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जांच एजेंसियों के बहाने  नेताओं को डराने का यह अमृतकाल बहुत कुछ कहता है —-

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अखिलेश अखिल 

आज फिर लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद के कई करीबियों पर पटना से लेकर दिल्ली तक आज भी  छापेमारी जारी है। 15 ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। देश में जाँच एजेंसियों ने भौकाल खड़ा कर दिया है। अंतिम परिणाम क्या होंगे अभी कोई नहीं जानता लेकिन एक बात तो तय है कि लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता को ध्वस्त करने का यह खेल मनोरंजक भी हो गया है।                
कहावत है कि ताकतवर के सामने दुनिया झुकती है। आज दो ध्रुवो में जो दुनिया बंटी  दिखती है उसके पीछे भी यही ताकत है ,रुतवा है और इकबाल भी। अमेरिका अपने को सबसे महान कहता है तो रूस अपनी महानता के सामने अमेरिका को बौना समझता है। और इस खेल में पूरी दुनिया या तो मित्र बनकर या फिर डरकर इन दोनों देशो के साथ गोलबंद होने को विवश है। कौन किससे पंगा ले ! यही हाल देश के भीतर की राजनीति की भी है। जो समर्थवान है उसके सब दीवाने हैं। उसकी हर क्रिया पर यशोगान के जयघोष होते हैं। किसकी मजाल जो क्रिया के खिलाफ प्रतिक्रया दे दे। जो प्रतिक्रया देगा वह निशाने पर रहेगा और रहता भी आया है। भारत के राजनीति आज इस पथ पर दौड़ रही है। एक तरफ बीजेपी की दुदुम्भी है तो दूसरी तरफ हांफती दूसरी बहुत सी पार्टियां।      
दर्जनों पार्टियां अलग -अलग राज्यों में राजनीति तो करती है लेकिन उसकी बागडोर अंतिम  पर केंद्र के हाथ ही है। और केंद्र में बीजेपी की सरकार है। पीएम मोदी जैसे इकबाली आदमी के हाथ में सत्ता है। भला कौन आगे बढ़ सकता है और कौन खिलाफत करेगा इसकी कुंडली भी तो यहीं से बनाकर निकलती है। बीजेपी कहती है कि सब उसके साथ आ जाओ। सरेंडर करो। हमारी ही सुनो। हम ही देश के असली रक्षक हैं। हम ही देश भकत है और हम ही जनता के असली सेवक भी। बाकी के सब चोर हैं ,गिरहकट है और भ्रष्ट आचरण से लैश भी।    
   बीजेपी में सैकड़ो लोग इन्ही गिरहकट ,ठग और चोर पार्टियों से आ चुके हैं। कल तक दूसरी पार्टी में ठगी का जो काम करते थे आज बीजेपी में आकर रामधुन गए रहे हैं। कांग्रेस में रहकर जो लोगो की जेबे काटते थे अब बीजेपी में नोटों की माया से विरक्त हैं। जो कल तक दागी थे ,जिनके पीछे सरकार के तंत्र गिरफ्तारी के चक्कर लगाते थे अब बीजेपी में आकर भगवान् के अवतार कहलाते हैं। कल के दागी आज सुचरित्र का लबादा ओढ़े ज्ञान बाटते हैं। अपने सामने सबको मुर्ख मानते हैं। राजनीति का यह खेल आज से पहले नहीं दिखा था। नेताओं के ऐसे चरित्र और दोहरे मापदंड की कहानी किसी ने कही पढ़ी भी नहीं थी। मौजूदा राजनीति का यही अमृतकाल सबको लुभा भी रहा है और भरमा भी रहा है। देश में सब कुछ ठीक है। पांच सेर अनाज पर भारत की जनता लट्टू है। क्योंकि बीजेपी के देश भर में फैले संत ,सन्यासियों और कथावाचकों द्वारा  हिंदुत्व और भगवान् राम की अमृतकथा में पांच किलो अनाज को भी जिस तरह से अमृत पान कहकर प्रचारित किया जा रहा है ,आज से पहले कभी देखा नहीं गया। लक्ष्य एक ही है भारत हिन्दू राष्ट्र बने। ऐसा हो गया तो देश अमेरिका हो जाएगा और वह पूरी दुनिया पर राज करेगा। यह एक स्वप्न है जो हर रात भक्तो दिखाई पड़ती है। बाकी जनता पांच किलो अनाज और दो हजार रुपये के स्वप्न  में डूबी रहती है।    
  बीजेपी अजेय है। शक्तिशाली भी। देश की सभी पार्टियां उसके निशाने पर है। सभी नेता उसकी नजर में षड्यंत्रकारी है और ठग बेईमान भी। जांच एजेंसियां बीजेपी के आदेश की प्रतीक्षा करती रहती है। पहले वह अपने आदेश का ही पालन करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब जान एजेंसियों के रडार पर वे सब हैं जो बीजेपी के खिलाफ की राजनीति करते हैं। कोई बीजेपी का विरोध कैसे कर सकता है ? कोई प्रधानमंत्री का विरोध कैसे कर सकता है ? कोई बीजेपी नेताओं का विरोध कैसे कर सकता है ? ये सब भारत के प्रतिक जो हैं। ये सब राष्ट्र के प्रतिक जो हैं। बीजेपी का विरोध ,देश का विरोध है। मानो बीजेपी देश है ? सर्कार का विरोध मानो राष्ट्र का विरोध है मानो सरकार ही राष्ट्र है और बीजेपी नेताओं का विरोध भी राष्ट्र विरोध है मानो ये सब राष्ट्र निर्माताओं की मण्डली है।      
जांच एजेंसियों से कौन बचेगा। सामने चुनाव है ,सबको पिंजड़े में बंद करने की कवायद चल रही है। विपक्ष के 122 बड़े नेता जान एजेंसियों के रडार पर है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री रहे सिसोदिया जेल में माला जप रहे हैं। लम्बे समय तक माला जपेंगे। चले थे दिल्ली की शिक्षा को बदलने ,जेल पहुँच गए। कांग्रेस वाले भी कई नेता जेल जा चुके हैं। अब कुछ और की बारी है। लालू परिवार की कहानी ही कुछ और है। जेल गए भी और फिर तैयारी भी चल रही है। जो जेल जाना नहीं चाहते वे शरणागत हो चुके हैं। पार्टी ख़त्म भले ही हो जाए जेल नहीं भेजो भाई। इस कहानी को आगे बढ़ाया जा रहा है। अब केसीआर की बेटी कविता जांच के दायरे में है। वह दिल्ली पहुँच गई है। कल उसका सीबीआई और  ईडी से सामना होना है। कविता का क्या गुनाह है कोई जानता भी नहीं ? उसका गुनाह यही है कि वह दिल्ली में रहकर विपक्षी एकता को आगे बढ़ाने की कहानी रच रही थी। कई दलों को फंडिंग भी करवा रही थी। उसका परिचय कई कारोबारियों से भी थे। उनमे से एक कारोबारी का नाम  दिल्ली शराब घोटाले में सामने आया। कविता रडार पर आ गयी। कविता के पिता केसीआर तेलंगाना की राजनीति  ललकार रहे हैं लेकिन क्या बीजेपी को कोई ललकार सकता है क्या ? कोई मोदी और शाह को आँख दिखा सकता है क्या ? इकबाल के सामने किसी की औकात ही क्या है ? राजनीति का यह अमृतकाल सदा यादगार रहेगा।

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