Saudi Oil India: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े जोखिम के बीच एशियाई देशों के सामने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसी बीच सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए करीब 10 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बिक्री की है। कारोबार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर और नवंबर में इसकी डिलीवरी की जानी है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की रिफाइनरियां इसके प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं।
एक हफ्ते में हुआ बड़ा तेल सौदा
रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब की इस बिक्री का आकार करीब एक दिन की वैश्विक तेल खपत के बराबर है। हालिया समय में होर्मुज के रास्ते एशिया जाने वाले सऊदी तेल के मुकाबले यह मात्रा दोगुने से भी ज्यादा हो सकती है। इससे एशियाई रिफाइनरियों को कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है।
होर्मुज के रास्ते क्यों भेजा जा रहा तेल?
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फारस की खाड़ी से तेल को लाल सागर तक पहुंचाकर होर्मुज को बायपास करने का विकल्प देती है। लेकिन 10 सितंबर को हुए हमले के बाद यह पाइपलाइन अभी पूरी क्षमता से चालू नहीं हुई है। ऐसे में सऊदी तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा फिर से होर्मुज के रास्ते भेजना पड़ रहा है।
खरीदारों का जोखिम भी उठा रहा सऊदी पक्ष
इस सौदे की एक खास बात यह है कि ट्रेडर्स के मुताबिक सऊदी अरामको एशियाई ग्राहकों तक तेल पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स और समुद्री परिवहन संभालने की पेशकश कर रहा है। संघर्ष के कारण कई एशियाई रिफाइनरियां अपने जहाजों को जोखिम वाले रास्ते पर भेजने से बच रही थीं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। पश्चिम एशिया में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में अतिरिक्त सऊदी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपलब्धता बढ़ा सकता है। हालांकि युद्ध, शिपिंग जोखिम और ऊंची माल ढुलाई लागत के कारण वैश्विक तेल बाजार पर दबाव अभी बना हुआ है।

