Homeदुनियायूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (UHO)— न्यूज़ लेटर 23 जून 2023

यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (UHO)— न्यूज़ लेटर 23 जून 2023

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 यह साप्ताहिक समाचार पत्र दुनिया भर में महामारी के दौरान पस्त और चोटिल विज्ञान पर अपडेट लाता हैं। साथ ही कोरोना महामारी पर हम कानूनी अपडेट लाते हैं ताकि एक न्यायपूर्ण समाज स्थापित किया जा सके। पारदर्शिता,सशक्तिकरण और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए ये छोटा कदम है- यूएचओ के लोकाचार।

आईसीएमआर इस बात का अध्ययन कर रहा है कि क्या कोविड शॉट्स का युवाओं में होने वाली मौतों से संबंध है?

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च एक study कर रहा है जिसका मकसद लोगों की अचानक हो रही मौत और कोविड-19 वैक्सीनेशन के बीच संबंध का पता लगाना है। हेल्थ मिनिस्ट्री के एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में ये कहा गया है कि अचानक हार्ट अटैक से मरने वाले लोगों के बारे में बहुत सारे “दुष्प्रचार’ है। “दुष्प्रचार” शब्द के उपयोग से पूर्वाग्रह का बोध होता है जिसे वैज्ञानिक जांच में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा ये जांच बहुत देर से और बहुत छोटे पैमाने पर की जा रही है। वैश्विक स्तर पर अचानक होने वाली मौतों में वृद्धि के पैटर्न को छह महीने पहले ठोस तथ्यों के आधार पर यूएचओ के कुछ सदस्यों ने  reported  किया था। टीकाकरण को तुरंत रोकने और जांच करने के बजाय रेड एलर्ट दिया जाने लगा, जैसा कि आपराधिक मामलों की जांच में होता है- जितनी देर की जाए सबूत मिट जाते हैं। ऐसा होने की संभावना इसलिए है क्योंकि कंट्रोल ग्रुप के बिना प्रायोगिक टीके के साथ बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरु किया गया था।

हमें इस बात की भी चिंता है कि आईसीएमआर हितों के टकराव से मुक्त नहीं है। इसने अनुसंधान में सहयोग के लिए कोविड-19 टीकों के प्रवर्तक बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ एक आशय पत्र letter of intent पर हस्ताक्षर किया है। गेट्स फाउंडेशन भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन कोविशील्ड के निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भारी अनुदान आवंटित करता है। देश में इस्तेमाल होने वाली दूसरी वैक्सीन कोवैक्सिन की रॉयल्टी royalty पर भी इसकी बराबर की हिस्सेदारी है। कोवैक्सिन को आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। अनुसंधान नैतिकता के सभी मानकों के अनुसार, ये “हितों का टकराव” आईसीएमआर को निष्पक्ष अध्ययन करने के लिए अयोग्य ठहराता है।

यदि सरकार वास्तव में टीकों के साथ अचानक होने वाली मौतों के किसी भी संबंध का पता लगाने के लिए उत्सुक है तो वह माउस के कुछ क्लिक के साथ ऐसा कर सकती है। 9 जून 2023 को हमारे माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने ‘वन वर्ल्ड,वन हेल्थ’ के बारे में ट्वीट tweeted किया, जहां उन्होंने भारत के परिवर्तनकारी उपकरणों के बारे में उल्लेख किया, जिसने डिजिटल वैक्सीन प्रमाणपत्र तैयार किए।

हमारे पास टीका लगाने वालों का डिजिटल रिकॉर्ड है। कानूनी कारणों से मृत्यु की रिपोर्टिंग करना आसान है। इसलिए टीकाकरण की स्थिति के संबंध में अचानक होने वाली मौतों को सारणीबद्ध करना कोई बड़ी बात नहीं होनी चाहिए। जहां चाह, वहां राह, लेकिन हमारे वैज्ञानिक आसन्न महामारी से प्रलय की भविष्यवाणी करने वाले गणितीय मॉडल बनाने के लिए माउस क्लिक का उपयोग करना पसंद करते हैं। हम आगे टिप्पणी करने से पहले आईसीएमआर द्वारा अपने निष्कर्ष जारी करने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   क्या हम आशा कर सकते हैं कि हमारे मजबूत प्रधानमंत्री लोकतंत्र के प्रति अपने प्रेम और “आपातकाल” से घृणा के कारण महामारी संधि को रोक देंगे?

