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सुप्रीम कोर्ट को मिले दो और जज ,अब पूरी क्षमता से लैश हुआ शीर्ष अदालत

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न्यूज़ डेस्क

देश का शीर्ष अदालत अब कुल 34 जजों के साथ पूरी क्षमता में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 निर्धारित की गई है। शुक्रवार को दो अंतिम जजों की नियुक्ति होने के बाद निर्धारित 34 जजों का कोरम पूरा हो गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की नियुक्ति को मंजूरी देने के बाद अब सरकार ने दो और जजों के नाम की मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम की ओर से इनके नाम की सिफारिश की गई थी। राष्ट्रपति ने कॉलेजियम की सिफारिश पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरविंद कुमार को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया है।
इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 हो गई है। यह अधिकतम संख्या है। अब सुप्रीम कोर्ट में जज का कोई पद खाली नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में 2019 के बाद पहली बार यह स्थिति बनी है, जब पूरी क्षमता के बराबर नियुक्ति हो गई है। बहरहाल, 31 जनवरी को कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की नियुक्ति की सिफारिश भेजी थी। इससे पहले पांच नामों को मंजूरी देने में सरकार ने 20 दिन से ज्यादा समय लगाया था। लेकिन दो नामों को 10 दिन के भीतर मंजूरी मिल गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले जब रंजन गोगोई भारत के चीफ जस्टिस थे तब सुप्रीम कोर्ट में जजों के सभी पद भरे हुए थे। असल में पिछले दिनों जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट में गंभीर विवाद हो गया था। सुप्रीम कोर्ट को चेतावनी जारी करनी पड़ी थी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर सरकार की लगाई गई, आपत्तियों का खंडन करते हुए केंद्र को लिखे गए अपने पत्र भी अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया था। ऐसा पहली बार हुआ था कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की आपत्तियों को सार्वजनिक किया था।
भारतीय न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति को लेकर हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच टकराव बढ़ी है। बड़ी संख्या में लंबित मामलों के निपटान के लिए सुप्रीम कोर्ट लगातार जजों की संख्या को बढ़ाने की बात कह रहा है। लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच चल रही रस्साकस्सी में जजों की नियुक्ति का मामला फंसा दिख रहा था। लेकिन अब यह मामला भी समाप्त हो गया। अब उम्मीद की जारी है कि अदालतों में फंसे पेंडिंग केस को जल्द और तेजी से सुलझाए जा सकेंगे। बता दें कि वर्तमान में देशभर में लंबित मामलों की संख्या साढ़े चार करोड़ से ज्यादा है, जिनकी जल्दी से जल्दी सुनवाई के लिए जजों की संख्या को बढ़ाया जाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का कोरम तो पूरा हो गया लेकिन उच्च न्यायालय और जिला अदालतों में में जजों की नियुक्ति अभी कोरम के मुताबिक़ नहीं हो पायी है। उम्मीद की जा सकती है कि उसे भी जल्द भर दिया जाएगा।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक देशभर के न्यायालयों में 15 सितंबर 2021 तक लंबित मामलों की संख्या 4.5 करोड़ से ज्यादा थी। इसमें अधीनस्थ न्यायालयों (सबऑर्डिनेट कोर्ट) में 87.6 फीसदी मामले लंबित पाए गए, वहीं उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों का आंकड़ा 12.3 प्रतिशत रहा। अगर बात करें सुप्रीम कोर्ट की तो वहां लंबित मामलों की संख्या 70 हजार से ज्यादा है। अध्ययन के मुताबिक देश में 2010 और 2020 के बीच लंबित मामलों की संख्या में 2.8 फीसदी की दर से सालाना वृद्धि हुई। हाल के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।

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