अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दो भारतवंशी महिलाएं आमने सामने,क्या अमेरिका को मिलेगा कोई महिला राष्ट्रपति?

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अखिलेश अखिल
अगले साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं जिसकी प्रक्रिया इंटर पार्टी चुनाव के जरिए इसी साल के मई महीने से शुरू हो जाएगी। भारतीय मूल की दो पावरफुल महिलाएं इस चुनाव में उतरते को तैयार है। एक है कमला हैरिस जो मौजूदा सरकार में उपराष्ट्रपति है लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति बाइडेन की घोर आलोचक भी। डेमोक्रेट पार्टी से आने वाले राष्ट्रपति बाइडेन के कई फैसलों से अमेरिकी समाज में इनकी विश्वसनीयता में काफी कमी आई है और अधिकतर लोग इन्हें पसंद नही कर रहे। अमेरिकी समाज यह भी कह रहा है कि बाइडेन को अगला चुनाव नही लड़ना चाहिए लेकिन अभी भी बाइडेन चुनाव लडने तो तैयार हैं।

उधर तमिलनाडु मूल की रहने वाली कमला हैरिस अपनी जी पार्टी के भीतर बाइडेन को चुनौती देने को तैयार है। उन्होंने घोषणा कर दी है कि वह अगला चुनाव लड़ेंगी। कमला हैरिस के बारे में जो जानकारी मिलती है उसके मुताबिक कमला हैरिस हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी और हेस्टिंग्स कॉलेज ऑफ लॉ से ग्रैजुएट हैं। 2010 से 2014 के बीच वह 2 बार कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल रहीं। 2017 से 2021 तक वह अमेरिकी सीनेटर रहीं। 20 जनवरी 2021 को वह अमेरिका की 49वीं उपराष्ट्रपति बनी थीं।

बता दें कि 57 वर्षीय हैरिस की जड़ें भारत के तमिलनाडु राज्य से जुड़ी हैं। उनकी मां श्यामला गोपालन का जन्म तमिलनाडु में हुआ था। श्यामला एक ब्रेस्ट कैंसर रिसर्चर थीं, जो बाद में तमिलनाडु से जाकर अमेरिका में बस गई थीं। कमला के पिता जमैका-अमेरिका मूल के डोनाल्ड जे हैरिस थे। श्यामला और डोनाल्ड की शादी 1963 में हुई थी। 1964 में कमला हैरिस का और 1966 में उनकी बहन माया का जन्म हुआ था। 1970 में पिता डोनाल्ड से तलाक के बाद मां श्यामला ने ही कमला और उनकी बहन माया की अकेले परवरिश की। कमला ने 2014 में अमेरिकी वकील डौग एम्होफ से शादी की थी। इनके दो बच्चे है एक बेटा और एक बेटी ।

उधर, निक्की हेली भी चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं। निक्की हेली रिपब्लिकन पार्टी से आती है और कभी वो ट्रंप की बड़ी सहयोगी भी रही ।ट्रंप जब राष्ट्रपति थे तब इन्होंने निक्की हेली को यूएन का एंबेसडर भी नियुक्त किया था लेकिन कुछ समय बाद ट्रंप से मनमुटाव होने के बाद निक्की ने इस्तीफा दे दिया ।निक्की आज भी रिपब्लिकन की चेहरा है लेकिन ट्रंप विरोधी भी ।उधर ट्रंप भी अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव लडने को तैयार है।ऐसे में निक्की को भी पार्टी के भीतर होने वाले इंटर चुनाव में जीत हासिल करनी होगी। अगर निक्की को जीत मिलती है तो वह राष्ट्रपति उम्मीदवार होंगी। और ऐसा हुआ तो दो भारतवंशी स्मेटिकन के बीच मुकाबला होगा और फिर अमेरिका को पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति मिलेगा।

निक्की अमेरिका की राजनीति में मजी हुई नेता हैं।निक्की को पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का करीबी माना जाता है। हिलेरी ही उन्हें सियासत में लाई थीं। राजनीति में आने से पहले निक्की कॉर्पोरेट वर्ल्ड में नाम कमा चुकी थीं। परिवार की कंपनियां चलाने के बाद 1998 में ओरेंजबर्ग काउंटी चेंबर ऑफ कॉमर्स के निदेशक मंडल में शामिल हुईं। 2004 में नेशनल एसोसिएशन ऑफ वुमेन बिजनेस ऑनर की अध्यक्ष बनीं। सामाजिक कार्यों में शामिल होने लगीं। इसी से राजनीति में आने का रास्ता बना।

2004 में निक्की साउथ कैरोलिना की स्टेट रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर चुनी गईं। 2006 के चुनाव में उन्हें निर्विरोध जीत हासिल हुई। 2008 में तीसरी बार निक्की ने ये पद संभाला। निक्की 2010 और 2014 में साउथ कैरोलिना की गवर्नर भी बनीं। अमेरिका में सबसे युवा गवर्नर बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।

51 साल की निक्की ट्रम्प की धुर विरोधी रही हैं और ट्रम्प की पॉपुलैरिटी कम होने के बीच तेज तर्रार नेता के तौर पर बहुत तेजी से उभरी हैं। चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा- मैं इंडियन अमेरिकन बेटी हूं। मैं न श्वेत हूं, न अश्वेत। यह वक्त नेतृत्व की नई पीढ़ी का है। निक्की ने अपनी स्पीच में कहा कि चीन और रूस मौके की तलाश में हैं। वे सोचते हैं कि हमें धमकाया जा सकता है, लेकिन यह उनका भ्रम है। हमें अपनी इकोनॉमी को दुरुस्त करना है, बॉर्डर सिक्योर करने हैं और इस देश को पहले से ज्यादा मजबूत बनाना है।

निक्की हेली का परिवार पंजाब अमृतसर का रहने वाला है। यूएन में राजदूत और दक्षिण कैरोलिना की गवर्नर रह चुकीं निक्की अमेरिका में ही 1972 में जन्मीं थीं। उनका असली नाम नम्रता निक्की रंधावा है। पिता अजीत सिंह रंधावा पत्नी राज कौर के साथ 1960s में पीएचडी करने के लिए अमृतसर से अमेरिका जाकर बस गए थे। निक्की के दो भाई मिट्‌ठी और सिमी और एक बहन सिमरन है।

अब एक आंकड़ा पार नजर डालिए। बाइडेन को 67%, ट्रम्प को 57% अमेरिकी लोग फिर राष्ट्रपति नहीं चाहते।

निक्की हेली और कमला हैरिस के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना इसलिए भी जताई जा रही है, क्योंकि आधे से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों को ट्रम्प और बाइडेन दोनों पसंद नहीं हैं। पिछले साल अगस्त-सितंबर में हार्वर्ड सीएपीए-हैरिस सर्वे में 67% लोगों ने कहा है कि बाइडेन को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। 33% ने उन्हें खराब राष्ट्रपति बताया।

ऐसे में अगर दो महिलाएं आमने सामने आएंगी और जिनकी जड़े भारत की रही जो तो मुकाबला काफी रोचक होगा। देखना ये है कि दो भारतवंशी महिलाओ की इस लड़ाई में अमेरिका का राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य किसी मिलता है ।

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