बोहरा समुदाय को साधकर विपक्षी कथित एकता को कुंद करने में जुटे पीएम मोदी 

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अखिलेश अखिल 

प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को सुबह लखनऊ गए। वहाँ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का उद्घाटन किया। खूब भाषण दिए। योगी सरकार की सराहना की ,इन्वेस्टर्स को यूपी में कारोबार करने के लिए प्रेरित किया और फिर मुंबई के लिए निकल गए। एक महीने के भीतर यह पीएम मोदी की दूसरी मुंबई यात्रा थी।उन्होंने मुंबई-सोलापुर और मुंबई साईंनगर शिरडी के लिए दो वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ साथ राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी कार्यक्रम में मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की तारीफ करते हुए कहा कि यह आधुनिक भारत की शानदार तस्वीर है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी 19 जनवरी को मुंबई आए थे और 38 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था।       
लेकिन पीएम मोदी का जो दूसरा कार्यक्रम था वह काफी महत्वपूर्ण था।मुंबई महानगर में काफी अहमियत रखने वाले और सबसे प्रभावशाली समुदायों में से एक दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के एक कार्यक्रम में भी पहुंचे थे मोदी। बृहन्नमुंबई महानगरपालिका, बीएमसी के चुनावों से पहले इसे अहम माना जा रह है।प्रधानमंत्री मोदी ने दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के शैक्षणिक संस्थान के एक नए परिसर का उद्घाटन किया। अंधेरी उपनगरीय क्षेत्र के मरोल में स्थित दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रमुख शिक्षण संस्थान अल्जमीया-तुस-सैफियाह यानी सैफी अकादमी के नए परिसर में पीएम मोदी समुदाय के प्रमुख सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन का हाथ पकड़कर चलते हुए दिखाई दिए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वे एक परिवार के सदस्य के नाते अपने घर आए हैं। यह संस्थान दाऊदी बोहरा समुदाय की सीखने की परंपराओं और साहित्यिक संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करता है। नया केंद्र अरबी की शिक्षा देगा।
        बीजेपी के पिछले कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के नेताओं को 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत का नया मंत्र दिया था। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को पसमांदा और बोहरा मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने के लिए कहा था । इसके लिए नेताओं को नसीहत भी दी थी । कहा था कि मुस्लिम समाज के बारे में गलत बयानबाजी न करें। उन्होंने नेताओं को सभी धर्मों और जातियों को साथ लेकर चलने की बात कही थी।
  प्रधानमंत्री मोदी किसी भी सूरत में बोहरा मुसलमानो के साथ ही पसमांदा को साधना चाहते हैं। उन्हें लग रहा है कि अगर मुसलमानो के इस समाज को साध लिया गया तो बीजेपी को फिर कोई हरा नहीं सकता। मुसलमानो में इनकी बड़ी आबादी है और सामाजिक रूप से बोहरा की हालत जहां मजबूत है वही पसमांदा गरीब उपेक्षित लोगो की हालत ख़राब है। बीजेपी को यह भी लगता है कि मुसलमान उसके साथ नहीं है लेकिन इन समाज को साध लिया गया तो बीजेपी को एक बड़ा वोट बैंक मिल जाएगा और मुसलमानो के भीतर पैठ भी हो जाएगी। 
             मुसलाम को हालांकि दो हिस्सों में बांटा गया है। शिया और सुन्नी। लेकिन इनके अलावा इस्लाम को मानने वाले 72 और फिरके हैं। इन्हीं में से एक बोहरा मुस्लिम होते हैं। बोहरा मुसलमान शिया और सुन्नी दोनों होते हैं। देश में 25 लाख से ज्यादा बोहरा मुसलमानों की आबादी है। ये मुसलमान काफी पढ़े लिखे होते हैं। इनकी पहचान समृद्ध, संभ्रांत समुदाय के तौर पर होती है। बोहरा समुदाय के ज्यादातर मुसलमान व्यापारी होते हैं। भारत में ज्यादातर दाऊदी बोहरा हैं। ये महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बसते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, दुबई, ईराक, यमन और सऊदी अरब में भी इनकी काफी संख्या है। आंकड़े बताते हैं कि गुजरात में ज्यादातर दाऊदी बोहरा समुदाय भाजपा को वोट देते रहे हैं।
      एक बात और। भारत में रहने वाले मुसलमानों में 15 फीसदी उच्च वर्ग के माने जाते हैं। जिन्हें अशरफ कहते हैं। इनके अलावा बाकि 85 फीसदी अरजाल, अजलाफ मुस्लिम पिछड़े हैं। इन्हें पसमांदा कहा जाता है। आंकड़े बताते हैं कि पसमांदा मुसलमानों की हालत समाज में बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे मुसलमान आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक हर तरह से पिछड़े और दबे हुए हैं। पसमांदा मूल रूप से फारसी से लिया गया शब्द है। इसका मतलब होता है, वो लोग जो पीछे छूट गए हैं, दबाए गए या सताए हुए हैं। भारत में पसमांदा आंदोलन 100 साल पुराना है। पिछली सदी के दूसरे दशक में एक मुस्लिम पसमांदा आंदोलन खड़ा हुआ था। इसके बाद 90 के दशक में भी पसमांदा मुसलमानों के हक में दो बड़े संगठन खड़े हुए थे। इनमें ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा, जिनके नेता एजाज अली थे। दूसरे पटना के अली अनवर थे, जो ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महज नाम के संगठन का नेतृत्व कर रहे थे। ये दोनों संगठन देशभर में पसमांदा मुस्लिमों के तमाम छोटे संगठनों की अगुआई करते हैं। हालांकि कि दोनों को ही मुस्लिम धार्मिक नेता गैर इस्लामी करार देते हैं। पसमांदा मुस्लिमों के तमाम छोटे संगठन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में ज्यादा मिल जाएंगे।
            सवाल है कि अगर बोहरा और पसमांदा मुसलमान को साध कर बीजेपी को कोई बड़ा लाभ संभव है ?बता दें कि भारत में जिस तरह से हिंदुओं में अलग-अलग जातियों का असर है, वैसा ही मुसलमानों में भी है। हिंदुओं में तो जाति के आधार पर वोट बंट जाते हैं, लेकिन मुसलमानों में सब एकजुट होकर किसी भी दल को वोट कर देते हैं। यूपी में सपा और बसपा, बिहार में आरजेडी और जेडीयू, पश्चिम बंगाल में टीएमसी, महाराष्ट्र में एनसीपी के खाते में मुसलमान वोट पड़ते हैं। इसी तरह दक्षिण भारत में भी भाजपा के खिलाफ मजबूती से खड़ी होने वाली पार्टी को मुसलमानों का वोट जाता है।आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े 85 फीसदी मुस्लिम शिक्षा, आर्थिक और सामाजिक हर स्तर पर काफी पीछे हैं। वहीं, बाकी 15 फीसदी मुसलमान आर्थिक और सामाजिक तौर पर काफी आगे निकल गए। अब बीजेपी  ने  आर्थिक तौर पर पिछड़े  मुसलमानों को टारगेट किया है। बीजेपी  की केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं में भी इन वर्ग से आने वाले मुसलमानों को काफी फायदा मिला है। ऐसे में अगर ये तपका बीजेपी के साथ आता है तो भाजपा को इसका सबसे ज्यादा फायदा यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में होगा। पीएम मोदी इसी वजह से बोहरा और पसमांदा को टारगेट कर रहे हैं। बीजेपी का यह टारगेट पूरा हो जाता है तो निश्चित तौर पर विपक्ष को एक बड़ा झटका लग सकता है। 


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