कैंसर इलाज में आया बड़ा बदलाव, AI और जीन टेस्टिंग से मिल रही नई उम्मीद

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हमारे देश में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच इलाज और जांच के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।अब कैंसर के उपचार में सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय जीन आधारित जांच, प्रिसीजन मेडिसिन, इम्यूनोथेरेपी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों की मदद से मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार ज्यादा सटीक और प्रभावी इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है।

पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की मेडिकल ऑन्कोलॉजी चेयरमैन डॉ. मीनू वालिया का कहना है कि कैंसर ट्रीटमेंट के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है।उनका कहना है कि जीन और मॉलिक्यूलर टेस्ट, इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी ने डॉक्टरों को मरीज की बीमारी की नेचर समझने और उसी के अनुरूप उपचार चुनने का बेहतर अवसर दिया है।

डॉ. वालिया बताती हैं कि पहले कैंसर के कई मरीजों को लगभग एक जैसी ट्रीटमेंट प्लानिंग दी जाती थी, लेकिन अब पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट का दौर है। इससे ट्रीटमेंट के परिणाम बेहतर होने के साथ-साथ अनावश्यक दवाओं और दुष्प्रभावों को भी कम किया जा सकता है।

डॉक्टर कहती हैं कि कैंसर चाहे किसी भी प्रकार का हो, उसकी शुरुआती पहचान मरीज की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर जैसे कई कैंसरों में समय रहते स्क्रीनिंग और जांच कराने से बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ सकती है।
डॉ. वालिया कहती हैं कि आधुनिक उपचार के बावजूद कैंसर की रोकथाम, जागरूकता और शुरुआती जांच पर उतना ही ध्यान देना जरूरी है जितना इलाज पर दिया जाता है। यदि बीमारी शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए तो इलाज की सफलता दर काफी बढ़ जाती है।

डॉक्टर का कहना है कैंसर एक्सपर्ट्स के बीच प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी को भविष्य की दिशा माना जा रहा है। इसमें जीन और मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग के आधार पर यह तय किया जाता है कि मरीज को कौन-सी दवा सबसे अधिक फायदा पहुंचा सकती है।
एडवांस्ड ट्यूमर जेनेटिक टेस्टिंग, नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) और लिक्विड बायोप्सी जैसी तकनीकें कैंसर की पहचान और उपचार चयन को अधिक सटीक बना रही हैं। कई मामलों में रक्त जांच के जरिए कैंसर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है।
कैंसर उपचार में इम्यूनोथेरेपी ने नई संभावनाएं पैदा की हैं। यह तकनीक शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ अधिक प्रभावी तरीके से लड़ने में मदद करती है।

इसके अलावा CAR-T सेल थेरेपी जैसी उन्नत तकनीकें भी चर्चा में हैं। इसमें मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को विशेष रूप से तैयार कर कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए सक्षम बनाया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग भी कैंसर देखभाल में लगातार बढ़ रहा है।AI की मदद से मेडिकल इमेजिंग, स्क्रीनिंग और कुछ कैंसरों की शुरुआती पहचान को अधिक तेज और सटीक बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI डॉक्टरों के लिए एक सहयोगी उपकरण के रूप में काम करेगा, जिससे मरीजों को समय पर और बेहतर उपचार योजना मिल सकेगी।

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