फल और सलाद खाने के बाद भी रहता है भयंकर कब्ज , जानें पेट साफ न होने के कारण

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हममें से ज्यादातर लोग यही मानकर चलते हैं कि अगर पेट ठीक से साफ नहीं हो रहा है, तो बस खाने में फाइबर बढ़ा दो।खीरा, अमरूद, पपीता, हरी सब्जियां और सलाद की प्लेटें खाली होने लगती हैं। लेकिन क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि दिनभर फल, कच्ची सब्जियां और फाइबर की चीजें खाने के बावजूद सुबह टॉयलेट में घंटों बैठना पड़ता है। पेट भारी रहता है, गैस के मारे बेचैनी होती है और लगता है जैसे पेट कभी पूरी तरह खाली ही नहीं हुआ।

यशोदा मेडिसिटी के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. वी. एस. गौरव नारायण बताते हैं कि कब्ज सिर्फ खाने-पीने की कमी से जुड़ी समस्या नहीं है। पूरी दुनिया में हाल ही में 44 देशों के करीब 4.5 लाख से ज्यादा लोगों पर हुए एक बड़े अध्ययन में यह बात सामने आई है कि लगभग 12 फीसदी लोग क्रोनिक कब्ज से परेशान हैं। इसका मतलब यह है कि अगर फाइबर खाने के बाद भी आपका पेट साफ नहीं हो रहा, तो शरीर के अंदर कोई और पेंच फंसा हुआ है। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों सिर्फ फाइबर बढ़ाना इस समस्या का हल नहीं है?

फाइबर दो तरह का होता है। एक वो जो पानी में घुल जाता है यानी घुलनशील फाइबर, और दूसरा वो जो पानी नहीं सोखता बल्कि केवल मल की मात्रा को बढ़ाता है।

अगर आप अचानक से बहुत ज्यादा कच्चा सलाद, चोकर वाली रोटियां या हरी पत्तेदार सब्जियां खाने लगेंगे, तो पेट साफ होने के बजाय पेट फूलने और अफारे की दिक्कत बढ़ जाएगी.
इसबगोल (साइलियम हस्क) जैसी चीजें पुराने कब्ज में बहुत फायदेमंद साबित होती हैं क्योंकि यह आंतों में नमी बनाए रखती हैं।
सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि फाइबर तो खूब खाते हैं लेकिन पानी कम पीते हैं। अगर शरीर में पानी की कमी होगी, तो बड़ी आंत खाने में से सारा पानी सोख लेगी और मल पत्थर जैसा कड़ा हो जाएगा।
हमारी आंतें खाने और पचे हुए भोजन को आगे धकेलने के लिए एक खास गति से काम करती हैं। इसे मेडिकल भाषा में स्लो ट्रांजिट कहते हैं।

जब किसी व्यक्ति की बड़ी आंत बहुत सुस्त हो जाती है, तो पेट का मल मलाशय की तरफ बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है। ज्यादा देर तक आंत में पड़े रहने की वजह से आंतें उसका सारा पानी सोख लेती हैं।ऐसे में इंसान चाहे जितनी फाइबर वाली चीजें खा ले, उसे रोज सुबह बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ता है और पेट हल्का महसूस ही नहीं होता।यहां समस्या खाने में नहीं, बल्कि आंतों की चाल सुस्त पड़ने में होती है।
मल त्यागने के लिए हमारे पेट के निचले हिस्से यानी पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों का ढीला होना बहुत जरूरी होता है।

सामान्य स्थिति में जब हम जोर लगाते हैं, तो नीचे की मांसपेशियां अपने आप ढीली हो जाती हैं ताकि रास्ता खुल सके।
लेकिन कई लोगों में यह तालमेल उल्टा हो जाता है।जोर लगाते समय मांसपेशियां रिलैक्स होने के बजाय और ज्यादा सिकुड़ जाती हैं।मल बिल्कुल बाहर निकलने की जगह पर आकर अटक जाता है।बार-बार टॉयलेट जाने का मन करता है लेकिन पेट पूरी तरह साफ नहीं होता।इस परेशानी में सिर्फ फल या फाइबर खाने से कोई फायदा नहीं मिलने वाला।

कई लोगों का पेट बहुत नाजुक और संवेदनशील होता है. इसे इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS-C) कहा जाता है।ऐसे मरीजों के पेट में कुछ खास तरह के कार्बोहाइड्रेट्स (FODMAPs) जाते ही भयंकर गैस, मरोड़ और दर्द शुरू हो जाता है। उनके लिए हर तरह का फल या कच्ची सब्जी फायदेमंद नहीं होती।कुछ लोगों को सेब या गोभी खाने से कब्ज और गैस की शिकायत उल्टी बढ़ जाती है। इसलिए हर किसी के लिए एक जैसी डाइट काम नहीं करती।

हम रोजमर्रा की जिंदगी में जो दवाएं खाते हैं, वे भी पेट की हालत बिगाड़ सकती हैं।खून की कमी दूर करने के लिए ली जाने वाली आयरन की गोलियां,तेज दर्द मिटाने वाली कुछ दवाइयां और गैस के लिए बार-बार ली जाने वाली एंटासिड,
अगर किसी को थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म), डायबिटीज या नसों से जुड़ी कोई पुरानी परेशानी है, तो भी आंतें सुस्त पड़ जाती हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे मामलों में केवल फाइबर के भरोसे नहीं बैठा जा सकता। मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार पॉलीइथाइलीन ग्लाइकोल (PEG) जैसी सुरक्षित दवाएं या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई खास टैबलेट्स आंतों को दोबारा चालू करने के लिए जरूरी हो जाती हैं।
अगर मल में खून दिखाई दे या उसका रंग एकदम काला आने लगे,बिना किसी कारण के शरीर का वजन तेजी से घटने लगे,शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो जाए,बार-बार उल्टियां आएं या पेट में असहनीय दर्द उठने लगे तो सलाद की प्लेट छोड़कर तुरंत किसी अच्छे पेट के डॉक्टर (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) से मिलना चाहिए।सही समय पर जांच कराकर यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि कब्ज की असली जड़ क्या है।

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