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बिहार में है होलिका की चिता भूमि ,आज भी यहां अगजा की राख से खेली जाती है होली

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  • बीरेंद्र कुमार झा

होली के त्यौहार पर हर साल हर जगह होलिका दहन का आयोजन किया जाता है। लेकिन आज भी बहुत सारे लोगों को यह पता नहीं है कि होलिका की चिता भूमि कहां है? पूरी दुनिया होली को रंगो के त्योहार के रूप में खेलती है ,लेकिन होलिका की चिता भूमि में आज भी होलिका दहन के पश्चात बची राख यानि अगजा से ही होली खेलने की परंपरा है। होलिका हिरणकश्यप की बहन थी, जो अपने भाई के कहने पर अपने भतीजे प्रहलाद को आग में जलाना चाहती थी।लेकिन इस प्रयास में वह खुद ही जल मरी और विष्णु भक्त प्रह्लाद जिंदा बच गया। प्रह्लाद को जिंदा देख लोग खुशी से नाचने लगे और होलिका की चिता की राख एक दूसरे पर डालने लगे। कहा जाता है कि इस तरह होली की शुरुआत हुई।

बिहार के पूर्णिया जिला में स्थित है होलिका की चिता भूमि

धार्मिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार होलिका की चिताभूमि बिहार के पूर्णिया जिला के बनमनखी के सिकलीगढ़ धराहरा में है ।आज भी यहां हिरण्यकश्यप काल से जुड़े कई अवशेष बचे हुए हैं। इन अवशेषों से यह प्रमाणित होता है कि होलिका ने यहीं विष्णु भक्त प्रह्लाद को जलाकर मारना चाहा था, लेकिन प्रह्लाद की जगह वह खुद ही यहां जल मरी और विष्णु भक्त प्रह्लाद पूरी तरह से सुरक्षित बच गए। जिस दिन यह घटना घटी, उस दिन लोगों ने प्रह्लाद के बचने की खुशी में वहां होलिका के जले राख एक दूसरे पर लगाकर होली मनाई।आज भी यहां रंगों से नहीं बल्कि राख से होली खेलने की परंपरा है।

घटना से जुड़े अवशेष है मौजूद

होलिका की चिता भूमि बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी के सिकलीगढ़ धराहरा में स्थित है। यहां आज भी हिरण्यकश्यप काल से जुड़े कई अवशेष मिलते हैं।आज भी यहां एक खंभा मौजूद है,जिसके बारे में लोगों की यह धारणा है कि इसी पत्थर के खंभे से भगवान नरसिंह ने अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था। पूर्णिया जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बनमनखी प्रखंड के सिकलीगढ़ धराहरा स्थित गांव में भगवान नरसिंह का एक प्राचीन मंदिर है।यहां पत्थर का एक बड़ा खंभा है। भगवान नरसिंह के अवतार से जुड़ा यह खंभा कभी 400 एकड़ जमीन में फैला था ।आज या घटकर 100 एकड़ में ही सिमट गया है ।भगवान नरसिंह के अवतार से जुड़े इस खंभा को लोग माणिक्य स्तंभ के नाम से जानते हैं ।कहा जाता है कई बार इसे तोड़ने का प्रयास किया गया,लेकिन यह टूटा नहीं, बल्कि झुककर रह गया।

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