तेजस्वी यादव ‘4 लाख से बने 150 करोड़ की संपत्ति के मालिक’:सुशील मोदी ने नीतीश कुमार से की तेजस्वी की बर्खास्तगी की मांग

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बीरेंद्र कुमार झा

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एकबार फिर से लालू परिवार पर तीखा हमला बोला है। सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाए कि तेजस्वी यादव ने न तो कभी नौकरी की, न ही कभी व्यापार किया। पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए। क्रिकेट में भी फेल रहे। कोई पुश्तैनी संपत्ति भी नहीं थी। फिर वे दिल्ली में 150 करोड़ की संपत्ति के मालिक कैसे बन गए।

तेजस्वी यादव नई दिल्ली के सबसे महंगे इलाके न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, D-1088 के 500 वर्गमीटर जमीन पर बने 4 मंजिला मकान के मालिक हैं, जिसका वर्तमान मूल्य 150 करोड़ से ज्यादा है। यह वही मकान है ,जहां नई दिल्ली में तेजस्वी यादव अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। यह वही मकान है जहां ED के लोगों ने तेजस्वी से पूछताछ की थी। आखिर 150 करोड़ के इस आलीशान मकान के मालिक तेजस्वी यादव कैसे बन गए?

4 लाख की पूंजी लगाकर कैसे बनाया 150 करोड़ का मकान

तेजस्वी यादव मात्र चार लाख की पूंजी लगाकर 150 करोड़ के इस मकान के मालिक बन गए। D-1088, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी का मकान ए.बी.एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति है। जिसके मालिक तेजस्वी यादव हैं। ए.बी.एक्सपोर्ट ने 1996 से आज तक न तो कोई व्यापार किया और न ही इसका कोई टर्न ओवर है, न ही कोई कर्मचारी है। इस कंपनी ने केवल एक काम किया- तेजस्वी के लिए संपत्ति खरीदने का।

सुशील मोदी ने कहा कि 2010-11 में इस कंपनी के 97% शेयर मात्र चार लाख में तेजस्वी ने और शेष 3% शेयर लालू की बेटी चंदा यादव ने 7 हजार पूंजी लगाकर खरीद ली। शुरुआत में तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, चंदा यादव एवं रागिनी इस कंपनी के डायरेक्टर थे। कहा कि वर्तमान में रागिनी एवं लालू के विश्वस्त बड़हरिया (सीवान) निवासी शरीकल बारी इस कंपनी के डायरेक्टर हैं।

ए.बी.एक्सपोर्ट ने कैसे खरीदा मकान

मुंबई के 5 हीरा व्यापारियों ने 2007-08 में 1-1 करोड़ यानी कुल 5 करोड़ का लोन बगैर ब्याज के ए.बी.एक्सपोर्ट को दिया। जांच में यह सभी कंपनियां फर्जी पाई गईं। 15 वर्षों के बाद न तो यह 5 करोड़ वापस हुए और न ही हीरे व्यापारियों ने पैसे की मांग की।

2007-08 में इसी 5 करोड़ से 500 वर्ग मीटर का प्लॉट मकान सहित खरीदा गया, जिसमें जमीन की कीमत 4 करोड़ 54 लाख एवं मकान की कीमत 45 लाख दिखलाई गई। जिस समय यह संपत्ति खरीदी गई, उस समय लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। 2014-15 में कंपनी ने पुराने मकान को तोड़कर 4 मंजिला आलीशान मकान 3 करोड़ 68 लाख में बनाया।

वर्ष 17-18 में तेजस्वी यादव ने 4 करोड़ 10 लाख और चंदा यादव ने एक करोड़ रुपया इस कंपनी को कर्ज दिया है। हालांकि तेजस्वी यादव की संपत्ति की घोषणा में कहीं भी इस कर्ज का जिक्र नहीं है। आज इस मकान सहित जमीन की कीमत 150 करोड़ से ज्यादा है।

सुशील मोदी ने खड़े किए सवाल

आखिर मुंबई के पांच हीरे के व्यापारियों ने 2007-08 में ए.बी. एक्सपोर्ट को बिना ब्याज का कर्ज क्यों दिया ?

आज तक ए.बी.एक्सपोर्ट द्वारा न तो 5 करोड़ मूलधन और न ही ब्याज मद का एक पैसा क्यों नहीं भुगतान किया गया ?

आखिर प्रेमचंद गुप्ता, ओम प्रकाश कात्याल जैसे व्यापारियों ने क्यों अपनी कंपनी लालू परिवार को सौंप दी?

2010-11 में तेजस्वी यादव को मात्र चार लाख में इस कंपनी के 97% शेयर तथा चंदा यादव को 7 हजार में शेष 3% शेयर क्यों सौंप दिए गए ?

क्या यह सच नहीं है कि मात्र 4 लाख रुपए में तेजस्वी यादव इस 150 करोड़ की संपत्ति के मालिक बन गए ?

क्या आयकर विभाग ने 2017 में इस संपत्ति को बेनामी संपत्ति घोषित कर तीन करोड 10 लाख का अर्थदंड लगा दिया है और इस संपत्ति को जब्त कर लिया है?

 

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