न्यूज डेस्क
भारत 2022 में दुनिया का आठवां सबसे प्रदूषित देश रहा। यह रैंकिंग स्विस फर्म IQAir ने मंगलवार को जारी अपनी ‘वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट’ में दी है। भारत 2021 में पांचवें नंबर पर था। हालांकि भारत में PM 2.5 लेवल 53.3 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक गिर गया, लेकिन यह अब भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से 10 गुणा से भी ज़्यादा है।

दुनिया के सौ सर्वाधिक शहरों में 65 भारत के
दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची भारत के लिए झटका है। सर्वाधिक प्रदूषित टॉप 100 शहरों में 65 शहर भारत के हैं। वहीं टॉप 10 सबसे प्रदूषित शहरों में छह शहर भारतीय हैं।
पाकिस्तान का लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
पाकिस्तान का लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर आंका गया है। लाहौर में पीएम 2.5 का स्तर 97.4 मापा गया है। दूसरे नंबर पर चीन का होतन शहर है, जहां पीएम 2.5 का स्तर 94.3 है। तीसरे नंबर पर भारत का भिवाड़ी और राजधानी दिल्ली का नाम है। दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 92.6 मापा गया है। टॉप 10 में अन्य भारतीय शहरों में बिहार का दरभंगा, असोपुर, पटना, नई दिल्ली का नाम शामिल है।

इस बार सूची में सबसे ज़्यादा 7,300 से अधिक शहरों के आंकड़े दर्ज किए गए हैं, जबकि पिछली बार 2017 में 2,200 से भी कम शहरों की सूची बनाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वायु प्रदूषण की आर्थिक कीमत 150 अरब अमेरिकी डॉलर है। भारत में PM 2.5 के कुल प्रदूषण का 20-35 फीसदी हिस्सा ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर पैदा करता है। इसके अलावा प्रदूषण के अन्य स्रोतों में औद्योगिक इकाइयां, कोयला-चालित पॉवर प्लान्ट और बायोमास बर्निन्ग शामिल हैं।
चाड दुनिया का सबसे प्रदूषित देश
दुनिया का सबसे प्रदूषित देश चाड है। चाड का औसत स्तर 89.7 है। इसके बाद इराक का नंबर आता है, जिसकी हवा दुनिया में दूसरी सबसे प्रदूषित हवा है। इसका औसत स्तर 80.1 था। पाकिस्तान के दो शहर 2022 में सबसे खराब हवा वाले पांच शहरों में शामिल हैं। यह 70.9 औसत स्तर के साथ देशव्यापी रैंकिंग में तीसरे स्थान पर है। उसके बाद 66.6 औसत स्तर के साथ बहरीन का नंबर आता है।

दुनिया के दस सबसे प्रदूषित देश
- चाड
- इराक
- पाकिस्तान
- बहरीन
- बांग्लादेश
- बुर्किना फासो
- कुवैत
- भारत
- मिस्र
- ताजिकिस्तान
क्या है IQAir?
IQAir फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले वायुजनित कणों, जिन्हें PM2.5 के रूप में जाना जाता है, की सघनता के आधार पर वायु गुणवत्ता स्तरों को मापता है। इसका वार्षिक सर्वेक्षण शोधकर्ताओं और सरकारी संगठनों द्वारा व्यापक रूप से वर्णित किया गया है।
