Disha Salian Case: दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI की नई FIR के बाद एक बार फिर सुशांत सिंह राजपूत केस को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच सुशांत के चचेरे भाई पन्ना सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में दावा किया कि सुशांत के पास कुछ अहम जानकारी और सबूत थे और वह जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उन्हें सार्वजनिक करने की बात कह रहे थे। पन्ना सिंह ने दोनों मामलों के बीच संभावित संबंध की जांच की मांग की है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने सितंबर 2026 में दिशा सालियान की मौत की जांच के सिलसिले में FIR दर्ज की है। FIR में कई लोगों की भूमिका की जांच की बात कही गई है, लेकिन किसी व्यक्ति को आरोपी ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने भी कहा है कि पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए।
पन्ना सिंह ने क्या दावा किया?
दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में पन्ना सिंह ने कहा कि सुशांत 2019 में पूर्णिया आया था। उनके मुताबिक, उस दौरान सुशांत ने किसी महत्वपूर्ण बात की ओर संकेत किया था और बाद में विस्तार से बताने की बात कही थी। पन्ना सिंह का दावा है कि सुशांत किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कुछ जानकारी सामने लाने की तैयारी में था।
उन्होंने यह भी कहा कि परिवार लंबे समय से दिशा और सुशांत की मौत के बीच संभावित कनेक्शन की जांच की मांग करता रहा है। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच एजेंसी की ओर से नहीं की गई है।
आदित्य ठाकरे को लेकर भी लगाए आरोप
पन्ना सिंह ने बातचीत में आदित्य ठाकरे की भूमिका की जांच किए जाने की मांग की और कुछ आरोप लगाए। दूसरी ओर, CBI की FIR में आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों के नाम उनकी कथित भूमिका की जांच के संदर्भ में सामने आए हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें आरोपी या दोषी घोषित कर दिया गया है। आदित्य ठाकरे ने इन आरोपों को खारिज किया है और निष्पक्ष जांच की बात कही है।
सुशांत और दिशा की मौत के बीच क्यों जोड़ा जाता है मामला?
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में हुई थी, जबकि सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को हुई। दोनों घटनाओं के बीच कुछ ही दिनों का अंतर होने के कारण लंबे समय से इनके संभावित संबंध को लेकर दावे और अटकलें लगती रही हैं। हालांकि पहले की जांच में दोनों मामलों के बीच आपराधिक संबंध स्थापित करने वाला पर्याप्त सबूत सामने नहीं आया था।
अब CBI दिशा मामले में पुराने रिकॉर्ड, फोरेंसिक सामग्री, पुलिस जांच और संबंधित लोगों के बयान की दोबारा पड़ताल करेगी। जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि सामने आए आरोपों और दावों में कितनी सच्चाई है।

