Rooppur Nuclear Power Plant: बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए रूस से आने वाले परमाणु ईंधन की एक खेप तय समय पर नहीं पहुंच सकी। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, 24 सितंबर को यूरेनियम लेकर कार्गो विमान को ढाका पहुंचना था, लेकिन उड़ान को जरूरी एयरस्पेस क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के एयरस्पेस की मंजूरी नहीं मिलने की वजह से यह देरी हुई, हालांकि इसकी सटीक वजह अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम ने बताया कि रूस ने अब डिलीवरी का नया कार्यक्रम बनाया है। ताजा जानकारी के अनुसार परमाणु ईंधन की आपूर्ति अक्टूबर से शुरू होगी और दिसंबर तक कई उड़ानों के जरिए पूरी की जानी है।
बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट पर खेप के स्वागत की तैयारियां पूरी थीं। रोसाटॉम के संपर्क अधिकारी से जानकारी मिलने के बाद पता चला कि उड़ान के लिए जरूरी एयरस्पेस मंजूरी उपलब्ध नहीं थी। पाकिस्तान की ओर से इस मामले में कहा गया है कि ओवरफ्लाइट मंजूरियां तय प्रक्रियाओं और विमानन नियमों के तहत देखी जाती हैं तथा मामले को तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
रूस की मदद से बन रहा है 2400 MW का प्लांट
रूपपुर बांग्लादेश का पहला परमाणु बिजली संयंत्र है। पाबना जिले के ईश्वरदी में पद्मा नदी के किनारे बन रहे इस प्रोजेक्ट में रूस की सरकारी कंपनी Rosatom तकनीकी सहायता दे रही है। यहां दो VVER-1200 रिएक्टर लगाए जा रहे हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता करीब 2,400 मेगावाट है।
इससे पहले रूपपुर की पहली यूनिट के लिए कम-संवर्धित यूरेनियम ईंधन की पहली खेप अक्टूबर 2023 में बांग्लादेश पहुंची थी। इसमें 164 नई फ्यूल असेंबली थीं, जिन्हें रूस से ढाका लाकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विशेष कंटेनरों में प्लांट तक पहुंचाया गया था।

