पटना: बिहार में जनहित और विकास से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और सख्त कर दी है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मंगलवार को विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा करते हुए सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास कार्यों और भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा बैठक में कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, उच्च शिक्षा, सहकारिता समेत कई विभागों की योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को योजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ साप्ताहिक एवं मासिक समीक्षा करने का निर्देश दिया।

किसान रजिस्ट्री में 62% लक्ष्य पूरा, धीमे जिलों पर नाराजगी
बैठक में किसान रजिस्ट्री की प्रगति की भी समीक्षा हुई। राज्य में कुल 86.36 लाख किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 53.54 लाख किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का करीब 62 प्रतिशत है। वैशाली और शेखपुरा ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं, सारण और जमुई में पंजीकरण की गति अपेक्षाकृत धीमी पाए जाने पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई। उन्होंने इन जिलों में विशेष अभियान चलाकर किसान रजिस्ट्री में तेजी लाने और राज्य स्तर पर सत्यापन के लिए लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया।
PM Surya Ghar योजना में 1.22 लाख से ज्यादा आवेदन
ऊर्जा विभाग की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि राज्य में अब तक 1,22,656 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और सोलर इंस्टॉलेशन का काम जारी है। पटना जिला इंस्टॉलेशन और 7,294 लाख रुपये की सब्सिडी के मामले में सबसे आगे बताया गया।
कुल 35,741 ऋण आवेदनों में से करीब 58.8 प्रतिशत ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। मुख्य सचिव ने बैंकों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर लोन रिजेक्शन की दर घटाने और रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की गति बढ़ाने को कहा।

आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण भी होगा तेज
आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण की समीक्षा के दौरान जमीन की कमी और भूमि विवादों को जल्द सुलझाने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने मनरेगा (वीबी-जी राम जी) और 15वें वित्त आयोग के संसाधनों का प्रभावी अभिसरण करते हुए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण तय समय में पूरा कराने का निर्देश दिया।
बिहार में 2.59 करोड़ लोगों की TB स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग के टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा में राज्य की उपलब्धि सामने आई। अब तक बिहार में 2.59 करोड़ लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की जा चुकी है। यह निर्धारित 52 दिनों के लक्ष्य का 213 प्रतिशत बताया गया।
जिलावार प्रदर्शन में सारण ने 400 प्रतिशत और सहरसा ने 386 प्रतिशत स्क्रीनिंग के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।
मुख्य सचिव ने जिला स्तर पर ‘टीबी मुक्त भारत समिति’ को सक्रिय रखने और निक्षय पोर्टल पर सभी जांच परिणामों की समय पर एंट्री सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही उन्होंने फ्रंटलाइन स्क्रीनिंग बढ़ाने, 100 प्रतिशत अपफ्रंट न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) कराने और निक्षय पोषण योजना के तहत लाभार्थियों को भुगतान में तेजी लाने को कहा। अब तक 93,275 लाभार्थियों को इस योजना के तहत भुगतान किया जा चुका है।
वेजफेड, कोल्ड स्टोरेज और सब्जी आउटलेट के लिए जमीन जल्द मिलेगी
सहकारिता विभाग की योजनाओं की समीक्षा में प्रखंड स्तर की आधारभूत संरचनाओं, कोल्ड स्टोरेज और तरकारी आउटलेट्स के लिए लंबित तीन भूमि हस्तांतरण मामलों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।
इसके अलावा प्याज भंडारण की योजनाओं के लिए लंबित नौ भूमि हस्तांतरण मामलों को भी तत्काल निपटाने को कहा गया।
211 नए डिग्री कॉलेजों के लिए जमीन पर बड़ा फैसला
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 7 निश्चय-3 के तहत राज्य में 211 नए डिग्री कॉलेजों के स्थायी परिसरों के निर्माण की योजना की भी समीक्षा की गई।
अब तक 68 कॉलेजों के लिए भूमि विवरणी प्राप्त हो चुकी है, जबकि 143 कॉलेजों के लिए भूमि संबंधी जानकारी अभी लंबित है।मुख्य सचिव ने पूर्वी चंपारण, सीवान और पटना के जिलाधिकारियों को जमीन हस्तांतरण में तेजी लाने का निर्देश दिया।

निर्देश के अनुसार: ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेज के लिए कम से कम 5 एकड़ जमीन,शहरी क्षेत्रों में कम से कम 2.5 एकड़ जमीन,पटना शहरी क्षेत्र में कम से कम 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने प्रखंड मुख्यालयों के आसपास उपलब्ध सरकारी या गैरमजरूआ आम जमीन को जल्द चिन्हित कर आवंटित करने का निर्देश भी दिया।
विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि योजनाओं की सफलता केवल बजट और स्वीकृति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समय पर क्रियान्वयन और विभागीय समन्वय भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को नियमित निगरानी करते हुए योजनाओं में आने वाली अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया।

