निकाय चुनाव के लिए पार्टियों की रणनीति: बीजेपी ने मंत्री उतारे, अखिलेश-शिवपाल की लीडरशिप में पहला चुनाव; कैडर बचाने के लिए लड़ेगी बसपा और कांग्रेस ?

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बीरेंद्र कुमार झा

यूपी में निकाय चुनाव का ऐलान हो गया है। अगले महीने 4 और 11 मई को दो चरण में वोटिंग होगी। 13 मई को रिजल्ट आएंगे। निकाय चुनाव के अनाउंस से पहले ही गोरखपुर में रविवार को सीएम योगी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “अब डबल नहीं, ट्रिपल इंजन की सरकार बनानी होगी।”

चुनाव अनाउंस के बाद अखिलेश यादव ने सोमवार को अपना कन्नौज दौरा रद्द कर दिया। वह लखनऊ में ही रहेंगे। अखिलेश-शिवपाल के एक होने के बाद उनकी रणनीति में यह पहला चुनाव है।

मायावती ने निकाय चुनाव को लेकर सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। कांग्रेस भी जिला स्तर पर जन सत्याग्रह आंदोलन चलाकर माहौल बनाने में जुटी है। दोनों पार्टियों के लिए अपना कैडर बचाने की चुनौती है। क्योंकि, 2022 विधानसभा चुनाव में दोनों को बुरी हार मिली थी।

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और नीतीश कुमार की जेडीयू भी यूपी के निकाय चुनाव में ताल ठोकेगी। कुल मिलाकर सभी दलों की जोर आजमाइश तेज हो गई है।

बीजेपी ने एक जिले का दो-दो मंत्रियों को सौंपा चुनाव जिताने का जिम्मा

2017 के निकाय चुनाव में 16 में से 14 सीटों पर बीजेपी मेयर चुने गए थे। बीजेपी इस बार भी अपने इस ट्रैक रिकॉर्ड को कायम रखना चाहती है। इसलिए, 9 केंद्रीय मंत्रियों और 30 से ज्यादा कैबिनेट और राज्य मंत्रियों को निकाय चुनाव का जिम्मा दिया गया है। संगठन और सरकार में कहीं भी किसी भी तरह का गैप न आए, इसलिए एक-एक जिले की जिम्मेदारी दो मंत्रियों को दी गई है। पहला-प्रभारी मंत्री, जिसे सरकार ने नियुक्त किया है। दूसरा मंत्री जिसे संगठन ने नियुक्त किया है।

अमित शाह कौशांबी और आजमगढ़ का दौरा कर चुके हैं। सीएम योगी पिछले एक महीने से लगातार जिलों के दौरे कर रहे हैं। दोनों डिप्टी सीएम ने भी कमान संभाल रखी है। इसके अलावा, बीजेपी मतदाता सम्मेलन के साथ प्रबुद्ध सम्मेलन कर लोगों को जोड़ रही हैं।

11 अप्रैल से पहले चरण के नामांकन शुरू होंगे। इससे पहले ही बीजेपी प्रत्याशियों का चयन करना चाहती है। इसके लिए जिले के प्रभारी मंत्री, प्रभारी संगठन के पदाधिकारियों को प्रक्रिया में लगा चुकी है। बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ में कई दौर की बैठक कर चुके हैं।

उनकी अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला चुनाव है। भूपेंद्र चौधरी का दावा है कि निकाय चुनाव में सभी 17 मेयर बीजेपी के जीतेंगे। सपा, बसपा और कांग्रेस इस चुनाव में कहीं भी बीजेपी के सामने नहीं टिकेगी। फिलहाल, भाजपा के लिए 2017 जैसा प्रदर्शन दोहरा पाना बड़ी चुनौती है।

सपा: अखिलेश-शिवपाल क्या सपा का परचम लहरा पाएंगे?

सपा संस्थापक मुलायम सिंह के निधन के बाद अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल एक हुए हैं। दोनों की रणनीति में यह पहला चुनाव है। दोनों नेता लगातार जिलों के दौरे कर रहे हैं। चुनाव अनाउंस के बाद अखिलेश ने प्लानिंग तेज कर दी। सोमवार का कन्नौज दौरा रद्द कर दिया। सपा, रालोद के साथ मिलकर निकाय चुनाव लड़ेगी।

अखिलेश ने पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारियों की जिलेवार जिम्मेदारी तय की है। वह खुद लगातार जिताऊ उम्मीदवार को लेकर समीक्षा कर रहे हैं। सिर्फ यही नहीं, राजनीतिक बयानों से भी वह वाईएम यानी यादव-मुस्लिम के साथ दलितों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हफ्तेभर पहले उन्होंने रायबरेली में कांशीराम की प्रतिमा का अनावरण किया। OBC के लिए वह लगातार जातीय जनगणना का मुद्दा उठा रहे हैं।

दरअसल, निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन अखिलेश-शिवपाल के सामने चुनौती है। वजह है कि निकाय का असर अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव तक दिखेगा। कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहेगा और सपा विपक्ष की मुख्य पार्टी बनी रहेगी। 2017 में हुए मेयर चुनाव में सपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी। ऐसे में सभी नगर निगमों, जिला मुख्यालय वाली नगर पालिका परिषद के साथ प्रमुख नगर पंचायत सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए सपा ने कवायद शुरू कर दी।

