बीरेंद्र कुमार झा
चुनाव आयोग की तरफ से जारी कार्यक्रम के मुताबिक मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को मतदान होना है। एक और जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की 18 साल की सरकार दांव पर है तो वहीं कांग्रेस 2020 में मिले झटका का बदला लेने का मौका तलास रही है। मतदान में महज 35 दिन बाकी है।राज्य में 10 मुद्दे ऐसे हैं जो भारतीय जनता पार्टी या कांग्रेस का भविष्य तय करेगा।
भ्रष्टाचार
कांग्रेस राज्य की बीजेपी सरकार पर 50% कमीशन का आरोप लगा रही है। यहां तक की कांग्रेस ने पैसे दो काम लो का नारा देना भी शुरू कर दिया है। कमलनाथ बार-बार सरकार को इस मुद्दे पर घर रहे हैं।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी तो दावा भी कर चुकी है कि बीजेपी ने 18 सालों में 250 स्कैम किए हैं। पीएम मोदी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि विपक्ष मिलकर काम से कम 20 लाख करोड़ का घोटाला कर चुका है। उन्होंने कोयला,और 2G स्पेक्ट्रम घोटाले वाला मुद्दा उठाया था।
किसान
एमपी की 70% आबादी कृषि से जुड़ी हुई है।वर्ष 2018 में कांग्रेस ने मंदसौर में हुई पुलिस गोलीबारी की घटना का जिक्र कर किसानों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश की थी। पार्टी कर्ज माफी, मुफ्त बिजली जैसे कई वायदे भी कर रही है।वहीं जबकि बीजेपी मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के सहारे किस पर कुलवाने की कोशिश में है।
बेरोजगारी
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वादा कर चुके हैं कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो, हर घर से एक व्यक्ति को रोजगार देंगे। पार्टी ने बेरोजगार युवाओं के लिए सीखो, कमाओ योजना भी शुरू की है, जिसके तहत योग्यता के आधार पर स्टाइपेंड मिलता है इधर कांग्रेस यह आरोप लगा चुकी है कि बीजेपी सरकार ने एमपी में 3 सालों में सिर्फ 21 सरकारी नौकरियां दी हैं। मार्च में विधानसभा में पेश आंकड़े बताते हैं कि 39 लाख 93 हजार लोगों ने खुद को रोजगार कार्यालय में दर्ज कराया है।
आदिवासी
कहा जाता है कि साल 2018 में बीजेपी की हार के लिए बड़े पैमाने पर जिम्मेदार आदिवासी बहुल इलाके थे।उस दौरान बीजेपी सिर्फ 16 एसटी सीट ही जीत सकी थी ,जबकि कांग्रेस की खाते में 30 सीटें गई थी। राज्य की कुल आबादी में 21% आबादी आदिवासियों की है। यहां 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। राज्य की कुल एस टी आबादी में से 40% भील समुदाय है और उसके बाद गौड़ 34 %द है ।राज्य में आदिवासी पर पेशाब करने का मामला काफी तुल पकड़ा था। जिसके बाद खुद मुख्यमंत्री को पीड़ित के पैर धोते हुए देखा गया था।
दलित
राज्य में 17% अनुसूचित जाति की आबादी है।यहां 230 सीटों में से 35 सीट आरक्षित है। कहा जाता है कि यहां इनमें सबसे ज्यादा संत रविदास को मानने वाले हैं हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 करोड रुपए के रविदास मंदिर की नीव यहां रखी है। एससी मतदाता बुंदेलखंड ,ग्वालियर, चंबल और बिंध्य क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2018 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में 18 सीटें आई थी जबकि कांग्रेस 17 सीट जीतने में सफल रही थी।
सत्ता विरोधी लहर
मामा से लेकर बुलडोजर मामा की छवि तैयार कर चुके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने सत्ता विरोधी लहर एक बड़ी चुनौती है। एमपी के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री होने के रिकॉर्ड के बावजूद पार्टी ने भी उन्हें अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पेश नहीं किया है। इतना ही नहीं बीजेपी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों,4 सांसदों और एक महासचिव को मैदान में उतरकर मामला रोचक कर दिया है।
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
बिहार में जाति जनगणना के आंकड़े जारी होते ही एक बार फिर इसका शोर अन्य राज्यों में होने लगा है। ऐसे में कहा जाने लगा है कि एमपी में भी इसकी गुंज सुनाई दे सकती है। राज्य में ओबीसी आबादी 50 फ़ीसदी के आसपास मानी जाती है, जिसे बीजेपी का बड़ा वोटर माना जाता है। कांग्रेस को उम्मीद है की जाति जनगणना की मांग के जरिए यह ओ बी सी में पैठ बना सकती है। पार्टी ने ओबीसी आरक्षण में महिला कोटा की भी बात छेड़ दी है।
महिलाएं
बुरहानपुर में महिलाओं के पैर धोते हुए नजर आ चुके मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को महिला मतदाताओं से खासी उम्मीदें है। आंकड़े बताते हैं कि इस राज्य में 2.67 करोड़ महिला वोटर है।हाल ही में बीजेपी ने महिलाओं को नौकरी में 35% आरक्षण देने का ऐलान किया है। इधर कमलनाथ भी ऐसी नीतियों की बात कर रहे हैं और आर्थिक सहयोग देने का ऐलान भी कर चुके हैं। कांग्रेस महिलाओं के खिलाफ अपराध के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेर रही है।
हिंदुत्व
एक और जहां बीजेपी उज्जैन में महाकाल लोक कॉरिडोर और ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की मूर्ति का बार-बार जिक्र कर रही है। वहीं कांग्रेस नेता कमलनाथ भी हनुमान भक्त की छवि बनाने में जुट गए हैं । उन्होने बजरंग दल को भी कांग्रेस में शामिल होने का नेता दिया था।जन आशीर्वाद योजनाओं में बीजेपी सनातन धर्म को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी कांग्रेस को घेर रही है।
गुटबाजी
सूची जारी होने के बाद और उससे पहले भी बीजेपी में असंतोष की खबरें आती रही थी ।कई बड़े नेता पार्टी छोड़ने तक का फैसला कर चुके थे।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित कई बड़े नेता इसे खत्म करने की कोशिश करते हुए देखें गए हैं।कहा तो यहां तक जा रहा है कि पार्टी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे और बीजेपी के कुछ नेताओं के बीच तानातनी चल रही है।í हालांकि इसे लेकर खुलकर कुछ नहीं कहा गया है।

