न्यूज़ डेस्क
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जंगल में ात तक का सबसे बड़ा नक्सली मुठभेड़ हुआ है जिसमे 31 नक्सलियों के मारे जाने की खबर मिल रही है। जानकारी के मुताबिक़ 28 शव बरमाद भी हो गए हैं। इसके साथ बड़े स्तर पर सर्च अभियान अभी भी चलाये जा रहे हैं। नक्सलियों के खिलाफ यह सर्च ऑपरेशन दो जिलों दंतेवाड़ा और नारायणपुर की पुलिस चला रही थी। इस ऑपरेशन में करीब चार सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल थे। माना जा रहा है कि यह मुठभेड़ अब तक सबसे बड़ा नुठभेड है जिसमे इतने नक्सली मारे गए हैं। यह भी बता दें कि इस मानसून सीजन में 235 नक्सली मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी के मुताबिक 28 शव बरामद किए गए हैं जबकि तीन से चार शव अभी और बरामद होने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन के लिए दोनों जिलों से करीब 400 से अधिक जवान निकले थे। इसी दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसके जवाब में जवानों ने फायरिंग की। मुठभेड़ दोपहर 1 बजे से 4 तक चली। मुठभेड़ के बाद एके-47 सहित कई ऑटोमेटिक हथियारों के अलावा बड़ी मात्रा में गोला बारूद भी बरामद किया गया है।
वहीं दंतेवाड़ा एसपी एस गौरव राय का दावा है कि मुठभेड़ में 31 नक्सली मारे गए हैं। वहीं कई नक्सलियों के घायल होने की संभावना है। मुठभेड़ में एक जवान घायल भी हुआ है। यह मुठभेड़ बारसूर के हांदावाड़ा पार और ओरछा ब्लॉक के थुलथुली के जंगलों में हुई है।
पुलिस को लगातार मिल रही सफलता से नक्सली बैकपुट पर हैं। नक्सलियों के बड़े कैडर को टारगेट किया जा रहा है। इस बार पुलिस बड़े नक्सली नेता को ढेर करने की बात कह रही है। एके -47 के बरामद होने से संकेत मिल रहे हैं कि अबुझमाड़ के जंगलों में कोई बड़ा नक्सली नेता मारा गया है। यह वही हथियार है जो पुलिस से लूटा गया था। सर्च करने के दौरान इस हथियार के अलावा एसएलआर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है।
बताया जा रहा है जिस जगह पर मुठभेड़ हुई है वह नक्सलियों का सबसे सुरक्षित इलाका रहा है। डीआरजी और एसटीएफ के जवान गोवेल, नेंदूर, व थुलथुली गांव की ओर रवाना हुए थे। इसी दौरान उनका सामना नक्सलियों से हुआ। करीब चार घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद नक्सलियों के 31 शव बरामद हुए हैं। अभी मारे गए नक्सलियों की शिनाख्ती नहीं हुई है। नक्सली अबुझमाड़ में लगातार कमजोर हो रहे हैं। उनके टॉप लीडर अब यहां आने से बच रहे हैं।
पिछले पांच दिनों से इनपुट मिल रहे थे कि अबुझमाड़ में नक्सली एक बड़ा ट्रेनिंग कैंप लगाए हुए हैं। इसी आधार पर दोपहर में दंतेवाड़ा और नारायणपुर पुलिस ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन प्लान किया। इस ऑपरेशन में डीआरजी और एसटीएफ के जवान शामिल थे। बताया जा रहा है कि जवानों ने पहले एक घेरा तैयार किया और उसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। ट्रेनिंग कैंप में मौजूद नक्सलियों पर फोर्स की तरफ से इतनी हैवी फायरिंग हुई कि उन्हें बचने का मौका नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि इस मुठभेड़ में नक्सलियों की पूर्वी बस्तर डिविजनल कमेटी का सफाया हो गया है। कमलेश उर्फ आरके जो कि 25 लाख का इनामी था। वह पूर्वी बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज था। साथ ही डीकेएसजेडसी का सदस्य भी था। वह इस मुठभेड़ में मारा गया है।
इसके अलावा नीति उर्फ उर्मिला पूर्वी बस्तर डिवीजन सचिव और बारसूर एरिया कमेटी इंचार्ज, मुरली मंडावी डिवीजन सप्लाई टीम कमांडर, बानो उर्फ भानो पूर्वी बस्तर डिवीजन कमेटी प्रेस टीम कमांडर, मुकेश पूर्वी बस्तर डिवीजन कमेटी का टेक्निकल टीम सदस्य था। वह भी इस मुठभेड़ में मारा गया है। मुठभेड़ में ज्यादातर नक्सली पूर्वी बस्तर डिविजनल कमेटी के थे।
नक्सलियों के साथ फ़ोर्स की हुई मुठभेड़ों में 4 अक्टूबर को थूलथूली के जंगल में हुई मुठभेड़ अब तक की दूसरी बड़ी मुठभेड़ है जिसमे 31 नक्सली मारे गए हैँ | इसके पहले वर्ष 2016 में पड़ोसी राज्य ओडिशा के मलकानगिरी स्थित रामागुड़ा के जंगलों में 34 नक्सलियों को स्पेशल फोर्स के
