गुमला के आंजन धाम में जन्मे थे रामभक्त हनुमान, भगवान श्री राम और लक्ष्मण से जुड़े कई साक्ष्य अभी भी है मौजूद

0
182

बीरेंद्र कुमार झा

जनश्रुतियों के अनुसार श्री राम भक्त हनुमान का जन्म झारखंड राज्य के सबसे उग्रवाद प्रभावित गुमला जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर आंजन धाम में हुआ था।l भगवान हनुमान की जन्म स्थली के अलावा गुमला जिला के पालकोट प्रखंड में बाली और सुग्रीव का भी राज्य था। यहां तक की माता शबरी का आश्रम भी यही है,जहां माता शबरी ने भगवान श्री राम और लक्ष्मण को झूठे बेर खिलाए थे। पंपापुर सरोवर भी यही हैं, जहां भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ रुके थे और स्नान किया था।

प्रचलित जनश्रुतियां

प्रचलित जनश्रुतियों के अनुसार भगवान हनुमान की जन्मस्थली आंजन गांव, जंगलों और पहाड़ों से घिरा है। यह एक प्राचीन धार्मिक स्थल है ।यहां पहाड़ की चोटी स्थित गुफा में माता अंजनी के गर्भ से भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। आज यहां अंजनी माता की प्रस्तर मूर्ति विद्यमान हैं। अंजना माता जिस गुफा में रहा करती थी, उसका प्रवेश द्वार एक विशाल पत्थर की चट्टान से बंद था, जिसे बाद में खुदाई के उपरांत खोल दिया गया है।

दूसरी जनश्रुति के अनुसार इस गुफा की लंबाई 1500 फीट से अधिक है। इसी गुफा से माता अंजना खटवा नदी तक जाती थी और स्नान कर लौट आती थी। खटवा नदी में एक अंधेरी सुरंग है, जो अंजन गुफा तक चली जाती है लेकिन इस गुफा के रास्ते आंजन धाम जाने का साहस कोई नहीं करता है,क्योंकि गुफा के रास्ते में विषैले जीव जंतुओं ने अपना घर बना लिया है।

तीसरी जनश्रुति के अनुसार एक बार कुछ लोगों ने माता अंजना को प्रसन्न करने के मकसद से उनकी गुफा के समक्ष बकरे की बलि दे दी थी। इससे माता अंजना रुष्ट हो गई थी और उन्होंने अपने गुफा के द्वार हमेशा के लिए एक चट्टान से बंद कर लिया था। लेकिन अब इस चट्टान को हटाकर गुफा को खोल दिए जाने से यह श्रद्धालुओं के लिए एक मुख्य दर्शनीय स्थल बन गया है।

चौथी जनश्रुति के अनुसार आंजन पहाड़ पर रामायण काल में शांति की खोज में ऋषि-मुनियों का समूह कोलाहल से दूर इस प्रदेश में आए और यहीं अपना आश्रम स्थापित कर रहने लगे। ऋषि-मुनियों के आश्रम को जनाश्रम कहा जाता था। इस क्षेत्र में ऐसे 7 जनाश्रण स्थापित किए गए थे। कहा जाता है कि इस क्षेत्र में 7 जातियां निवास करती थी,जिनका नाम सबर, वानर निषाद,गृद्ध, नाग,किन्नर और राक्षस था। जनाश्रम के प्रभारी को कुलपति कहा जाता था।छोटा नागपुर में दो स्थानों आंजनधाम और टांगीनाथ धाम पर ऐसे जनाश्राम आश्रम आज भी स्थित है।

360 शिवलिंग और उसने ही तालाब हैं यहां

आंजन धाम विकास समिति के अध्यक्ष सरोज प्रसाद ने कहा कि आंजन धाम में शिव की पूजा की परंपरा बहुत ही प्राचीन है। माता अंजना प्रत्येक दिन एक तालाब में स्नान कर शिवलिंग की पूजा करती थी। यहां 360शिवलिंग और उतने ही तालाब हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here