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कांग्रेस का वॉकआउट, SIR पर अमित शाह का जवाब, लोकसभा कल सुबह तक स्थगित

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लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष लगातार सरकार को SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर घेर रहा है। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, कि RSS सभी संस्थाओं पर कब्जा करना चाहती है। बीजेपी चुनाव के दौरान इनका इस्तेमाल करती है। राहुल ने आरोप लगाया कि हरियाणा में वोट चोरी से बीजेपी की सरकार बनी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही संघ की विचारधारा वाले हैं और यह जनता के जनादेश से हुआ है, किसी की कृपा से नहीं। अमित शाह ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसा कोई कानून है जो संघ की विचारधारा वाले व्यक्ति को किसी पद पर बैठने से रोके। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि 1969 में इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथियों से समझौता कर महत्वपूर्ण पदों पर उन्हें बिठाया था। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि देश के लिए मरना ही आरएसएस की विचारधारा है और वे डरते नहीं हैं। अमित शाह ने कहा कि उनकी पार्टी वोट चोरी से नहीं, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर निर्माण जैसे मुद्दों पर जनता के समर्थन से जीती है।

अमित शाह ने कहा कि कल जब भाषण तैयार कर रहा था, तब सोच रहा था कि ये मुद्दा क्यों उठा है, मूल मुद्दा है घुसपैठियों को संरक्षण, इस पर विपक्ष ने हंगामा कर दिया। कांग्रेस के सदस्यों ने शाह के जवाब के दौरान सदन से वॉकआउट कर दिया, इस पर किरेन रिजिजू ने कहा कि जवाब सुनने की हिम्मत नहीं है और सदन में गतिरोध कर रहे थे, अमित शाह ने कहा कि घुसपैठिए के मुद्दे पर ये भाग गए। 200 बार भी भागेंगे, हम किसी घुसपैठिए को नहीं छोड़ेंगे। लोकसभा में अमित शाह ने फिर से अपने भाषण के शेष भाग को पढ़ना शुरू कर दिया है।

विपक्ष ने सीसीटीवी फुटेज 45 दिन में नष्ट करने पर भी सवाल उठाया। अमित शाह ने इस सवाल पर कहा- जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 85 में एक प्रावधान है, चुनाव में भी 45 दिन के भीतर ही चुनौती दे सकते है। उसके बाद नहीं दे सकते है। यह कानून 1951 से है, तब सीसीटीवी फुटेज नहीं था, तब पर्ची थी, यह कानून पर्ची के लिए थी, अब सीसीटीवी फुटेज है, उसके लिए भी नियम है।

ईवीएम राजीव गांधी लेकर आए। इसका पहला प्रयोग 2004 में हुआ और तब ये जीत गए। 2009 में भी ये जीत गए, मशीन आप लेकर आए, उसी से 10 साल राज किया। अब हार रहे तो उसका भी विरोध, चुनाव आयोग ने निर्णय किया कि पांच प्रतिशत ईवीएम और वीवीपैट के परिणाम कंपेयर होंगे। आजतक 16 हजार मशीन और वीवीपैट का मिलान हुआ है, आजतक एक भी मिसमैच नहीं हुआ।

शाह ने कहा, अगर कोई पत्रकार कुछ सवाल पूछे और इनको पसंद न आए, तो कहते हैं तुम बीजेपी के एजेंट हो। केस हारते हैं तो जज पर आरोप लगाते हैं। चुनाव हारते हैं तो ईवीएम और वोट चोरी को दोष देने लगते हैं। बिहार में यात्रा निकाली और फिर भी ये हार जाते हैं। चुनाव हारने का कारण नेतृत्व है, कांग्रेस के कार्यकर्ता इनका हिसाब मांगेंगे।

28 प्रदेश अध्यक्षों ने सरदार पटेल के लिए वोट किया और दो ने पंडित नेहरू के लिए, पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बने, दूसरी वोट चोरी अनैतिक तरीके से चुनाव जीतना, इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव जीतीं और राजनारायण कोर्ट गए, कोर्ट ने तय कर दिया कि इंदिरा गांधी अनैतिक तरीके से जीतीं, इसे ढंकने के लिए संसद में कानून लाया गया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ केस ही नहीं चल सकता।

एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा के दौरान लोकसभा में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी ने अमित शाह को एसआईआर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिबेट का चैलेंज दिया। इसके बाद अमित शाह भड़क गए और उन्होंने कहा कि मेरी स्पीच का क्रम कोई और तय नहीं करेगा, मैं बोलूंगा अपने हिसाब से। शाह ने कांग्रेस पर तीखे हमले किए, जिसके बाद संसद में जोरदार हंगामा हुआ।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2000 के बाद तीन बार एसआईआर हुआ और दो बार बीजेपी-एनडीए की सरकार थी, एक बार मनमोहन सिंह की सरकार थी, तब किसी ने विरोध नहीं किया, यह चुनाव को पवित्र रखने की प्रक्रिया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि चुनाव के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है, यह व्यवस्था जब बनी थी तब हम थे ही नहीं, उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और अनुच्छेद 324 में चुनाव आयुक्त को विशेष अधिकार दिए गए, अनुच्छेद 326 में मतदाता की पात्रता तय की गई है। मनीष तिवारी कह रहे थे कि एसआईआर का अधिकार चुनाव आयोग को है ही नहीं, तो उनको बताना चाहता हूं कि यह अधिकार चुनाव आयोग को अनुच्छेद 327 में है।

अमित शाह ने कहा कि एसआईआर पर इस सदन में चर्चा नहीं होनी चाहिए, ये चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, ये भारत सरकार के तहत काम नहीं करते हैं। जब विपक्ष ने कहा कि हम चुनाव सुधार पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं तो हम तुरंत मान गए।

एसआईआर पर कांग्रेस ने एक महीने तक झूठा प्रचार किया है, जनता को गुमराह किया गया, मैंने एसआईआर का अध्ययन किया है, इसमें कुछ भी विरोध जैसा नहीं है, कांग्रेस की ओर से फैलाए गए झूठ का अपने तर्कों के हिसाब से जवाब देना चाहता हूं

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