गर्भगृह में स्थापित होगी रामलला की 51 इंच लंबी,डेढ़ टन का बालस्वरूप श्यामल मूर्ति

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बीरेंद्र कुमार झा

अयोध्या में रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगा। इस बात को लेकर अयोध्या वासी समेत देश की अन्य हिस्सों में रहने वाले भक्तगण पूरे उत्साह में हैं।प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरी अयोध्या को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। गर्भगृह में लगने वाली रामलला की मूर्ति भी बनकर तैयार हो गई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक कार्यक्रम के दौरान यह बात साफ किया की जो मूर्ति श्री राम जन्मभूमि मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित होगी, वह श्यामल रंग की होगी।

राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव ने साझा की जानकारी

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मूर्ति को लेकर कहा कि उसमें देवत्व यानि भगवान का अवतार है, विष्णु का अवतार है। एक राजा का बेटा भी है तो राजपुत्र है,उसने देवत्व है,लेकिन वह 5 वर्ष का बालक है।ऐसी प्रतिमा तैयार हो गई है।

राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने आगे कहा कि अगर पैर की उंगली से विचार करें तो आंख की भौं यानि ललाट तक यह मूर्ति 4 फीट 3 इंच की प्रतिमा है और लगभग 51 इंच ऊंची है।इसके ऊपर थोड़ा मस्तक,थोड़ा मुकुट और थोड़ा आभामंडल है। अयोध्या के मंदिर की पूजा 16 जनवरी से आरंभ होगी।इस मूर्ति को गर्भ गृह में अपने आसन पर 18 तारीख को दोपहर तक स्थापित कर दी जाएगी।यह मूर्ति लगभग डेढ़ टन की है और एक ही शिला की बनी हुई है। यह श्यामल है और उसकी विशेषताएं यह रखी गई है कि अगर जल से स्नान हो दूध से स्नान हो तो पत्थर का कोई प्रभाव दूध और पानी पर नहीं पड़ना चाहिए।अगर उसके जल का आचमन किया जाय तो उसका शरीर पर कोई दुष्परिणाम न हो जाए।

श्री रामलला की 3 मूर्तिया बनाई गई है

अयोध्या के राम मंदिर में स्थापित करने के लिए तीन मूर्तियां बनाई गई है। यह तीनों मूर्तियां अलग-अलग कलाकारों के द्वारा बनाई गई है। राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव छपत राय ने बताया कि इन तीन मूर्तियों में से कर्नाटक के अरुण योगीराज के द्वारा कर्नाटक शैली में बना श्यामल रंग की मूर्ति को गर्भ गृह में स्थापित किया जाएगा।साथ ही उन्होंने यह भी कहा की सभी मूर्तिकारों ने श्री रामलला की मूर्ति बनाने के लिए पूरी श्रद्धा से अथक परिश्रम किया है,, इसलिए बाकी की दो मूर्तियों को भी राम मंदिर में ही अलग-अलग जगह पर स्थापित किया जाएगा।

कई विशेषताओं से भरा होगा रामलला का दरबार

राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने बताया कि प्रभु श्रीराम की मूर्ति और जिस जगह इसे स्थापित किया जाएगा उसे स्पेस साइंटिस्ट की राय के मुताबिक तैयार किया गया है।यह इस इस तरह से बनाया गया है कि हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को रामनवमी के अवसर पर दोपहर 12:00 बजे सूर्य देवता खुद श्री रामलला का अभिषेक करेंगे। उन्होंने बताया कि एक ही आकर की तीन प्रतिमाएं बनाई गई थी, जिसमें से एक का चयन हुआ है। श्री रामलला की प्रतिमा की सौम्यता का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गहरे रंग के पत्थर से बनी मूर्ति में भगवान विष्णु की दिव्यता और एक राजसी बेटे का तेज है ,साथ ही इसमें 5 साल के बच्चों की मासूमियत भी है ।

16 जनवरी से शुरू होगा समारोह

राम ट्रस्ट के महासचिव के मुताबिक मूर्ति का चयन चेहरे की कोमलता ,आंखों में देखने, मुस्कान और शरीर आदि को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि 51 इंच ऊंची प्रतिमा पर सिर, मुकुट और आभा को भी बारीकी से तैयार किया गया है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह की शुरुआत 16 जनवरी से होगी।18 जनवरी को गर्भगृह में भगवान राम को सिंहासन पर स्थापित किया जाएगा। 5 साल की आयु वाले भगवान राम की प्रतिमा मंदिर के भूतल पर रखी जाएगी और 22 जनवरी को इसका अनावरण होगा। 8 महीने के बाद जब मंदिर तैयार हो जाएगा तब प्रभु श्री राम के भाइयों, माता सीता और हनुमान की मूर्तियां पहली मंजिल पर रखी जाएगी।

 

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