Jantar Mantar Protest: आरक्षण के खिलाफ जंतर-मंतर पर उमड़ा हुजूम, आज फिर जुटेगी भीड़?

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Jantar Mantar Protest: जाति आधारित आरक्षण की व्यवस्था के खिलाफ शुक्रवार, 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाने की मांग उठाई। पुलिस की अनुमति नहीं होने के बावजूद प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

देर शाम दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाना शुरू किया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था और वे अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने के लिए जुटे थे।

आज फिर बड़ी संख्या में जुटने की संभावना

प्रदर्शन को सोशल मीडिया के जरिए भी mobilise किया गया था। आयोजकों और समर्थकों की ओर से 22 अगस्त को भी अधिक संख्या में युवाओं के पहुंचने की संभावना जताई गई। अलग-अलग राज्यों से लोग दिल्ली पहुंचने की बात कही जा रही है।

जंतर-मंतर पर सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। प्रदर्शन स्थल पर मंच भी बनाया गया था। प्रदर्शनकारी पोस्टर, बैनर और राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचे थे। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, करणी सभा सहित कई सामाजिक और अन्य संगठनों से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी बताई गई।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और RAF ने भीड़ को हटाने की कार्रवाई की। सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस की बस के ऊपर चढ़ते और तिरंगा लहराते दिखाई दिए। दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग पुलिस वाहन के आसपास भी जमा नजर आए।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को भी हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन बाद में पुलिस ने जंतर-मंतर खाली कराने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी।

प्रदर्शनकारियों ने उठाईं ये प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों की ओर से आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और आर्थिक आधार को अधिक महत्व देने की मांग की गई। यूट्यूबर अजीत भारती ने मीडिया से बातचीत में आंदोलन से जुड़ी चार प्रमुख मांगों का उल्लेख किया।

पहली मांग: आरक्षण व्यवस्था के पिछले दशकों के प्रभाव को लेकर सरकार श्वेत पत्र जारी करे, ताकि इसके परिणामों का सार्वजनिक मूल्यांकन किया जा सके।

दूसरी मांग: आरक्षण में कोटा के भीतर कोटा और क्रीमी लेयर से जुड़े प्रावधानों पर स्पष्ट नीति बनाई जाए।

तीसरी मांग: उच्च शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में मेरिट से जुड़े मानकों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था हो। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि योग्य छात्रों के अवसर प्रभावित नहीं होने चाहिए।

चौथी मांग: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS को मिलने वाली सुविधाओं और वास्तविक लाभ की समीक्षा की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल EWS का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा, फीस और अन्य सुविधाओं में भी ठोस सहायता मिलनी चाहिए।

सरकार से बातचीत की भी मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत शुरू करने की अपील की है। उनका कहना है कि आरक्षण नीति के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए और व्यवस्था की समीक्षा के लिए आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

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