बसपा: मायावती एक्टिव, बैठक बुलाई; टिप्स दिए

यूपी निकाय चुनाव से पहले बसपा की लखनऊ में 2 अप्रैल को बैठक हुई। बसपा प्रमुख मायावती ने इसे संबोधित किया। निकाय चुनाव को मजबूती से लड़ने के टिप्स दिए। बसपा नेता उमा शंकर सिंह ने कहा कि पार्टी मजबूती से निकाय चुनाव लड़ेगी। इसको लेकर हम काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में शाइस्ता परवीन चुनाव जीत रही थीं, उन्हें रोकने के लिए उमेश पाल हत्याकांड में नाम घसीटा गया।

उमा शंकर सिंह ने कहा कि हम चुनाव लड़ते हैं तो समाजवादी पार्टी हमें बीजेपी की बी टीम कहती है। असल में सपा ही बीजेपी की बी टीम है। अखिलेश यादव अंबेडकर जयंती और कांशीराम को लेकर होने वाले तमाम कार्यक्रमों में जा रहे हैं, लेकिन दलित समाज के लोग अपना अपमान नहीं भूल सकते हैं।

बसपा को 2022 के विधानसभा में सिर्फ एक सीट मिली थी। पार्टी के कई बड़े नेता टूटकर सपा में जा चुके हैं। ऐसे में बसपा के लिए अपना कैडर बचाने की चुनौती होगी। अगर चुनाव में वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई तो फिर 2024 की राह उसके लिए बेहद मुश्किल होगी। इसलिए, खुद सुप्रीमो मायावती ने निकाय चुनाव की कमान संभाली है।

कांग्रेस: अकेले निकाय चुनाव लड़ेगी पार्टी

लोकसभा की सदस्यता गंवाने के बाद राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस सहानुभूति कार्ड खेलने की तैयारी में है। राहुल गांधी को लेकर बीते 1 महीने में करीब 8 से 9 प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने लखनऊ में की। वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कांग्रेस जन सत्याग्रह आंदोलन जिलेवार स्तर पर कर रही है। राहुल की सदस्यता को लेकर भी नगर निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच सहानुभूति अपनाने का प्लान करते हुए चुनाव में जीत हासिल करने का प्रयास कर रही है। फिलहाल, कांग्रेस यूपी में अकेले निकाय चुनाव लड़ने का दावा कर रही है।

बीते तीन बार के निकाय चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया। 2023 के निकाय चुनाव के ऐलान के बाद कांग्रेस नगर पंचायत अध्यक्ष और नगर निगम वार्ड के चुनाव में जरूर मजबूती से उतरने का प्लान तैयार कर चुकी है। कांग्रेस मुस्लिम, OBC और दलित कार्ड के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले निकाय चुनाव में खुद को मजबूत साबित करने पर फोकस कर रही है।

96 लाख नए वोटर्स, 100+ पंचायतें बढ़ीं

चुनाव आयोग के मुताबिक, 2017 के मुकाबले 2023 में 96 लाख से ज्यादा वोटर्स बढ़ गए हैं। इसके अलावा और भी कई मायनों में यूपी निकाय चुनाव अलग होगा। निकाय चुनाव में 4.32 करोड़ वोटर्स वोट डालेंगे। 2017 में 3.35 करोड़ वोटर्स थे। यानी, पांच साल में 96.36 लाख से ज्यादा वोटर्स बढ़ गए। बताया कि इन चुनावों में 4.33 लाख से ज्यादा वोटर्स ऐसे हैं जो पहली बार वोट डालेंगे। ये वो वोटर हैं जो 1 जनवरी 2023 को 18 साल के हो गए। इस बार एक नगर निगम शाहजहांपुर, 2 नगर पालिका और 107 नगर पंचायतें बढ़ गईं हैं।

इस बार का निकाय चुनाव का पूरा कार्यक्रम

17 महापौर और 1420 पार्षद के चुनाव EVM से होंगे
पहले चरण की वोटिंग 4 मई और दूसरे चरण की वोटिंग 11 मई को होगी, जबकि 13 मई को नतीजे आएंगे। मेयर और पार्षद के चुनाव EVM और नगर पालिका, नगर पंचायत के चुनाव बैलट पेपर के जरिए कराए जाएंगे। यूपी नगर निकाय के 14,684 पदों पर चुनाव होगा। प्रदेश के 17 महापौर और 1420 पार्षद के चुनाव EVM से होंगे। नगर पालिका और नगर पंचायत के पदों पर बैलट पेपर से मतदान होगा। इसके अलावा चुनाव आयोग ने संवेदनशील जगहों पर अतिरिक्त पुलिस लगाने के निर्देश दिए हैं। नगर पालिका परिषद के 199 अध्यक्ष और 5327 सदस्यों का बैलट पेपर से वोट डाले जाएंगे। इसके अलावा 544 नगर पंचायत अध्यक्ष, 7178 सदस्यों का चुनाव भी बैलट पेपर से होगा।

 

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