क्या गृह मंत्रालय की अनुमति के बिना ठग किरण पटेल को जेड प्लस सुरक्षा मिल सकती है ?

0
207

अखिलेश अखिल
जम्मू कश्मीर जैसे अति संवेदनशील इलाके में गुजरात का ठग और बड़े स्तर का दलाल किरण पटेल लगातार जेड प्लस की सुरक्षा लेकर घूमता रहा और केंद्र सरकार मौन रही इसके क्या मायने हो सकते हैं ? क्या यह सब केंद्र के इशारे पर चल रहा था या फिर अगर केंद्र को जानकारी नहीं थी तो सबसे बड़ा सवाल है कि अब तक केंद्र सरकार का गृह विभाग और खुफिया एजेंसी क्या कर रहे थे ? क्या अमित शाह के पास इसका कोई जवाब है ? और जवाब है तो उन्हें इस पर कुछ बोलने की जरूरत है ।नैतिकता तो यही कहती है कि गृह मंत्री को इस मामले पर तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए । देश में अभी तक मात्र 40 लोगो को हो जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई है और काफी जांच पड़ताल के बाद यह उच्च श्रेणी की सुरक्षा किसी को दी जाती है ।ऐसे में किसी ठग और दलाल को यह सुरक्षा कैसे मिली सबसे बड़ा सवाल है।

संसद में अभी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच रार चल रहा है ।और इस बीच महा ठग की कहानी दबती जा रही है ।यह बात और है कि ठग किरण पटेल की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन इस बात की संभावना है कि सरकार के लोग इस खेल को कही दबा ना दे ।

जेड प्लस सिक्योरिटी में घूमने वाले महाठग किरण पटेल की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। उससे पूछताछ में पुलिस और इंटेलिजेंस अफसरों को पता चला है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद किरण वहां खास लोगों के लिए जमीनें और बागान तलाशने में जुटा था।

इन रसूखदारों में कुछ कारोबारी, नेता और शीर्ष अफसर हैं। वहीं, गांधीनगर से नई दिल्ली तक 5 ‘पावरफुल’ किरदार ऐसे हैं, जो किरण को हर तरह की मदद मुहैया करा रहे थे। जांच एजेंसियां अभी रसूखदारों के नाम बताने से बच रही हैं।

जमीनें और सेब के बागान स्कैन करने का टास्क सौंपा था
गांधीनगर के एक बड़े होटल में पिछले साल सितंबर में एक खास मीटिंग में इस ऑपरेशन का पूरा खाका तैयार किया गया था। इसी बैठक में पांचों पावरफुल किरदारों ने किरण को कश्मीर के विभिन्न इलाकों में जाकर ‘काम’ की जमीनें और सेब के बागान स्कैन करने का टास्क सौंपा। ये भी तय किया गया कि घाटी में निवेश के लिए बड़े ‘ग्राहकों’ को भी तलाशा जाए, ताकि एक साथ ज्यादा से ज्यादा डील कराई जा सकें।

किरण पटेल की पत्नी मालिनी पटेल ने भी पूछताछ में स्वीकार किया कि दक्षिणी कश्मीर में सेब के बागान खरीदने के लिए पार्टियां ढूंढ़ने का काम किरण को सौंपा गया था। किरण 27 अक्टूबर को पहली बार श्रीनगर पहुंचा। उसे बारामूला, शोपियां और पुलवामा जैसे सेंसेटिव इलाकों में जाना था। इसलिए, दिल्ली में बैठे पावर जोन ने संबंधित अफसरों को फोन लगाकर उसे जेड प्लस सुरक्षा दिला दी और फर्जी तरीके से पीएमओ का लेटर पैड भी बनवा दिया गया। हालांकि, सेंसेटिव जोन में जाने के लिए विशेष सुरक्षा की अनुमति की फाइल राज्य के मुख्य सचिव तक जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। गृह मंत्री अमित शाह ही अब इस बारे में ज्यादा जानकारी दे सकते है ।

सूत्रों के मुताबिक, पीएमओ ने जम्मू-कश्मीर में पिछले दो साल में हुए सभी जमीन सौदों की रिपोर्ट तलब कर ली है। कहां, कितनी जमीनों के सौदे हुए या उनकी क्या प्रक्रिया चल रही है, उससे जुड़े लोगों के बैकग्राउंड क्या हैं, इसकी जानकारी निकाली जाएगी। ये सभी रिपोर्ट अगले 15 दिन के अंदर पीएमओ भेजने को कहा गया है।

गांधीनगर और दिल्ली के सत्ता गलियारों से मिली जानकारी के मुताबिक, अगले 10 से 15 दिनों के अंदर दोनों पावर सेंटर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई हो सकती है। कुछ बड़े चेहरे पावर सेंटर से बेदखल किए जा सकते हैं, क्योंकि इन लोगों ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय में मिली ताकत का दुरुपयोग किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here