की आबादी का वहां बढ़ाना जिसे असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शरमा मियां मुसलमान कहते हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। बीजेपी के द्वारा ऐसे सिर्फ एक चुनावी मुद्दा बनाना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि अगर वास्तव में ऐसी स्थिति है और बीजेपी इसे रोकने में असफल रही है तो यह भी एक राष्ट्रीय शर्म की बात है और इसके लिए जिम्मेवार भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और राज्य की सरकारों के साथ-साथ संबंधित नौकरशाहों पर बड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

असम में जनसांख्यिकीय परिवर्तन किस रूप में देश की सुरक्षा पर बड़ा खतरा हो सकता है, यह असम की भौगोलिक स्थिति से पूरी तरह से परिलक्षित होता है। सिलीगुड़ी के पास के चिकन नेक वाले संकरे क्षेत्र के बाद पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ने के लिए पहले विस्तृत भूभाग जो आता है वह असम का ही इलाका होता है। इस चिकन नेक की एक तरफ बांग्लादेश आता है जो मुस्लिम बहुत क्षेत्र है। अगर यहां विदेशी मुसलमान आकर बस जाते हैं तो फिर वह चिकन नेक वाले क्षेत्र को प्रभावित कर भारत को विखंडित करने वाले शक्तियों जो यहां अक्सर षड्यंत्र करने में लगी रहती हैं और जिसमें से कुछ का उल्लेख मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शरमा ने चुनाव प्रचार के दौरान किया है वह यहां एक बड़ा गड़बड़ झाला कर सकते हैं।

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