Homeदेशबीजेपी की चुनावी जीत में बीजेपी की बी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण

बीजेपी की चुनावी जीत में बीजेपी की बी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण

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बीरेंद्र कुमार झा

भारतीय भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए 400 प्लस का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक तरफ बीजेपी खुद एड़ी- चोटी का जोर लगा रही है , इसके बड़े से बड़े नेता छोटे-छोटे राज्यों और छोटे – छोटे स्थानों में भी चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं ताकि चुनाव में 400 प्लस का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।वहीं दूसरी तरफ बीजेपी विभिन्न राज्यों में खुद से पहले अपनी बी टीम को उतार रही है ‌‌ताकि इनके भरोसे मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद कर चुनाव में जीत हासिल किया जा सके। एआईएमआईएम के नेता असुदुद्दीन ओवैसी पर तो तकरीबन हर चुनाव में बीजेपी की बी टीम के रूप में काम कर विपक्षी राजनीतिक दलों का मुस्लिम वोट काटकर और हिंदू मतों का ध्रुवीकरण कर उसे बीजेपी के पक्ष में कर के बीजेपी को चुनाव जिताने का आरोप तो अक्सर लगता ही रहा है।अब झारखंड के लिए भी इसने एक बी टीम तैया कर लिया है। झारखंड में आदिवासी सेंगल अभियान के नेता सालखन मुर्मू को बीजेपी द्वारा अपनी बी टीम के रूप में उतरने की बात सामने आ रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के गढ़ में बीजेपी की बी टीम की सेंधमारी

सालखन मुर्मू ने आदिवासी सेंगल अभियान के बैनर तले बीजेपी को 2024 में होने वाली लोकसभा और झारखंड विधान सभा चुनाव में अपरोक्ष रूप से लाभ पहुंचाने का अभियान अभी से ही छेड़ दिया है। झारखंड में फिलहाल वे मुख्य रूप से झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ माने जाने वाले संथाल परगना क्षेत्र में जेएमएम के कट्टर वोट बैंक ‘ आदिवासियों’ में सेंधमारी कर रहे हैं। अपने इस अभियान में सालखन मुर्मू मुख्य रूप से हेमंत सोरेन परिवार को टारगेट कर रहे हैं। इनका आरोप है झारखंड के दूसरे क्षेत्रों से संथाल परगना आकर सोरेन परिवार, यहां के आदिवासियों के नाम पर खूब लूट मचाकर पैसा बना रहे हैं।शिबू सोरेन पर तो ये झारखंड से विस्वशघात करने और नरसिम्हा राव की प्रधान मंत्री की कुर्सी बचाने के लिए झारखंड की उपेक्षाकर पैसा बनाने का आरोप लगा रहे है और इसका प्रमाण देकर आदिवासियों के मन में झारखंड मुक्ति मोर्चा और सोरेन परिवार के प्रति नफरत का भाव पैदा करने में लगे हैं,ताकि आगामी चुनाव में बीजेपी को उसका लाभ मिले। इनका कहना है की हेमंत सोरेन और शिबू सोरेन ने आदिवासियों के नाम पर सिर्फ अपनी कमाई की है और आदिवासियों का कुछ भी भला नहीं किया है ।छोटा बेटा बसंत के लूट की तो चर्चा ही बेकार है,क्योंकि यह तो सबसे बड़ा खिलाड़ी है। वहीं दूसरी तरफ ये बीजेपी की जमकर प्रशंसा भी कर रहे है। इनका मानना है कि सोरेन परिवार वाले जेएमएम और इसके सहयोगी कांग्रेस और आरजेडी से तो बीजेपी भली है, जो आदिवासियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं भी चला रखी है ,और सबसे बढ़कर तो इसने आदिवासी समुदाय से आने ववाली महिला द्रौपदी मुर्मू को देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद पर भी विराजमान किया।

आदिवासी वोटों में सेंधमार हुई तो बीजेपी को होगा बड़ा फायदा

बीजेपी का चुनाव जीतने का अपना एक अलग ही अंदाज है। कहीं खुद के भरोसे तो कहीं अपनी बी टीम के भरोसे किसी न किसी प्रकार से चुनाव में जीत हासिल करना ही इसका लक्ष्य है। वोट प्रतिशत की बात करें तो 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 5 1 % मत मिले थे और इसने झारखंड में एक को छोड़कर सभी सीटों पर अपना परचम लहराया था, लेकिन विधान सभा चुनाव में ईसे 33.43% मत ही प्राप्त हुआ । मतों के दृष्टिकोण से झारखंड में यह सबसे अधिक था , लेकिन जिस प्रकार संथाल परगना और अन्य आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासी जेएमएम के पक्ष में गोलबंद हो गए, उससे बीजेपी सीट निकलने में पिछड़ गई और सत्ता इसके हाथो से फिसल गई। ऐसे में अगर बीजेपी की बी टीम के रूप में सालखन मुर्मू जेएमएम के वोट बैंक आदिवासियों में सेंधमारी कर उसे बीजेपी के पक्ष में करने में सफलता पाई , तब तो बीजेपी के लिए सोने पर सुहागा और अगर नहीं तो सालखन मुर्मू कम से कम कम आदिवासियों को जेएमएम की तरफ से विरक्त करने में भी सफल रहे तो भी बीजेपी की 2024 के लोक सभा और विधान सभा चुनाव में जीत पक्की।

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