सर्दियों का मौसम आते ही फ्लू और मौसमी बुखार का खतरा बहुत तेजी से बढ़ जाता है।खासकर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए फ्लू कई बार काफी गंभीर रूप ले लेता है।लेकिन अब मेडिकल साइंस की दुनिया से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है।अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA ने मॉडर्ना कंपनी की नई फ्लू वैक्सीन ‘mFLUSIVA’ को अपनी हरी झंडी दे दी है। यह दुनिया की पहली ऐसी फ्लू वैक्सीन है जो mRNA तकनीक पर आधारित है. ठीक उसी तरह जैसे कोरोना काल में मॉडर्ना की कोविड वैक्सीन बनाई गई थी।
यह नई वैक्सीन 50 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को मौसमी फ्लू से बचाने के लिए खास तौर पर तैयार की गई है।इस मंजूरी के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि फ्लू के खिलाफ लड़ाई में डॉक्टरों और आम लोगों को एक बहुत मजबूत हथियार मिल गया है।
मॉडर्ना की इस नई वैक्सीन का वैज्ञानिक नाम mRNA-1010 है, जिसे बाजार में mFLUSIVA के नाम से जाना जाएगा।एफडीए ने इसे 11 देशों में हुए एक बड़े फेज 3 क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों के बाद मंजूरी दी है।इस ट्रायल में 50 साल और उससे ज्यादा उम्र के 40,000 से भी अधिक लोग शामिल हुए थे।
ट्रायल के दौरान आधे लोगों को यह नई mRNA वैक्सीन दी गई, जबकि बाकी आधे लोगों को बाजार में पहले से मौजूद स्टैंडर्ड-डोज वाली फ्लू वैक्सीन लगाई गई।जब आरटी-पीसीआर लैब टेस्ट के जरिए दोनों ग्रुप्स की जांच की गई, तो शोधकर्ताओं ने पाया कि मॉडर्ना की यह नई वैक्सीन पुरानी वैक्सीन के मुकाबले फ्लू के लक्षणों और बीमारी को रोकने में कहीं ज्यादा असरदार साबित हुई है।
इसके अलावा 65 साल और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए इस वैक्सीन को त्वरित मंजूरी (accelerated approval) मिली है। अमेरिका में 2,900 से अधिक बुजुर्गों पर किए गए अध्ययन में देखा गया कि उनके इम्यून सिस्टम ने हाई-डोज फ्लू शॉट के मुकाबले इस वैक्सीन पर बहुत बढ़िया रिस्पांस दिया। मॉडर्ना का कहना है कि यह वैक्सीन 2026-2027 के रेस्पिरेटरी वायरस सीजन तक अमेरिका में आम लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएगी।
अमेरिका की सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention) के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024-2025 के फ्लू सीजन में लगभग 45,000 लोगों की जान सिर्फ फ्लू की वजह से चली गई थी। हालांकि वैक्सीनेशन की वजह से करीब 12,000 लोगों की जान बचाई भी जा सकी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चूंकि mFLUSIVA फ्लू के खतरे को कम करने में पुरानी वैक्सीन से ज्यादा कारगर है, इसलिए यह आने वाले समय में फ्लू से होने वाली मौतों के आंकड़े को काफी नीचे ला सकती है।
मीडिया से खास बातचीत में BLK-Max Hospital, Delhi के Principal Director & HOD-Pulmonology डॉ. संदीप नायर ने बता कि मुताबिक, 50 की उम्र पार करते ही इंसानी शरीर में फ्लू की वजह से गंभीर जटिलताएं होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है। ऐसे में यह नई वैक्सीन हमारे मेडिकल टूल्स में एक बहुत बड़ा इजाफा है।यह इस बात का भी सबूत है कि mRNA तकनीक सिर्फ कोरोना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल दूसरी बीमारियों में भी बखूबी किया जा सकता है।
फ्लू का वायरस बहुत तेजी से अपना रूप (म्यूटेशन) बदलता रहता है. पारंपरिक तरीके से बनने वाली ज्यादातर फ्लू वैक्सीन मुर्गियों के अंडों (egg-based) पर तैयार की जाती हैं। इन्हें बनाने में कम से कम 6 महीने का लंबा वक्त लग जाता है।कई बार ऐसा होता है कि जब तक वैक्सीन बनकर बाजार में आती है, तब तक वायरस का स्ट्रेन बदल चुका होता है और टीका उतना असर नहीं दिखा पाता।
mRNA वैक्सीन को बहुत कम समय में और बहुत तेजी से तैयार किया जा सकता है। अगर वायरस अपना रूप बदलता भी है, तो वैज्ञानिक लैब में इस वैक्सीन के फार्मूले को तुरंत अपडेट कर सकते हैं।
इससे वैक्सीन और वायरस का तालमेल बिगड़ने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाती है।
डॉ. संदीप नायर कहना है कि यह तकनीकी रूप से बहुत बड़ा फायदा है।अगर बदलते स्ट्रेन के हिसाब से हम तेजी से वैक्सीन बना पाते हैं, तो यह भविष्य में आने वाली किसी भी नई महामारी से निपटने के तरीके को पूरी तरह बदल कर रख देगा।
ट्रायल के नतीजों के मुताबिक, 50 से 64 साल के वयस्कों में mFLUSIVA ने स्टैंडर्ड-डोज फ्लू वैक्सीन के मुकाबले फ्लू रोकने में लगभग 27 प्रतिशत ज्यादा प्रभावशीलता (Efficacy) प्रदर्शित करता है।सबसे अच्छी बात यह रही कि पूरे क्लीनिकल प्रोग्राम के दौरान सुरक्षा को लेकर कोई नई या गंभीर चिंता सामने नहीं आई।
किसी भी आम टीके की तरह इस mRNA फ्लू वैक्सीन के भी कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं, जो आमतौर पर हल्के होते हैं और कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। मॉडर्ना के अनुसार ट्रायल में निम्नलिखित सामान्य लक्षण दर्ज किए गए।
सिर में दर्द होना:शरीर में थकान महसूस होना।
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना।
हल्का बुखार या कंपकंपी छूटना।
जी मिचलाना या उल्टी जैसा लगना।
सुई लगने वाली जगह पर हल्का लालपन या दर्द होना।
बहुत ही दुर्लभ मामलों में किसी व्यक्ति को गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (एनाफिलेक्सिस) की शिकायत हो सकती है।
अगर आप यह टीका लगवाने की सोच रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से पहले खुलकर बात करें।खास तौर पर इन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह बहुत जरूरी है:
अगर आपको पहले किसी भी वैक्सीन से कोई गंभीर एलर्जी हुई हो।
अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या आप इम्यून सिस्टम को दबाने वाली दवाएं ले रहे हैं
आपको कभी फ्लू शॉट के बाद गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) हुआ हो।
आप गर्भवती हैं, बच्चे को दूध पिला रही हैं या गर्भधारण की योजना बना रही हैं।
अगर आपको इस वैक्सीन में मौजूद किसी भी तत्व से एलर्जी है, तो इसे बिल्कुल न लगवाएं
डॉक्टरों का साफ कहना है कि mFLUSIVA को पुरानी सभी वैक्सीन के पक्के रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।यह मरीजों और डॉक्टरों के लिए एक नया और बेहतर विकल्प बनकर आई है।

