इन दोनों ईरान की एक तस्वीर चर्चा का केंद्र बिंदु बना हुआ है। इस तस्वीर में एक ईरानी महिला शिवलिंग के समक्ष भजन गा रही है और कुछ जालीदार टोपी पहने हुए मुसलमान इसमें अपना संगत कर रहे हैं। इस तस्वीर को देखकर ऐसा लगता है मानो वे अमेरिका और इजरायल के हमले से ईरान को सकुशल बचाने के लिए भगवान भोले शंकर की आराधना कर रहे हैं। हालांकि इस तस्वीर को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विधि से तैयार किया गया सुर्खियां बटोरने वाली एक तस्वीर है। बात चाहे कुछ भी हो, लेकिन ऐसा लगता है कि भगवान भोलेनाथ ने ईरानियों की इस प्रार्थना से खुश होकर उन्हें बचाने की व्यवस्था कर दी है।
इस युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस तरह अपने ही बुने जाल में फसने लग गए हैं कि अब इससे निकालने के लिए जितना छटपटाते हैं, उतना ही उसमें और धसते चले जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार भले ही अमेरिकी सेना ने अमेरिका के द्वारा ईरान पर आक्रमण करने के मामले को लेकर अपना विरोध प्रकट नहीं किया है और वह पूरी तरह से इस मामले में उनके साथ खड़े हैं। लेकिन अमेरिका के हर राज्यों में डोनाल्ड ट्रंप का विरोध होने लगा है और शनिवार को तो एक ही साथ पूरे अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले को लेकर जबरदस्त विरोध हुआ। लोग हाथों में No Kings,Hands Off , No Lies”, और “No ICE” के नारे लगे तख्तियों लेकर डोनाल्ड ट्रंप के ईरान हमले के विरुद्ध नारे लगा रहे थे।सैन फ्रांसिस्को में लोगों ने जमीन पर “Trump Must Go” लिखा और वाशिंगटन में बड़ी संख्या में लोग बैनर-पोस्टर लेकर इकट्ठा हुए। डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के विरुद्ध इसआक्रमणकारी कदम का सिर्फ अमेरिका में ही विरोध नहीं हुआ बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पेरिस, लंदन, लिस्बन, एम्स्टर्डम, मैड्रिड, रोम, कनाडा, जापान, मैक्सिको और यूरोप के कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए।प्रदर्शनकारी “Democracy is under threat” (लोकतंत्र खतरे में है) और “Trump Must Go Now” (ट्रंप को जाना चाहिए) जैसे नारे लगा रहे थे।
कुल मिलाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब बुरी तरह से घिर गए हैं। उनके लिए अब स्थिति एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई वाली हो गई है।
इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू जिन्हें अपने बचाव में ईरान से अपना बैर साधना था, वे डोनाल्ड ट्रंप को फंसा कर ईरान के विरुद्ध अपना बैर साध रहे हैं। अमेरिकी जनता को इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ मिलकर ईरान पर आक्रमण करने वाली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस करवाई को नाहक अपने देश के जन और धन की क्षति मानते हैं। दरअसल इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप से यह कहा था कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल कर अमेरिका पर आक्रमण कर सकता है, ऐसे में अगर दोनों मिलकर ईरान पर हमला कर देते हैं, तो कुछ ही दिनों में ईरान में खामयेनी का विरोध कर रहे जेन जी काफी आक्रामक हो जाएगा जिससे ईरान तुरंत घुटने पर आ जाएगा। हालांकि अमेरिकी खुफिया तंत्र ने ईरान के तरफ से फिलहाल अमेरिका पर किसी प्रकार के हमले नहीं होने की बात कही थी। लेकिन अब अब इजरायल के प्रधानमंत्री नेत्नयाहु के द्वारा डोनाल्ड ट्रंप को कही गई दोनों बातें झूठी साबित हुई। ईरान के प्रदर्शनकारी तो अब प्रदर्शन करने की जगह उल्टे ईरान की सेना में भर्ती हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है अमेरिका और इजरायल मिलकर जब बम बरसा कर ईरान को पूरी तरह से बर्बाद कर देगा तो ईरान में रहकर भी वह क्या करेंगे, क्योंकि तब उन्हें यहां सिर्फ मुसीबतें ही उठानी पड़ेगी।
