टेक्निकल मुख्यमंत्री फडणवीस की नई टेक्नीक,उद्धव और राज ठाकरे के साथ मंच साझा

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी इन दिनों पॉलिटिकल मुख्यमंत्री से ज्यादा टेक्निकल मुख्यमंत्री बन गए हैं। आप सोच रहे होंगे की मुख्यमंत्री का पद तो पॉलीटिकल पद है और फिर देवेंद्र फडणवीस जी तो एक राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बीजेपी का सदस्य हैं,इन्होंने चुनाव जीता है,बहुमत प्राप्त किया है और तब जाकर मुख्यमंत्री बने हैं,तो फिर ये टेक्निकल मुख्यमंत्री कैसे बन गए? पॉलिटिकल साइंस के अनुसार मुख्यमंत्री का पद अभी भी पॉलिटिकल ही होता है,टेक्निकल नहीं और उस संदर्भ में देवेंद्र फडणवीस जी पॉलिटिकल मुख्यमंत्री ही हैं, लेकिन हाल के दिनों में जब उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के द्वारा दिशा सालियान मामले की जांच का मामला मुंबई पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया,तब इन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इस मामले को टेक्निकल मामला बताया था। तब बहुत सारे लोगों ने इन्हें ट्रोल करते हुए टेक्निकल मुख्यमंत्री बताया था। उस संदर्भ में ही इन्हें टेक्निकल मुख्यमंत्री कहा जाने लगा है।

अब इस टेक्निकल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी का नया टेक्निक देखिये, जिसे उन्होंने 29 अक्टूबर को दिखाया है। इन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना यूपीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ मंच साझा किया। राज ठाकरे की राजनीतिक स्थिति को आप देखेंगे तो आप पाएंगे कि इसका तो महाराष्ट्र तक में नामोनिशान मिट गया है। उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्थिति को आप देखेंगे तो इसके नामोनिशान तो आपको महाराष्ट्र में मिल जाएगा लेकिन यह भी लगातार क्षय की स्थिति में जाता हुआ ही आपको नजर आएगा। ऊपर से दिशा सालियान मामले में उनके पुत्र आदित्य ठाकरे ही नहीं, खुद उद्धव ठाकरे भी सीबीआई में नामित आरोपी हैं। अगर सीबीआई ने इस आरोप को सत्य प्रमाणित कर दिया तो फिर पिता पुत्र के इस जोड़ी उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे को सिर्फ जेल ही नहीं जाना पड़ेगा बल्कि इस मामले में उम्र कैद और फांसी तक की सजा हो सकती है।

अब अगर देवेंद्र फडणवीस जी की खुद की स्थिति की बात कर ली जाए तो उनकी स्थिति भी कुछ बहुत अच्छी नहीं कहीं जा सकती है।अक्सर सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चा होती रहती है कि देवेंद्र फडणवीस जी की मुख्यमंत्री की कुर्सी कभी भी इनसे छीन कर एकनाथ शिंदे जी को सौंपा जा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे की दिशा सालियान का मामला मुंबई पुलिस से छीनकर सीबीआई को सौंप दिया गया।

लिहाजा इन लोगों को अब यह लगने लगा कि अगर खुद की स्थिति को ठीक करना है तो कोई ना कोई नया टेक्निक लेकर तो आना ही पड़ेगा। उद्धव ठाकरे जी अब ना तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं और ना ही केंद्र की सरकार में साझेदार, ऐसे में अगर दिशा सालियान मामले में सीबीआई पर अपने पक्ष में काम करने के लिए दबाव बनाना है तो फिर उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की शरण में आना ही था। देवेंद्र फडणवीस जी खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं और केंद्र की एनडीए सरकार में भी प्रमुख पार्टी बीजेपी के बड़े नेता है, जो केंद्र सरकार के गृह मंत्री या प्रधानमंत्री पर उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे को दिशा सालियान मामले में बचाने के लिए सीबीआई पर दबाव बनाने की बात कर सकते हैं।एकनाथ शिंदे देवेंद्र फडणवीस से मुख्यमंत्री की कुर्सी ना छीन ले, इसके लिए अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए देवेंद्र फडणवीस जी को भी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की शक्ति की जरूरत थी।

फिर क्या था जब सभी की अपनी अपनी चाहत थी तो देवेंद्र फडणवीस जी ने अपना टेक्निक यहां लगा दिया और सांस्कृतिक मंच साझा करने की बात कहकर एक मंच साझा कर लिया और अंदर ही अंदर एक कमरे में जाकर अपनी अपनी स्थिति सुधारने के लिए गुप्त राजनीतिक चर्चा भी कर ली । हालांकि बंद कमरे में इनके बीच हुई बातचीत को सार्वजनिक नहीं किया गया और फिर मंच पर आकर ये एक दूसरे के विरुद्ध चुटकियां भी लेने लगे।

इस रूप में टेक्निकल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी ने अपना टेक्निक तो लगा लिया,लेकिन अब यह टेक्निक देवेंद्र फडणवीस जी को एकनाथ शिंदे से बचाकर कितने दिनों तक महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाए रखने में सफल होता है और उद्धव ठाकरे तथा आदित्य ठाकरे को बचाने के लिए कि कब तक सीबीआई पर दबाव बना पाता है, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा,लेकिन फिलहाल एक चीज तो देखने में आ रही है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार जिस दिशा सालियान का मामला मुंबई पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपा गया है और जिसमें उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे आदि नामित आरोपी बनाए गए हैं, उस मामले को सीबीआई के हाथ में आए हुए 58 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक सीबीआई ने इस मामले में उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे परमवीर सिंह या अन्य किसी भी नामित आरोपी से कस्टोडियन इंक्वारी तक नहीं की है।

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