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पाकिस्तान के कटास राज मंदिर की अनोखी कहानी, यहां सती की याद में भगवान शिव के आंसू गिरने से बना है अमृत कुंड

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विकास कुमार
भगवान भोले की महिमा अपरंपार है। भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी भगवान शिव के हजारों साल पुराने मंदिर है। पाकिस्तान के चकवाल इलाके में कटासराज मंदिर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर पांच हजार साल पुराना है। कटासराज मंदिर चकवाल जिले से लगभग चालीस किलोमीटर की दूरी पर है।


कटास राज मंदिर दुनिया भर के हिंदुओं के लिए बहुत पवित्र तीर्थस्थल है। ऐसी मान्यता है कि जिस तालाब के चारों ओर कटास मंदिर बना है। वह भगवान शिव के आंसुओं से भरा है। बताया जाता है कि सती की मृत्यु के बाद, दुख से त्रस्त शिव अपने आंसू नहीं रोक सके। भगवान शिव के आंसू पुष्कर और कटास राज में गिरे। और दोनों जगह तालाब बन गए। कटारसराज मंदिर में जो कुंड है उसे अमृत कुंड कहा जाता है। आज भी मंदिर परिसर में अमृत कुंड की धारा कल कल बहती है।

कटास राज मंदिर परिसर में सात मंदिर हैं। जिसे सतग्रह के रूप में भी जाना जाता है। इस मंदिर का इतिहास महाभारत में पांडवों के वनवास से भी जुड़ा हुआ है। वनवास के दौरान पांडवों ने यहां भी वक्त गुजारा। वन में भटकते हुए जब पांडवों को प्यास लगी। तो उनमें से एक कटाक्ष कुंड के पास जल लेने आया। उस समय इस कुंड पर यक्ष का अधिकार था। यक्ष ने जल लेने से पहले पांडव से कुछ सवालों का जवाब देने को कहा। जवाब न देने पर यक्ष ने उसे मूर्छित कर दिया। इसी तरह एक-एक करके सभी पांडव आए और मूर्छित होते गए। अंत में युधिष्ठिर आए और उन्होंने अपनी बुद्धिमता का परिचय देते हुए सभी सवालों के सही जवाब दिए। यक्ष इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने पांडवों को वापस चेतना में लाकर जल पीने की अनुमति दे दी।


सम्राट अशोक ने भी यहां एक बौद्ध स्तूप का निर्माण करवाया था। लेकिन वक्त के साथ ये स्तूप खंडहर में तब्दील हो गए। लेकिन भगवान शिव का मंदिर आज भी कायम है। कटास राज मंदिर की स्थापपत्य कला कश्मीलरी है। इसमें मंदिर की छत शिखर से नुकीली होती है। मंदिर को चौकोर आकार का बनाया गया है। मंदिर के समूहों में रामचंद्र जी का मंदिर सबसे बड़ा है। यहां के मंदिरों की दीवार पर खूबसूरत नक्काहशी भी देखने को मिलती है

कटास राज मंदिर में आज भी भगवान शिव के प्रतीक के तौर पर शिवलिंग मौजूद है। जब यहां हिंदू श्रद्धालु आते हैं तो भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। तीर्थयात्री पांडवों के बनाए सतग्रह मंदिरों का भी दर्शन करते हैं। कटास राज मंदिर में शिवलिंग के साथ ही अमृत कुंड का भी बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस तालाब में स्नान करने से भक्तों के सारे पाप धुल जाते हैं। और उसे मोक्ष की प्राप्तिन होती है।

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