हॉर्मुज संकट के कारण वैश्विक तेल बाजारों में भारी उठापटक हुई, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव पड़ा है। अमेरिकी बाजार में जबरदस्त मुद्रास्फीति देखी जा रही है और शेयरों के भाव जबरदस्त ढंग से नीचे जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप चाहकर भी अभी तक स्टेट आफ हॉरमुज को ईरानी नियंत्रण से मुक्त नहीं कर पा रहे हैं।इस क्षेत्र से सिर्फ वही जहाज क्रूड ऑयल या गैस लेकर आ जा पा रहा है,जिसे ईरान अनुमति देता है।
इस बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान सामने आया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान में चल रहे संघर्ष से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि ईरान में अमेरिका का मकसद पूरा हो गया है।
इस बीच अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में अमेरिकी सैनिक को जमीन पर उतरने की सोच रहे हैं ताकि जल्दी से वहां रिजिम परिवर्तन किया जा सके। लेकिन उनके इस कदम का भी अमेरिका में विरोध होने लगा है क्योंकि अमेरिकी यह जानते हैं कि थल सेना के रूप में ईरान एक बड़ी शक्ति है और वहां की भौगोलिक स्थिति भी कुछ इस प्रकार की है जिससे अमेरिकी सैनिकों की हवाई जहाज से उतरकर ईरान में कुछ बड़ा कर पाने की हैसियत नहीं है। उल्टे इस बात का खतरा है की कहानी अमेरिकी सी बड़ी संख्या में मारी ना जाए।
इस बीच अमेरिका से पैसा ठगने के उद्देश्य से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहजादा शरीफ और सीडीएस मुनीर अमेरिका से सौदेबाजी का इस युद्ध को ईरान को कह कर रुकवाने की बात कर रहा है। लेकिन ईरान ने पाकिस्तान को इस मामले में उल्टे घुड़की दे दी कि वह इस मामले में उछल कूद ना करें नहीं तो उसे भी लेने के देने पड़ जाएंगे।
इधर यमन के हुती विद्रोहियों के भी ईरान के पक्ष में आकर इसराइल पर मिसाइल हमला करने से ईरान का हौसला काफी बढ़ गया है। ईरान को लगता है कि यमन के हुती विद्रोहियों के इसमें शामिल होने से अब यह युद्ध बहुकोणीय हो जाएगा, जिससे डोनाल्ड ट्रंप और नेत्न्याहु की परेशानियां और ज्यादा बढ़ जाएगी जिसका लाभ उठाकर ईरान भी इसराइल और अमेरिका को सबक सिखाने के लिए अपने आक्रमण को और तेज कर सकेगा।
अब और भद न पिटे इसलिए डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ईरान पर अपने हमले को स्थगित करने की बात कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार इस युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ईरान के अधिकारियों के साथ उसकी बातचीत हो रही है लेकिन ईरान उसकी इस बात को पूरी तरह से झूठला रहा है और डोनाल्ड ट्रंप से किसी प्रकार की बात ना होने और बिना युद्ध का हर्जाना लिए युद्ध समाप्त नहीं करने की बात करते हुए अमेरिकी के अमेरिका के पिट्ठू देश यूएई सऊदी अरब और यहां तक की इसराइल के तेल अबीब पर भी जबरदस्त मिसाइल हमला कर रहा है। अब तो डोनाल्ड ट्रंप को यह डर भी सताने लगा है कि युद्ध का परिणाम चाहे जो हो, लेकिन कहीं ऐसा ना हो जाए कि अमेरिका में ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मध्यावधि चुनाव का सामना करना पड़ जाए और 1 वर्ष पूर्व प्राप्त हुइ राष्ट्रपति की कुर्सी भी इन्हें ना छोड़ना पड़ जाए।

