वैशाली बनेगी विश्व के बौद्ध धर्म का केंद्र, 3 दिन तक जुटेंगे विदेशी भिक्षु और धर्मगुरु

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पटना: बिहार की ऐतिहासिक नगरी वैशाली में दिसंबर 2026 में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। 11 से 13 दिसंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षु, धर्मगुरु, विद्वान और सांस्कृतिक दल शामिल होंगे। आयोजन वैशाली स्थित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप परिसर में होगा।

बिहार सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से 8 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सम्मेलन की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय बैठक हुई। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों और वैशाली की जिलाधिकारी ने हिस्सा लिया।

म्यांमार, थाईलैंड और जापान समेत कई देशों की भागीदारी

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध धर्म और संस्कृति से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, जापान और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों के बौद्ध भिक्षुओं, धर्मगुरुओं और 14 अंतरराष्ट्रीय विद्वानों की सहमति मिल चुकी है।

इस आयोजन का उद्देश्य बौद्ध विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक संबंधों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा देना है। इससे वैशाली को वैश्विक बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

मेहमानों के लिए बनेगी आधुनिक टेंट सिटी

देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वैशाली में आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी तैयार की जा रही है। इसके साथ ही पटना एयरपोर्ट और पटना जंक्शन पर चौबीसों घंटे सहायता डेस्क स्थापित करने की योजना है, ताकि बाहर से आने वाले मेहमानों को यात्रा और आवागमन में परेशानी न हो।

मुख्य सचिव और विकास आयुक्त ने आयोजन स्थल तक पहुंचने वाली सड़कों की मरम्मत, निर्बाध बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत के मुताबिक मेडिकल टीमों की तैनाती भी की जाएगी।

तीन दिनों तक धर्म, संस्कृति और विरासत का संगम

सम्मेलन के दौरान कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें त्रिपिटक पाठ, बौद्ध विरासत पर चर्चा, हेरिटेज वॉक और अंतरराष्ट्रीय एवं बिहार के प्रसिद्ध कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल हैं। इसके अलावा बिहार के हस्तशिल्प और स्थानीय कला को प्रदर्शित करने के लिए बड़ी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

इन गतिविधियों के जरिए बिहार की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक शिल्प को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी है।

वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर बिहार को मिलेगी नई पहचान

बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन बिहार को वैश्विक पर्यटन और बौद्ध आध्यात्मिकता के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का अवसर है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि तैयारियां तय समयसीमा में पूरी की जाएं।

वैशाली को भगवान बुद्ध और प्राचीन बौद्ध परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ऐसे में इस सम्मेलन से राज्य के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार की विरासत को सामने लाने की उम्मीद है।

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