बीरेंद्र कुमार झा
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की ऑनलाइन ट्रोलिंग के मामले में 13 विपक्षी दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है। न्याय के रास्ते में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए इन विपक्षी नेताओं ने इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में तुरत करवाई करने की मांग की है।
क्या लिखा है पत्र में
राष्ट्रपति को भेजे पत्र में विपक्षी दलों के नेताओं ने लिखा है कि हम सभी यह जानते हैं कि भारत के माननीय सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ इस समय महाराष्ट्र में सरकार गठन और राज्यपाल की भूमिका के मामले में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। यह मामला इस समय न्यायालय में विचाराधीन है।इस बीच महाराष्ट्र में सत्ताधारी पार्टी के हित के लिए संभावित रूप से सहानुभूति रखने वाली ट्रोल आर्मी ने भारत के माननीय सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के खिलाफ आक्रामकता दिखाइ है।इस पत्र की शब्द सामग्री गंदी और निंदनीय है,जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों ने देखा है।
किन किन विपक्षी नेताओं ने भेजा राष्ट्रपति को सीजेआई के ट्रोल से जुड़ा पत्र
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा गया यह पत्र कांग्रेस सांसद विवेक तंखा के द्वारा लिखा गया है और पार्टी के सांसद दिग्विजय सिंह, शक्ति सिंह गोहिल, प्रमोद तिवारी, अमी याग्निक, रंजीता रंजन, इमरान प्रतापगढ़ी, आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा शिवसेना (UBT) के सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी और समाजवादी पार्टी के सदस्य जया बच्चन और रामगोपाल यादव द्वारा समर्थित है। कांग्रेस सांसद विवेक तंखा ने इस मुद्दे पर भारत के महान्यायवादी आर वेंकटरमणी को भी अलग से पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की शक्ति परीक्षण के लिए कॉल करने की कार्यवाही की वैधता से संबंधित एक मामला की सुनवाई के बाद ऑनलाइन ट्रोलर्स ने सीजेआई और न्यायपालिका पर हमला शुरू किया है।
हाल में ही सीजेआई ने उठाया था ट्रोलिंग का मुद्दा
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में ट्रोलिंग की समस्या का मुद्दा उठाया था।उन्होंने कहा था कि यह एक ऐसा युग है, जिसमें लोगों में धैर्य और क्षमता की कमी है। हम जो कुछ भी करते हैं और मेरा विश्वास करें जज के रूप में हम इसके अपवाद नहीं हैं। आप जो कुछ भी करते हैं उसमें आपको किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा ट्रोल किए जाने का खतरा होता है, जो आपकी बात से सहमत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट कई बार ट्रोलिंग पर चिंता जता चुका है। साल 2017 में न्यायाधीशों और न्यायिक कार्यवाही सहित लगभग हर मुद्दे पर सोशल मीडिया पर हो रहे हमले को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक रेगुलेशन बनाने पर सहमति जताई थी।
पूर्व सीजेआई एनवी रमन्ना भी व्यक्त कर चुके हैं चिंता
26 नवंबर 2021 को संविधान दिवस पर बोलते हुए पूर्व सीजेआई एनवी रमन्ना ने मीडिया, विशेष रूप से सोशल मीडिया में न्यायपालिका पर बढ़ते हमलों पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे हमले प्रायोजित, समकालीन प्रेरित और लक्षित होते हैं। केंद्रीय एजेंसियों को इनसे प्रभावी ढंग से निपटना चाहिए।तब केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि सीजेआई रमन्ना ने उन्हें पत्र लिखकर न्यायाधीशों की सोशल मीडिया होने वाले आलोचनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाने का अनुरोध किया था। हालांकि किरण रिजजु ने कहा था कि कानून के जरिए न्यायाधीशों की आलोचना को रोकना संभव नहीं है।

