प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में अंगदान करने वाली सरायकेला की स्नेहलता को बताया प्रेरणा स्रोत

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बीरेंद्र कुमार झा

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का 99 वा संस्करण था। इसमें उन्होंने मुख्य रूप से झारखंड के सरायकेला की निवासी स्नेहलता चौधरी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्नेहलता चौधरी जैसे लोग हमारे समाज को आगे बढ़ा सकते हैं। उनके इस महान कार्य के लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं और नमन करता हूं। यह हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा इनके जैसे दानवीर हमें और हमारे समाज को अंगदान का महत्व समझा कर जाते हैं।हमें संतोष है कि देश में ऐसा काम हो रहा है। इन प्रयासों के बीच आर्गन डोनर ज्यादा से ज्यादा संख्या में आगे आएंगे।अंगदान से बहुत से लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। समाज में ऐसे लोगों की जरूरत है।

अंगदान पर नीति बना रही है सरकार

मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात में स्नेहलता चौधरी और उनके परिवार की सराहना करते हुए कहा कि सरकार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए एक नीति बना रही है। इसके लिए सरकार ने डोमिसाइल की शर्त को हटा दिया है। उन्होंने कहा अंगदान के लिए पहले 65 वर्ष तक की उम्र सीमा तय थी। सरकार ने इसे भी खत्म कर दिया ताकि कोई भी व्यक्ति कहीं भी जाकर जरूरतमंद व्यक्ति के लिए स्वेच्छा से अंग दान कर सकें। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति अगर अंगदान करता है तो इससे कई लोगों की जिंदगी बच सकती है।

स्नेहलता चौधरी के अंगदान से चार लोगों को मिला नया जीवन

स्नेहलता चौधरी के अंगदान से चार लोगों को नया जीवन और 2 को नई दृष्टि मिली है। उन्हें कुछ दिन पहले ‘ ब्रेन डेड ‘ घोषित किया गया था। उनके भाई आईएएस रविंद्र अग्रवाल एम्स प्रशासन के अतिरिक्त निदेशक के रूप में तैनात हैं और वे जमशेदपुर के डीसी भी रह चुके हैं। पिछले 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दौरान सुबह में जब वे गंभारिया मुख्य मार्ग के पास सैर पर निकली थी, तो एक बाइक सवार ने उन्हें धक्का मार दिया था। उस हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट लग गई थी ।

स्नेहलता चौधरी का किया गया था ऑपरेशन

स्नेहलता चौधरी के सिर में गंभीर चोट लगने के बाद पहले झारखंड के जमशेदपुर में सिर की चोट के लिए ऑपरेशन किया गया था। फिर आगे उन्हें एम्स के ट्रामा सेंटर लाया गया था। उनके पति रमन चौधरी का सरायकेला में कपड़े का व्यवसाय है।

नेत्रदान अभियान की प्रबल समर्थक थी स्नेहलता चौधरी

स्नेहलता चौधरी स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक रहती थी और 25 वर्षों से नियमित तौर पर सुबह की सैर के लिए जाती थी। इसी क्रम में एक मोटर साइकिल द्वारा ठोकर मार देने से उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी। तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत नहीं सुधरी और 30 सितंबर को उन्हें ‘ ब्रेन डेड ‘ घोषित कर दिया गया।वे एक गृहिणी और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने जीवन भर अंगदान का समर्थन किया।उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति के लिए भी क्वालीफाई किया था। राष्ट्रीय अंग एवं ऊत्तक संगठन की व्यवस्था के अनुसार स्नेहलता का दिल, एक किडनी और कॉर्निया एम्स के मरीजों को दान किए गए जबकि उनके लीवर का इस्तेमाल सेना के आरआर अस्पताल में किया जाएगा। उनकी दूसरी किडनी राम मनोहर लोहिया अस्पताल में एक मरीज को दी गई।

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