शी के आने से पहले मोदी-पुतिन की मुलाकात में महा डील, तेल से आगे ‘ब्रह्मास्त्र’ पर बात

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भारत और रूस के बीच की दोस्ती तब से चली आ रही है जबकि भारत तो भारत था, लेकिन रूस यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ सोवियत रिपब्लिकन के नाम से जाना जाता था। तब से लेकर अब तक दोनों देशों की दोस्ती में कभी कोई रुकावट नहीं आई बल्कि उत्तरोत्तर इसमें प्रगाढ़ता ही आती है। भारत-रूस की दोस्ती और मोदी-पुतिन की ये केमिस्ट्री कई बार ग्लोबल मंच पर भी जबरदस्त रुप से देखने में आयी है

ब्रिक्स समिट 2026 में हिस्सा लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली आ चुके हैं।ब्रिक्स समिट से पहले दोनों नेताओं के बीच मुलाकात होने वाली है।इस मुलाकात में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, जिस पर सिर्फ भारत और रूस की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजर टिकी है।

बिश्केक में SCO समिट 2026 के 15 दिन बाद मोदी-पुतिन दूसरी बार मिल रहे हैं। 9 महीने में दूसरी बार वो भारत दौरे पर हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पुतिन पश्चिमी देशों का प्रतिबंध झेल रहे हैं। रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। इन सब तनावों के बीच दोनों नेताओं की ये मुलाकात खास होने वाली है।दोनों देश इस कारोबारी रिश्तें तो तेल और डिफेंस से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर सकते हैं

भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।80-85% जरूरत आयात से पूरी होती है,जिसमें रूसी तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 45% के करीब पहुंच चुकी है। होर्मुज बंद था, खाड़ी युद्ध की टेंशन और अमेरिका की निगरानी के बावजूद रूस ने भारत में तेल की कमी नहीं होने दी।ये रिश्ता सिर्फ एक खरीदार और विक्रेता का नहीं है।भारत की सरकारी कंपनी ONGC की रूस के सखालिन-1 तेल प्रोजेक्ट में 20% हिस्सेदारी है।भारत की तेल कंपनियों ने रूस के वैंकोरनेफ्ट और तास-यूर्याख जैसी कंपनियों में इन्वेस्ट किया है। वहीं रूस की रोसनेफ्ट , नायरा एनर्जी भारत में तेल का नेटवर्क चलाती है।रूस-भारत के बीच तेल और डिफेंस के पुराने रिश्ते अब आगे बढ़ाकर एविएशन, न्यूक्लियर, मिनिरल्स, इन्वेस्टमेंट जैसे सेक्टर्स की ओर बढ़ रहा है

भारत-रूस में अब तक लड़ाकू विमानों को लेकर डील होती थी, पहली बार दोनों देश यात्री विमान को लेकर साझा समझौता कर रहे हैं।गुरुवार 10 सितंबर तो भारत मंडपम में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। भारत की 3 विमान कंपनियों ने रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ 105 यात्री विमान खरीदने का समझौता किया है। रूसी कंपनी UAC भारतीय कंपनियों को SJ-100 विमान स्थानीय स्तर पर बनाने का अधिकार भी दे रही है।

भारत और रूस के बीच FY26 में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर लगभग 59.9 अरब डॉलर का है। जिसमें
रूस से भारत का कुल आयात: 55.4 अरब डॉलर तथा रूस को भारत का कुल निर्यात: 4.5 अरब डॉलर है।इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कच्चे तेल की है।भारत और रूस ने साल 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। भारत का मकसद रूस को किए जाने वाले निर्यात को बढ़ाना है।जिसपर नए विकल्प तलाशे जा सकते हैं। इसके अलावा भारत का फोकस फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, ट्रैक्टर और खाद्य उत्पादों के निर्यात बढ़ाने पर है।सिर्फ आयात-निर्यात बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि इसे आसान बनाने के नए रास्ते तलाशने की कवायत होगी।रूस तक पहुंचने के आसान इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर दोनों देशों के बीच बातचीत हो सकती है।

मोदी और पुतिन के बीच डिफेंस सेक्टर में बड़े डील की संभावना है।दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा को लेकर निम्नलिखित बड़ा समझौता हो सकता है।

1. S-400 की बाकी खेप के साथ-साथ मेंटिनेंस को लेकर समझौता हो सकता है।
2. Su-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड पर डील हो सकती है।
3. Su-57 से S-500 के रक्षा समझौतों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
4. सुपर सुखोई स्कीम के तहत बेहतर रडार और नए हथियार पर बात हो सकती है।
5. ब्रह्मोस को लेकर दोनों देश मिलकर काम करने की तैयारी में हैं।

रूस और भारत के बीच लोकल करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देने पर फोकस होगा।रूस का दावा है कि वह ब्रिक्स के 96 फीसदी देशों के साथ लोकल करेंसी में व्यापार करता है। भारत और रूस लोकल करेंसी में पेमेंट सेटलमेंट सिस्टम को मजबूत करने पर फोकस होगा। दोनों देशों के बीच पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से ही मजबूत हैं। रूस के 22 और भारत के 17 बैंक इस सिस्टम से जुड़े गए हैं. इसे बढ़ाने पर सहमति हो सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत को यूरिया और खाद संकट का सामना करना पड़ा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच खाद निर्यात बढ़ाने को लेकर डील हो सकती है। चालू वित्त वर्ष की पहले छह महीनों में रूस से खाद का आयात 20% बढ़ा है। इसे बढ़ाने पर समझौते की उम्मीद है. वहीं भारत की कोशिश होगी कि वो अपने खाद्य उत्पादों का निर्यात रूस के लिए बढ़ाए।
भारत-पूस के बीच स्पेस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर विचार हो सकता है।रूस पहले से ही भारत के‘गगनयान’ मिशन में सहयोग कर रहा है. दोनों देशों के बीच रॉकेट इंजन, रॉकेट ईंधन , स्पेस सेंटर को विकसित करने पर फोकस बढ़ाया जा सकता है।

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