ठाकरे के वकील का न्यायालय को बरगलाने का प्रयाश विफल,अब नहीं बचेंगे ठाकरे

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दिशा सालियान मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे के वकील ने एक शपथ पत्र दाखिल कर यह दावा किया था कि उन्हें सीबीआई और अन्य एजेंसियों से क्लीन चिट मिल चुकी है, और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है,इस परिस्थिति में मुंबई हाई कोर्ट में ठाकरे के खिलाफ कोई मामला चले यह न्याय संगत नहीं है। ठाकरे की वकील को शायद यह लगा होगा कि इस प्रकार के उल्टे सीधे हलफनामा दाखिल करवे ठाकरे को बचा लेंगे लेकिन अब मामला उलटा पड़ गया।

मुंबई हाई कोर्ट ने ठाकरे के वकील से कहा कि आपने हलफनामा दायर किए हैं तो उसके प्रमाण भी आपके पास होंगे आप एक बार सीबीआई की वकील से इस बारे में पता कर लीजिए की सीबीआई ने कभी भी दिशा सालियान के मामले में जांच की है या नहीं की है। ईश्वर ठाकरे के वकील ने दूसरे कोर्ट में बहस कर रहे हैं सीबीआई के वकील से इस बारे में सवाल किया तो पहले तो वकील ने कुछ इधर-उधर करने का प्रयास किया लेकिन जब उन्हें यह लगा कि मामला अदालत का है तो उन्होंने इस बात की जानकारी अपने दिल्ली स्थित कार्यालय को भेज दिया। दिल्ली स्थित सीबीआई कार्यालय ने गृह मंत्रालय से इस जानकारी को देने को लेकर सलाह मांगा इस पर अमित शाह क्या आमंत्रित वाले गृह मंत्रालय ने सीबीआई से साफ-साफ कह दिया कि आप एक स्वास्थ्य जांच एजेंसी हैं आप जो यथा स्थिति है उसे कोर्ट को बता दें गृह मंत्रालय किसी को बचाने या किसी को फसाने के लिए नहीं बैठा है आप अपने विवेक के अनुसार अपने मंतव्य दें।

इसके बाद सारा मामला ही पलट गया सीबीआई के दिल्ली मुख्यालय से मुंबई की सीबीआई के वकील को यह बता दिया गया कि सीबीआई ने कभी भी किसी भी रूप में दिशा सालियान की मौत से जुड़ा मामले को देखा ही नहीं है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और राज्य सरकार की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि बिना एफआईआर दर्ज किए केवल एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) के तहत इतने सालों तक जांच चलाना सही नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

गौरतलब है कि दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बेटी की मौत को आत्महत्या की बजाय हत्या और उत्पीड़न बताने तथा एफआईआर दर्ज कर नए सिरे से जांच करने की मांग की है।

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