प्रधानमंत्री ने 18 जून 2023 को अपने अत्यधिक लोकप्रिय“मन की बात”प्रसारण broadcast में 1975 में थोपे गए“आपातकाल”को“एक ऐसा अपराध जिसने स्वतंत्रता को खतरे में डाल दिया”कहा था। ऐसे सशक्त शब्द वास्तव में प्रशंसा के योग्य हैं।

 क्या इससे हमें यह आशा मिलती है कि वास्तविक या काल्पनिक महामारी के बहाने विश्व स्तर पर स्वतंत्रता और लोकतंत्र को खतरे में डालने वाली महामारी संधि के भारत में लागू होने की बहुत कम संभावना है? समय बताएगा और भावी पीढ़ी निर्णय करेगी।

पेशेंट जीरो की पहचान कर ली गई?

नई रिपोर्ट report में वुहान इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों को कोविड-19 का “पेशेंट जीरो” बताया गया है, जो लैब लीक सिद्धांत के लिए और अधिक सबूत देता है। शुरुआती मामले वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में “गेन ऑफ फंक्शन” शोध पर काम कर रहे तीन वैज्ञानिकों में थे। ऐसा माना जाता है कि ये वैज्ञानिक नवंबर 2019 में बीमार हो गए थे। हालांकि वैज्ञानिकों की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन माना जाता है कि वे शी ज़ेंगली के शिष्य थे, जिन्हें “चमगादड़ महिला” के नाम से जाना जाता है। नोवेल कोरोना वायरस की उत्पत्ति के रूप में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की भूमिका स्पष्ट होती जा रही है।   एक अध्ययन में पाया गया है कि अधिक बार कोविड-19 टीकाकरण से संक्रमण होने की संभावना  और भी बढ़ जाती है।

 एक preprint में बताया गया है कि जो लोग अधिक बार कोविड-19 वैक्सीन लगवा रहे हैं, उन्हें संक्रमण होने का खतरा अधिक है। संयुक्त राज्य अमेरिका में क्लीवलैंड क्लिनिक के 48,344 कर्मचारियों के बीच किए गए अध्ययन से पता चला है कि अधूरा कोविड-19 टीकाकरण वाले लोगों को पूर्ण टीकाकरण वाले लोगों की तुलना में कोविड-19 का खतरा कम था।  ब्रिटेन और दुनिया भर के राजनेता लॉकडाउन के दौरान कर रहे थे पार्टी  प्रमुख अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ ने ब्रिटिश राजनेताओं के लॉकडाउन के दौरान पार्टी करने और मौज-मस्ती करने की रिपोर्ट report प्रकाशित की है। यू-ट्यूबर डॉ. जॉन कैंपबेल राजनेताओं के दोहरे चरित्र का वर्णन narrating करते हुए भावुक हो गए। इस दौरान सख्त प्रतिबंधात्मक उपायों के कारण उनके परिवार के सदस्य उनके बीमार पिता से वे नहीं मिल सके। वह सवाल करते हैं कि क्या दुनिया भर के राजनेता आम नागरिक का मजाक उड़ा रहे हैं। राजनेताओं द्वारा कोविड-19 मानदंडों का ऐसा ही उल्लंघन भारत में भी देखा seen गया।  अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी डेल्टा लहर के दौरान एक बड़े जन्मदिन की योजना planned बनाई थी। डॉ. जॉन कैंपबेल अपने video में पूछते हैं कि क्या दुनिया भर के राजनेताओं को कोविड-19 के बारे में कुछ पता था जो उन्होंने आम नागरिक से छुपाया। जबकि दुनिया भर में नागरिक पीड़ित थे और कई बुजुर्ग अपने प्रियजनों को अलविदा कहने का मौका दिए बिना अकेलेपन में अकेली मौत मर गए और राजनेता मौज-मस्ती कर रहे थे। वास्तव में ये एक दुखद स्थिति है।

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