US-Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से कनाडाई उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए जाने के बाद कनाडा ने भी जवाबी कदम उठाते हुए करीब 20 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान पर नए टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
कनाडा के इस फैसले का असर सिर्फ औद्योगिक उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा। इस्पात, एल्युमीनियम, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि मशीनरी, समुद्री खाद्य, कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन और टॉयलेट पेपर जैसी कई श्रेणियों को भी नए शुल्क के दायरे में शामिल किया गया है। कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ की दर 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
यह घटनाक्रम दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों में शामिल अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंधों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
ट्रंप के टैरिफ के बाद कनाडा का पलटवार
कनाडा का यह कदम अमेरिकी प्रशासन द्वारा सप्ताहांत में कनाडाई वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाए जाने के बाद आया है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में सहमति नहीं बन पाने के बाद अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाने का फैसला किया था।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी रुख पर कड़ी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि बातचीत के दौरान अमेरिका की कुछ मांगें कनाडा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने वाली थीं। कार्नी ने संकेत दिया कि कनाडा अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए अमेरिकी टैरिफ का जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप ने कनाडा को दी और सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस विवाद को शांत करने के बजाय और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कनाडाई नेतृत्व से अमेरिका की शर्तों को स्वीकार करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो मौजूदा शुल्कों से भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
ट्रंप ने कनाडाई वाहनों, ऑटो पार्ट्स और इस्पात पर अतिरिक्त 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की संभावना की भी बात कही है।
इसके अलावा ट्रंप की ओर से ओंटारियो झील का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने को लेकर की गई टिप्पणी ने भी दोनों देशों के बीच विवाद को नया रंग दे दिया है। यह बयान ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड के साथ चल रहे मतभेदों के बीच सामने आया।
8 सितंबर से लागू होंगे कनाडा के नए टैरिफ
कनाडा की ओर से घोषित जवाबी शुल्क 8 सितंबर से लागू किए जाने हैं। अलग-अलग उत्पादों पर 15 प्रतिशत, 25 प्रतिशत और 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाएगा।
कनाडा ने 700 से अधिक अमेरिकी उत्पादों को नए या बढ़े हुए शुल्क के दायरे में रखा है। इनमें लुगदी एवं कागज, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य उत्पाद शामिल हैं।
कुछ उत्पादों पर पहले से लागू 25 प्रतिशत शुल्क को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किए जाने की तैयारी है। जवाबी कार्रवाई का सबसे बड़ा असर इस्पात और एल्युमीनियम क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है।
किन अमेरिकी सामान पर कितना टैरिफ?
कनाडा की नई टैरिफ व्यवस्था में अलग-अलग वस्तुओं के लिए अलग दरें तय की गई हैं।
50 प्रतिशत शुल्क वाले प्रमुख उत्पादों में इस्पात और एल्युमीनियम की कुछ श्रेणियां, फर्नीचर तथा कपड़े शामिल हैं।
वहीं 25 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में घरेलू उपकरण, पनीर सहित कुछ डेयरी उत्पाद, मछली एवं समुद्री खाद्य और इस्पात-एल्युमीनियम से बने कुछ सामान रखे गए हैं। अमेरिकी वाहनों पर कनाडा के पहले से लागू जवाबी शुल्क फिलहाल जारी रहेंगे।
कनाडा बोला- मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं
कनाडाई अधिकारियों ने साफ किया है कि इन जवाबी शुल्कों का उद्देश्य केवल सरकारी राजस्व बढ़ाना नहीं है। सरकार का कहना है कि इसका मुख्य लक्ष्य कनाडाई कंपनियों को अमेरिकी आयात के दबाव से बचाना और अमेरिकी सामान के आयात को कम करना है।
अधिकारियों के मुताबिक, कनाडा की ओर से पहले लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क के बाद अमेरिका से होने वाले इस्पात आयात में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। अब शुल्क को 50 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने के बाद इसमें और कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि टैरिफ बढ़ने का असर कुछ कारोबारों और उपभोक्ताओं की लागत पर पड़ सकता है।
कारोबारियों और कर्मचारियों के लिए 7.5 अरब डॉलर का पैकेज
व्यापार युद्ध से प्रभावित कंपनियों और कर्मचारियों को राहत देने के लिए कनाडा सरकार ने 7.5 अरब कनाडाई डॉलर, यानी करीब 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर के सहायता पैकेज की घोषणा की है।
सरकार का कहना है कि यह पैकेज उन कारोबारों और कर्मचारियों की मदद करेगा जो अमेरिकी टैरिफ के कारण आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
कनाडा के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक सरकार व्यापार शुल्क के प्रभाव को कम करने के लिए 30 अरब कनाडाई डॉलर से अधिक की सहायता उपलब्ध करा चुकी है। यह राशि जवाबी शुल्क से मिलने वाले संभावित सरकारी राजस्व से भी काफी ज्यादा बताई गई है।
दुनिया की बड़ी ट्रेड पार्टनरशिप पर असर की आशंका
अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता टैरिफ विवाद सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय से एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
इस्पात, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, कृषि और उपभोक्ता उत्पादों जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है। ऐसे में लंबे समय तक टैरिफ जारी रहने पर कंपनियों की लागत, सप्लाई चेन और उपभोक्ता कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका कनाडा के इस जवाबी कदम पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यदि दोनों देश शुल्क और बढ़ाते हैं, तो यह व्यापार विवाद और गंभीर रूप ले सकता है।

