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झारखंड में जमीन खाली नहीं करने पर बुजुर्ग को जिंदा जलाया जमीन विवाद में फूटी झोपड़ी

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  • बीरेंद्र कुमार झा

जमीन खाली नहीं करने की सजा एक बुजुर्ग को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। साहिबगंज के मुफसिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत रामपुर दियारा निवासी मटरू सिंह को किराए की जमीन नहीं खाली करने पर उन्हीं के गांव के कुछ लोगों के द्वारा उनकी झोपड़ी में आग लगाकर जिंदा जला दिया गया।उसके घर पर आग लगने से आग की लपटें अचानक बढ़ने लगी।आसपास के लोगों ने शोर किया तो कुछ दूर घर में सोया उसका छोटा बेटा पिता की जान बचाने पहुंचा। बड़ी मशक्कत से गांव वाले की मदद से आग को बुझाया गया ,लेकिन 60 वर्षीय मटरू सिंह गंभीर रूप से आग में झुलस गए थे और घर का सारा सामान भी जलकर राख हो गया था। घर के अंदर एक गाय और गाय के दो बच्चे भी झुलस कर घायल हो गए थे।

रास्ते में ही बुजुर्ग ने तोड़ा दम

गांव वालों ने इस घटना की सूचना मुफ्सिल थाना प्रभारी अनुपम प्रकाश को दी । थाना प्रभारी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की छानबीन में जुट गए।बुजुर्ग मटरू सिंह को इलाज के लिए साहिबगंज सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सदर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ मोहन मुर्मू ने आग से झुलसे मटरू सिंह का प्राथमिक उपचार कर उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया।आग से जलने के बाद इससे होने वाले लहर और जलन को बुजुर्ग मटरू सिंह बर्दाश्त नहीं कर पाए और भागलपुर पहुंचने के पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस मामले को लेकर मृत् मटरू सिंह के पुत्र रुदल सिंह ने बताया कि पिछले 5 वर्षों से हम और हमारे गोतिया लोग भुस्कारी रजक की जमीन पर 10 घर बनाकर परिवार के साथ रह रहे थेlये लोग इसके एवज में किराए के रूप में जमीन के मालिक को प्रतिवर्ष ₹3000 देते आ रहे हैं। पिछले करीब 2 वर्षो से ही गांव के कुछ लोग जमीन खाली करवाने को लेकर लगातार हमसे विवाद करते रहते आ रहे हैं।

गांव के लोगों ने ही लगा दिया आग

इस आगजनी में मृत मटरू सिंह के पुत्र रुदल सिंह ने कहा कि आरोपियों द्वारा इन लोगों को यहां से मकान हटाने की धमकी दी जा रही थी ताकि ये लोग इस पर खेती कर सकें। इस बात को लेकर 1 दिन पहले श्री गौरी सिंह, विश्वनाथ सिंह,सूरज सिंह, उमेश सिंह और संतोष सिंह ने उनके साथ मारपीट भी की थी , जिसकी लिखित शिकायत इन लोगों ने थाना प्रभारी से की थी। शिकायत कर हम सब अपने घर चले आए थे।इसके बाद देर रात में अचानक से पिताजी के घर में आग की लपटें उठने लगी ।इसे देखकर मैं और मेरा भाई पिताजी को बचाने दौड़े तो देखा कि सूरज सिंह ,उमेश सिंह और 5 अन्य लोग वहां से भाग रहे थे । इसके बाद हम लोगों ने गांव वालों की मदद से आग पर काबू पाया। फिर पिता को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया जहां चिकित्सकों ने उन्हें बाहर रेफर कर दिया। इसके बाद इलाज के लिए भागलपुर ले जाने के क्रम में रास्ते में ही पिताजी की मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि आगजानी में घर में रखे ₹45 हजार, दियारा में लगभग 10 बीघा जमीन के पेपर सहित अन्य कागजात जलकर राख हो गए।

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