बिहार में अब होगा Global Research का धमाका! स्विस संस्था ने बढ़ाया हाथ, CM सम्राट चौधरी ने दिया बड़ा न्योता

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पटना: बिहार में सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध और अकादमिक गतिविधियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा मिलने की उम्मीद है। स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) ने बिहार में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के साथ सहयोग की इच्छा जताई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए वैश्विक संस्थाओं को बिहार के विकास में साझेदार बनने का आमंत्रण दिया है।

मुख्यमंत्री से शुक्रवार को पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प में SNSF के पूर्व प्रतिनिधि प्रोफेसर मैक्स बर्गमैन और डॉ. जीनेथ बर्गमैन तथा ICSSR के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह और विधान पार्षद नीरज कुमार ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान बिहार में शोध, शिक्षा और अकादमिक गतिविधियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

बिहार में रिसर्च कल्चर मजबूत करने की तैयारी

बैठक के दौरान SNSF और ICSSR के प्रतिनिधियों ने बिहार में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान को बढ़ावा देने, अकादमिक आदान-प्रदान बढ़ाने और नई शोध गतिविधियों के अवसर विकसित करने में सहयोग की इच्छा जाहिर की।

दोनों संस्थाओं की ओर से राज्य में शोध का बेहतर माहौल तैयार करने और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने में रुचि दिखाई गई। इससे बिहार के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अकादमिक नेटवर्क से जुड़ने के नए अवसर मिल सकते हैं।

Digital Governance और AI पर भी काम कर रही SNSF

स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन पहले से ही भारत में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ICSSR के साथ सहयोग कर रही है। इनमें डिजिटल गवर्नेंस, स्पेस साइंस, आपदा प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

ऐसे में बिहार में सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रस्तावित सहयोग को राज्य की शोध व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामाजिक विज्ञान और विज्ञान एवं तकनीक के अलग-अलग क्षेत्रों को साथ लाने से नए शोध मॉडल और समाधान विकसित होने की संभावना है।

CM बोले- नीति निर्माण में रिसर्च की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज के दौर में सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान की जरूरत लगातार बढ़ रही है। सामाजिक विज्ञान के अध्ययन से समाज की वास्तविक जरूरतों और समस्याओं को समझने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि मजबूत शोध के आधार पर जनकल्याणकारी योजनाओं को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है और नीति निर्माण को ठोस आधार मिल सकता है।

वैश्विक संस्थाओं को बिहार आने का न्योता

मुख्यमंत्री ने SNSF और ICSSR के सहयोग प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार में शैक्षणिक विकास, कौशल निर्माण और शोध संस्कृति को मजबूत करने में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विश्वविद्यालयों की भागीदारी अहम हो सकती है।

उन्होंने दोनों संस्थाओं को बिहार में शोध एवं अकादमिक गतिविधियों का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि वैश्विक सहयोग के माध्यम से बिहार में शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं का सहयोग मिलने से बिहार में पहले से चल रहे शैक्षणिक एवं शोध प्रयासों के परिणाम और बेहतर हो सकते हैं। इससे बिहार की पहचान एक बार फिर ज्ञान, शोध और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूत करने में मदद मिलेगी।

विकसित भारत और समृद्ध बिहार पर फोकस

राज्य सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य बिहार की शिक्षा और अनुसंधान व्यवस्था को वैश्विक स्तर से जोड़ना है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी बढ़ने से शोधार्थियों और शिक्षण संस्थानों को नई तकनीक, विशेषज्ञता और अकादमिक सहयोग के अवसर मिल सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने वैश्विक संस्थाओं को बिहार के विकास में साझेदार बनने का आह्वान करते हुए विकसित भारत और समृद्ध बिहार के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

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